आईपीओ के साथ भी, आईपीओ के बाद भी: साथ निभाएगा एलआईसी का शेयर? | भारत | DW | 14.02.2022

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भारत

आईपीओ के साथ भी, आईपीओ के बाद भी: साथ निभाएगा एलआईसी का शेयर?

जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आईपीओ की कीमत तो अभी तय नहीं की गई है लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सबसे बड़ा इनिशिएल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) साबित होगा.

भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है एलआईसी

भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है एलआईसी

भारत की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी को शेयर बाजार में उतारना देश में निजीकरण की मुहिम को बड़े प्रोत्साहन के रूप में देखा जा रहा है. विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इससे सरकार को दस अरब डॉलर यानी पांच खरब रुपये से ज्यादा की कमाई हो सकती है.

एलआईसी का आईपीओ मार्च में आने की संभावना है. इसके बाद टीसीएस और रिलायंस की तर्ज पर यह शेयर बाजार में भारत की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल हो जाएगी.

एलआईसी को 1956 में स्थापित किया गया था. साल 2000 में जब निजी कंपनियों को जीवन बीमा उद्योग में प्रवेश की इजाजत मिली, उससे पहले भारतीयों के लिए जीवन बीमा का मतलब एलआईसी ही होता था. आज भी भारत के जीवन बीमा बाजार के दो तिहाई हिस्से पर इसी का कब्जा है.

विशाल है एलआईसी

एलआईसी 367 खरब रुपये की संपत्ति की मालिक है, जो भारत के जीडीपी का लगभग 16 प्रतिशत है. इसके एक लाख से ज्यादा कर्मचारी और दस लाख से ज्यादा बीमा एजेंट हैं. कंपनी के पास देश के सभी प्रमुख शहरों में अहम जगहों पर बड़े-बड़े दफ्तरों के रूप में अहम संपत्ति है. इनमें चेन्नई की 15 मंजिला इमारत और मुंबई के केंद्र में स्थित मशहूर विशाल भवन भी है, जो कंपनी का मुख्यालय है.

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माना जाता है कि एलआईसी के पास बेशकीमत कलाकृतियां भी संग्रहित हैं जिनमें एमएफ हुसैन की पेंटिंग शामिल हैं. हालांकि इस संग्रह की जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपबल्ध नहीं है.

कोविड महामारी के कारण धीमी रफ्तार से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था में सरकार एलआईसी के आईपीओ को बड़ी उम्मीदभरी निगाहों से देख रही है. निजीकरण के रूप में सरकारी संपत्तियां बेचकर पैसा जुटा रही भारत सरकार को इस आईपीओ से अच्छी खासी कमाई की उम्मीद है क्योंकि पिछले दिनों उसे सरकारी कंपनियां बेचने से ज्यादा धन नहीं मिला था. इस वित्त वर्ष में सरकार ने सरकारी संपत्तियों के निजिकरण से 780 अरब डॉलर जुटाने का लक्ष्य तय किया था लेकिन अब तक की बिक्री से सिर्फ 120.3 अरब रुपये ही जुटाए जा सके हैं.

आईपीओ का जम कर प्रचार

आर्थिक मामलों के जानकारी श्रीनाथ श्रीधरन कहते हैं कि एलआईसी भारत सरकार के लिए ‘पारिवारिक गहनों' जैसी है. कंपनी अपने पॉलीसीधारकों को डिस्काउंट पर आईपीओ में निवेश करने की पेशकश दे रही है. इसके लिए टीवी और अखबार में विज्ञापनों के जरिए खूब प्रचार भी किया जा रहा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे निवेशक इस पेशकश में खूब दिलचस्पी दिखा रहे हैं, जिनमें पहली बार निवेश कर रहे लोग भी शामिल हैं. लेकिन निवेशकों के सामने कुछ उलझनें भी हैं. जैसे कि कंपनी के निवेश के फैसलों में सरकार का कितना दखल रहेगा. साथ ही, बीमा बाजार में बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के बीच एलआईसी कब तक अपनी बढ़त बरकरार रख पाएगी, यह भी लोगों के सामने अहम सवाल है.

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रविवार को एलआईसी ने बाजार नियामक में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए अर्जी दाखिल की है और इससे आठ अरब डॉलर जुटाने की उम्मीद जताई है. कंपनी 31 करोड़ 62 लाख 50 हजार शेयर बेच रही है, जो पहले की योजना से कम हैं. एक सरकारी सूत्र के अनुसार बाजार के मौजूदा हालात के चलते यह कटौती की गई है.

इकोनॉमिक रिसर्च करने वाली संस्था ब्रैंड फाइनैंस के मुताबिक एलआईसी के पास 28 करोड़ से ज्यादा पॉलिसी हैं जिनकी कीमत 8.66 अरब डॉलर यानी लगभग 6.5 खरब रुपये है.

पिछले आईपीओ का प्रदर्शन

2017 में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस ने आईपीओ पेश किया था और 1.3 अरब डॉलर यानी लगभग एक खरब रुपये जुटाए थे. तब से कंपनी के शेयरों की कीमत दोगुनी हो चुकी है. पिछले साल पेटीएम ने आईपीओ के जरिए 2.5 अरब डॉलर यानी लगभग 1.89 खरब रुपये जुटाए लेकिन तब से कंपनी के शेयरों की कीमत 58 प्रतिशत गिर चुकी है.

2021 में भारतीय कंपनियों ने शेयरों की शुरुआती बिक्री के जरिए 16.6 अरब डॉलर जुटाए हैं जो 2017 में बने रिकॉर्ड से 52 प्रतिशत ज्यादा है.

भारत में सरकारी कंपनियों का शेयर बाजारों का अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा है. कोल इंडिया ने 2010 में तीन सौ रुपये के भाव से शेयर बेचना शुरू किया था. आज उसकी कीमत 145 रुपये के आसपास है. इसी तरह जरनल इंश्योरेंस और न्यू इंडिया एश्योरेंस के शेयरों का भाव भी आधे से ज्यादा गिरकर 135 रुपये के आसपास है.

वीके/एनआर (रॉयटर्स, एएफपी)

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