हेट स्पीच से लड़ने के लिए सिपाही तैयार कर रहा है बेल्जियम | दुनिया | DW | 18.11.2016
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दुनिया

हेट स्पीच से लड़ने के लिए सिपाही तैयार कर रहा है बेल्जियम

इंटरनेट पर नफरत फैलाने के बढ़ते मामलों को देखते हुए बेल्जियम में युवाओँ को ट्रेनिंग दी जा रही है. इन युवाओं को हेट स्पीच से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है.

बेल्जियम में इंटरनेट-सिपाही तैयार हो रहे हैं. इंटरनेट पर फैलाई जाने वाली नफरत से लड़ने के लिए सरकार के समर्थन से एक मुहिम चल रही है. इसके तहत युवाओं को साइबर-पट्रोलिंग के लिए तैयार किया जा रहा है. नोहेट नाम के इस अभियान के लिए 31 लोगों को चुना गया है. इनकी उम्र 18 से 35 वर्ष के बीच है. काउंसिल ऑफ यूरोप के इस प्रोग्राम के तहत शोषण और कट्टरपंथ के विरोध में ये कार्यकर्ता इंटरनेट पर काम करेंगे. अगर किसी का शोषण किया जाता है या फिर किसी को कट्टर बनाने की कोशिश की जाती है तो ये साइबर सिपाही ऑनलाइन जवाब देंगे.

बेल्जिमय की सामाजिक विकास, युवा और महिला अधिकार मंत्री इसाबेले सिमोनिस कहती हैं, "इंटरनेट पर नफरत का सामना युवाओं से ज्यादा होता है. सिर्फ नस्लवादी नहीं बल्कि, लैंगिक भेदभाव और शोषण को बढ़ावा देतीं अन्य टिप्पणियां भी दिखती हैं. मेरे ख्याल से कट्टरपंथ की शुरुआत यहीं से होती है."

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सिमोनिस कहती हैं कि युवा लोगों को इसके लिए तैयार करने का मकसद यह है कि इंटरनेट पर उठती नफरत का जवाब इंटरनेट पर ही दिया जा सके. जब और जहां नफरत की बात हो, वहीं उसका सामाना किया जा सके.

इसी साल मार्च में बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में इस्लामिक स्टेट ने आत्मघाती हमला किया था. उसके बाद से वहां कई आतंकवादी पकड़े जा चुके हैं. लिहाजा देश कट्टरपंथ को लेकर चिंतित है. इसलिए साइबर सिपाहियों की इस मुहिम को समर्थन मिल रहा है. हालांकि इस मुहिम के निशाने पर हर तरह की नफरत होगी. जैसे ब्रेक्जिट के दौरान या अमेरिकी चुनावों को लेकर भी जिस तरह की घृणा भरी टिप्पणियां की गई थीं, उनसे भी लड़ना इस मुहिम का मकसद है.

19 साल के फ्लोरियान विंसेंट इस मुहिम में शामिल किए गए एक साइबर-सिपाही हैं. वह बताते हैं, "ऐसी कोई खास रणनीति तो हमारे पास नहीं है. और हम कर्मचारी भी नहीं हैं. यह कोई नौकरी नहीं है. हमें बस करना इतना है कि अगर इंटरनेट पर हमें कहीं किसी तरह की नफरत फैलाने वाली बात दिखती है तो उसका जवाब देना है. और इस जवाब देने की हमें ट्रेनिंग दी गई है." विंसेंट बताते हैं कि किसी आम आदमी की आम फेसबुक पोस्ट से लेकर किसी बड़े नेता या सिनेमा जगत की हस्ती के अकाउंट तक, हर जगह वह नफरत का जवाब देने को तैयार हैं.

जिस तरह के जवाब देने की ट्रेनिंग साइबर-सिपाहियों को मिली है, उनमें तथ्यों की जांच भी शामिल है. यदि गलत तथ्यों को फैलाया जा रहा है तो साइबर सिपाही सही तथ्यों को पेश कर सकते हैं. विंसेंट अपना काम शुरू भी कर चुके हैं. उन्होंने देखा कि एक महिला शरणार्थियों के बारे में काफी ऊल-जुलूल लिख रही थी. विंसेंट बताते हैं, "मैंने उसे जवाब दिया कि उसे अपनी राय रखने का हक है लेकिन कई बार जिस तरह से यह राय जाहिर की जाती है, उसमें नफरत नजर आती है. और उसके कुछ तथ्य भी गलत थे." विंसेंट कहते हैं कि उनके अभियान का मकसद नफरत फैलाने वाले लोगों को यह समझाना है कि अपनी राय रखने के बेहतर और वैकल्पिक तरीके भी उपलब्ध हैं.

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ब्रसेल्स से काम करने वाली एक सामाजिक संस्था ऊनिया के मुताबिक 2015 में हेट स्पीच के कुल 365 मामले सामने आए थे. उनमें से 92 फीसदी मामले इंटरनेट पर दिखे. 102 मामले फेसबुक और ट्विटर के थे.

ऑनलाइन धमकियां ना सिर्फ आम होती जा रही हैं बल्कि उनकी गंभीरता भी बढ़ती जा रही है. 2010 में सोशल मीडिया के जरिए लोगों को परेशान करने के 36 गंभीर मामले दर्ज हुए थे. 2015 में ये चार गुना बढ़कर 126 तक पहुंच गए. लेकिन सिमोनिस स्पष्ट कर देती हैं कि साइबर-सिपाही कोई पुलिस नहीं हैं. वह कहती हैं, "युवाओं के भीतर नागरिकता की भावना जगाने की कोशिश है. मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा युवा ऑनलाइन सर्फिंग के वक्त लोगों को समझाने और शिक्षित करने में अपना योगदान दें."

वीके/ओएसजे (एएफपी)

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