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अफगानिस्तान में महिलाएं
फाइल तस्वीरतस्वीर: ALI KHARA/REUTERS

अफगानिस्तान में दो महिला अधिकार कार्यकर्ता लापता

४ फ़रवरी २०२२

इसी सप्ताह अफगानिस्तान में दो और महिला कार्यकर्ता लापता हो गईं. उन्हें गायब करने के आरोप तालिबान पर लग रहे हैं और अब संयुक्त राष्ट्र ने तालिबान से इस मामले में जानकारी मांगी है.

https://www.dw.com/hi/women-activists-missing-in-afghanistan-un-seeks-action/a-60658238

इसी के साथ 2022 में अभी तक अफगानिस्तान में अचानक लापता हो जाने वाली महिला कार्यकर्ताओं की संख्या चार हो गई है. बताया जा रहा है कि इन दोनों महिलाओं को तालिबान ने हिरासत में ले लिया है लेकिन इन रिपोर्टों की पुष्टि नहीं हो पाई है.

इसी बीच अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के मिशन (यूएनएमए) ने बताया कि उसने तालिबान से इस बारे में "तुरंत जानकारी" मांगी है. संस्था ने एक ट्वीट में कहा, "संयुक्त राष्ट्र "गायब" महिला कार्यकर्ताओं और उनके रिश्तेदारों को छोड़े जाने की मांग दोहरा रहा है."

तालिबान ने फंसाया

अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र की विशेष राजदूत रीना अमीरी ने भी तालिबान से कहा कि वो महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करे. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "अगर तालिबान अफगान लोगों से और दुनिया से मान्यता चाहते हैं तो उन्हें अफगान लोगों के और विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों का सम्मान करना पड़ेगा."

यूएनएमए ने गायब हुई महिलाओं का नाम नहीं बताया लेकिन एक और अधिकार कार्यकर्ता ने बताया कि तालिबान ने जहरा मोहम्मदी और मुरसल अयार को गिरफ्तार कर लिया है. इस कार्यकर्ता ने नाम ना जाहिर करने की शर्त पर बताया, "जहरा एक दंत चिकित्सक हैं और एक क्लीनिक में काम करती हैं. उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है."

(पढ़ें: अफगानिस्तान: प्रताड़ित महिलाओं को कहां मिलेगा ठिकाना).

उन्होंने यह भी बताया कि अयार से उनके एक पुरुष सहयोगी ने उनका वेतन उन्हें देने के लिए उनका पता मांगा और उसके बाद उनके घर से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने बताया, "इस तरह से उन्हें फंसाया गया. तालिबान ने उन्हें ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया."

लापता कार्यकर्ता

उन्होंने यह भी बताया कि अयार के पिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. कुछ ही हफ्तों पहले तमन्ना जरयाबी परयानी और परवाना इब्राहिमखेल नाम की कार्यकर्ता भी काबुल में एक प्रदर्शन में शामिल होने के बाद इसी तरह गायब हो गई थीं.

अफगानिस्तान में महिलाएं
काबुल में रोटी मिलने का इंतजार करती महिलाएंतस्वीर: Ali Khara/REUTERS

संयुक्त के मानवाधिकार उच्चायुक्त ने इन महिलाओं और उनके परिवार के चार रिश्तेदारों के लिए चिंता जताई है. ये सब अभी भी लापता हैं. तालिबान ने कहा है कि इनमें से किसी के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है. उसने यह भी कहा है कि वो मामले की जांच कर रहा है.

(पढ़ें: अफगानिस्तान में महिलाओं के 72 किलोमीटर से ज्यादा दूर जाने पर प्रतिबंध)

अगस्त 2020 में देश में सत्ता हथियाने के बाद तालिबान ने विरोध के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं. महिलाओं की रैलियों को जबरन तितर-बितर कराया गया, आलोचकों को गिरफ्तार किया गया और प्रदर्शनों पर खबर कर रहे स्थानीय पत्रकारों को मारा-पीटा.

तालिबान ने वादा तो किया है कि 1996 से 2001 के बीच उनके पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो कड़े इस्लामी कानून लागू किए थे उतने कड़े कानून इस बार लागू नहीं किए जाएंगे. लेकिन सत्ता में आते ही बहुत जल्द ही महिलाओं को अधिकांश सरकारी नौकरियों से प्रतिबंधित कर दिया और लड़कियों के अधिकांश माध्यमिक स्कूल भी बंद कर दिए.

सीके/एए (एएफपी)

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