इतिहास में आज: 14 सितंबर | ताना बाना | DW | 12.09.2018
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ताना बाना

इतिहास में आज: 14 सितंबर

14 सितंबर को हर साल हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है. लेकिन इसकी शुरुआत कहां से हुई? क्या वजह है कि इसी दिन को चुना गया? आइए इसके इतिहास को जानें.

14 सितंबर 1949 को हिन्दी को भारत की आधिकारिक भाषा और देवनागरी को आधिकारिक लिपी के रूप में स्वीकारा गया. यही वजह है कि 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है. पिछले कुछ सालों से इस दिन स्कूलों और कॉलेजों में कई तरह के समारोह भी होने लगे हैं.

यह सच है कि भारत की एक बड़ी आबादी हिन्दी में संवाद कर सकती है लेकिन आम धारणा के विपरीत हिन्दी को कभी राष्ट्र भाषा का दर्जा नहीं दिया गया. 1950 में जब संविधान लागू हुआ, तो उसमें हिन्दी के साथ साथ अंग्रेजी को भी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया और राज्य सरकारों को राज्य की भाषाएं इस्तेमाल करने की अनुमति दी गयी. 

उस समय कहा गया था कि संविधान बनने के 15 साल बाद अंग्रेजी से यह दर्जा छीन लिया जाएगा. भारत की लगभग 40 फीसदी आबादी हिन्दी बोलना जानती है. ऐसे में उसी को भविष्य में आधिकारिक भाषा के रूप में इस्तेमाल करने का विचार था. लेकिन दक्षिण भारत से इसका विरोध हुआ और 1963 में आधिकारिक भाषा अधिनियम लागू किया गया.

आज भारत में 23 आधिकारिक भाषाएं हैं. हिन्दी दुनिया भर में चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली जबान है. हिन्दी से पहली चीनी, स्पैनिश और अंग्रेजी का नंबर आता है. "किंकर्तव्यविमूढ़" को हिन्दी का सबसे कठिन शब्द माना जाता है.

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