कुछ अमेरिकी शहरों में युवा महिलाओं ने कमाई में पुरुषों को छोड़ा पीछे | मानवाधिकार | DW | 01.04.2022

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मानवाधिकार

कुछ अमेरिकी शहरों में युवा महिलाओं ने कमाई में पुरुषों को छोड़ा पीछे

अमेरिका के कई शहरों में महिलाओं ने धन कमाने के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. प्यू रिसर्च सेंटर की ताजा रिपोर्ट कहती है कि कम से कम 22 बड़े शहर ऐसे हैं जिनमें युवतियां पुरुषों के बराबर कमा रही हैं.

अमेरिका में युवा महिलाएं पुरुषों के बराबर कमा रही हैं

अमेरिका में युवा महिलाएं पुरुषों के बराबर कमा रही हैं

अमेरिका में अब भी महिलाएं कमाई के मामले में पुरुषों से काफी पीछे हैं. 2019 में औसतन महिलाओं की कमाई पुरुषों का 82 प्रतिशत रही. लेकिन नई रिपोर्ट बताती है कि युवा पुरुषों और महिलाओं के बीच कमाई का यह अंतर लगातार घट रहा है.

अमेरिका के 250 में कम से कम 22 मेट्रो शहर ऐसे हैं जहां 30 साल से कम उम्र की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा कमा रही हैं या फिर उनके बराबर हैं. पूर्णकालिक काम करने वालीं महिलाओं का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा इन 22 शहरों में रहता है. अमेरिकी शोध संस्थान प्यू रिसर्च सेंटर ने जनगणना में हासिल हुए आंकड़ों के अध्ययन से यह रिपोर्ट तैयार की है.

पुरुषों को छोड़ा पीछे

न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और लॉस एंजेलिस अमेरिका के वे शहर हैं जहां महिलाओं और पुरुषों की कमाई लगभग बराबर है. लेकिन 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं की बात की जाए तो न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में वे पुरुषों से, मामूली सी ज्यादा कमाई कर रही हैं. पुरुषों के हर 100 रुपये के मुकाबले इन महिलाओं की आय 102 रुपये है. लॉस एंजेलिस मेट्रो क्षेत्र में 2019 में महिलाओं और पुरुषों की औसत लगभग बराबर थी.

रिपोर्ट के मुताबिक 107 शहर ऐसे हैं जहां युवा महिलाओं की आय पुरुषों की आय से थोड़ी ही कम है. यहां 30 वर्ष से कम आयु की महिलाओं की कमाई पुरुषों के मुकाबले 90 से 99 प्रतिशत है. 2019 में देश में पूर्णकालिक काम करने वाली कुल महिलाओं की लगभग 47 फीसदी आबादी इन 107 शहरों में रह रही थी.

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अन्य 103 शहरों में, जो कि 17 प्रतिशत कामकाजी महिलाओं के घर हैं, युवा महिलाएं पुरुषों के मुकाबले 80-89 फीसदी तक कमाई कर रही हैं. 14 मेट्रो शहर ऐसे हैं जहां 30 वर्ष से कम आयु वाली महिलाओं की आय पुरुषों के मुकाबले 70-79 फीसदी तक थी. यहां कुल कामकाजी महिलाओं का एक फीसदी हिस्सा ही रहता है. रिपोर्ट के मुताबिक 30 साल से कम आयु की कामकाजी महिलाओं का 19 प्रतिशत हिस्सा ही मेट्रो शहरों में रहता है.

उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता अंतर

राष्ट्रीय स्तर पर 30 वर्ष से कम आयु की महिलाएं जो पूरा साल पूर्णकालिक काम करती हैं, पुरुषों के मुकाबले 93 फीसदी कमाती हैं. लेकिन ऐतिहासिक समझ बताती है कि जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, आय का अंतर भी बढ़ता जाता है.

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उदाहरण के लिए साल 2000 में पूर्णकालिक काम करने वालीं 16 से 29 साल की महिलाओं पुरुषों के हर 100 रुपये के मुकाबले 88 रुपये कमा रही थीं. लेकिन 2019 में, जबकि वही महिलाएं 35 से 48 वर्ष के आयु समूह में पहुंच गईं, तो उनकी कमाई उन्हीं पुरुषों के मुकाबले 80 फीसदी रह गई. आंकड़े बताते हैं कि जब युवा काम करना शुरू करते हैं तब उनकी आय में अंतर सबसे कम होता है जो समय के साथ साथ बढ़ता जाता है.

भारत में स्थिति

भारत में हाल ही में आईआईएम अहमदाबाद ने बड़ी कंपनियों में बड़े पदों पर काम करने वाली महिलाओं के बीच सर्वे में पाया कि अपने पुरुष सहकर्मियों के मुकाबले वे 85 प्रतिशत ही कमा रही थीं. टॉप मैनेजमेंट और अन्य उच्च पदों पर काम करने वालीं महिलाओं की औसत आय सालाना 1.91 करोड़ रुपये थी जबकि पुरुषों की औसत आय 2.24 करोड़ रुपये.

‘द ग्लास सीलिंग – लीडरशिप जेंडर बैलंस' नाम के इस अध्ययन में 2021 में चार हजार कर्मचारियों पर सर्वे किया गया था जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की 200 सबसे बड़ी कंपनियों में काम करते हैं. इनमें सीईओ, बोर्ड मेंबर आदि शामिल थे.

महामारी के दौरान भारत में जेंडर पे गैप और ज्यादा बढ़ा है. पेरोल सुविधा देने वाली कंपनी एडीआर के एक सर्वेक्षण के मुताबिक अतिरिक्त जिम्मेदारी या नया काम लेने पर 65 प्रतिशत महिलाओं को ही वेतन वृद्धि मिलती है, जबकि पुरुषों में यह संख्या 70 फीसदी है.

 

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