अरबों रुपये की कैलिफोर्नियम यूपी-बिहार के गिरोह के पास कहां से आई | भारत | DW | 31.05.2021
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भारत

अरबों रुपये की कैलिफोर्नियम यूपी-बिहार के गिरोह के पास कहां से आई

कैलिफोर्नियम इतनी कीमती धातु है कि उसके एक ग्राम की कीमत 180 करोड़ रुपये से ज्यादा है. लखनऊ में कुछ लोग 340 ग्राम कैलिफोर्नियम बेचने की फिराक में थे.

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आरोपियों का कहना है कि उन्हें खान में काम करने वाले व्यक्ति से यह कैलिफोर्नियम मिली (फाइल फोटो)

कैलिफोर्नियम से विज्ञान के विद्यार्थी भले ही परिचित हों, किंतु आम लोगों के लिए यह जाना-पहचाना नाम नहीं है. दरअसल, यह प्राकृतिक नहीं, बल्कि प्रयोगशाला में तैयार होने वाला एक रासायनिक तत्व है जिसे दुनिया की तीसरी सबसे महंगी धातु माना जाता है. हाल के दिनों में यह नाम तब चर्चा में आया जब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बिहार के पटना और नवादा जिलों के दो युवकों सहित आठ लोगों को 340 ग्राम कैलिफोर्नियम के साथ गिरफ्तार किया गया.

पुलिस ने एक इनपुट के आधार पर सभी को गाजीपुर थाना क्षेत्र में पॉलीटेक्निक चौराहे के पास से पकड़ा. इनके कब्जे से कैलिफोर्नियम के अलावा दस हजार रुपये नकद, एक मारुति कार, स्कूटी व बाइक भी बरामद की गई.

अरबों का मामला

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुद्ध कैलिफोर्नियम की कीमत 2.5 करोड़ डॉलर प्रति ग्राम यानी करीब 181 करोड़ रुपये प्रति ग्राम बताई जाती है. लखनऊ में बरामद किया गया कैलिफोर्नियम का यह टुकड़ा 340 ग्राम का बताया गया है. जाहिर है, यह एक मामूली सौदा नहीं था. अगर यह वाकई शुद्ध कैलिफोर्नियम धातु है तो इसकी बिक्री हो जाने पर गिरोह को अरबों रुपये मिलते.

लखनऊ की एडीसीपी (उत्तरी) ने मीडिया को जानकारी दी गई कि महेश और रविशंकर इसे बिहार से लेकर लखनऊ आए थे. 29 वर्षीय महेश नवादा जिले के नवादा थाना क्षेत्र के न्यू एरिया हनुमान नगर का रहने वाला है जबकि 47 साल का रविशंकर पटना जिले के शाहजहांपुर का निवासी है. पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में पता चला है कि इन्हें कोयले की खान में काम करने वाले किसी व्यक्ति ने दिया था और उसी ने इसका नाम कैलिफोर्नियम बताया था. उसने ही इसके बहुत महंगे होने की जानकारी दी थी.

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पुलिस का कहना है कि इसकी बिक्री के लिए दोनों ने लखनऊ आकर अभिषेक से संपर्क किया और बीते जनवरी महीने से इसका सौदा करने को घूम रहे थे. इसी क्रम में इन लोगों ने एक प्रॉपर्टी डीलर शशिलेश से संपर्क किया और बिक्री के नाम पर एक लाख बीस हजार रुपये ले लिए, लेकिन उन्हें माल नहीं दिया. बीते शुक्रवार को अभिषेक ने शशिलेश को एक बार फिर बात करने के लिए बुलाया था. वहीं पुलिस ने सभी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अब इन लोगों के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स निकाल रही है, ताकि पता चल सके कि इनके नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं.

फिलहाल पटना और नवादा जिले की पुलिस अपने स्तर से तहकीकात शुरू कर लखनऊ पुलिस के संपर्क करने का इंतजार कर रही है. अभी तक रविशंकर या महेश का कोई आपराधिक रिकॉर्ड सामने नहीं आया है. रविशंकर के बारे में केवल इतना पता चल सका है कि उसके कुछ दोस्त पुराने मेटल युक्त सामान और दुर्लभ पक्षियों की खरीद-बिक्री करते हैं. पुलिस इसकी पड़ताल कर रही है.

क्या है कैलिफोर्निया

इस धातु को सबसे पहले वर्ष 1950 में कैलिफोर्निया की एक लेबोरेटरी में तैयार (संश्लेषित) किया गया था, इसलिए इसका नाम कैलिफोर्नियम रखा गया.  विकिपीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार इसकी खोज का श्रेय स्टेलने जी. थॉमसन, कीनिथ स्ट्रीट, अल्बर्ट ग्हेयरसो तथा ग्लेन टी. सीबॉर्ग को जाता है. सर्वप्रथम इसे क्यूरियम व अल्फा पार्टिकिल के साथ विस्फोट (बमबार्डिंग) से अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित लारेंस बर्कले नेशलनल लेबोरेटरी में तैयार किया गया था. यह एक रेडियोएक्टिव रासायनिक तत्व है. आवर्त सारिणी (पीरियोडिक टेबल) में इसे सीएफ के नाम से जाना जाता है और इसकी परमाणु संख्या (एटॉमिक नंबर) 98 है. अभी तक इसके दस आइसोटॉप्स ज्ञात हैं.

इसका उपयोग परमाणु ऊर्जा, विस्फोटक और लैंडमाइंस और खनिजों में सोने-चांदी की खोज (माइनिंग) और कैंसर के इलाज में किया जाता है. इसका इस्तेमाल पोर्टबल मेटल डिटेक्टर के रूप में भी किया जाता है. चूंकि, यह रेडियोएक्टिव है, इसलिए यह मानव के लिए काफी हानिकारक है. बरामदगी के बाद लखनऊ में इसे सिल्वर फ्वॉयल से ढंक कर शीशे के जार में वातानुकूलित कमरे में पूरी सुरक्षा के बीच रखा गया है.

बरामद किए गए कथित कैलिफोर्नियम के टुकड़े को परीक्षण के लिए कानपुर आईआईटी भेजा जा रहा है. इसकी जांच रिपोर्ट आने में वक्त लगेगा, किंतु इससे पहले इस बात की पड़ताल जरूरी है कि पकड़े गए इन लोगों के पास इतना महंगा कैलिफोर्नियम कहां से आया. क्या यह गिरोह पहले से ऐसे धातुओं की तस्करी में लिप्त है. अगर ऐसा कुछ है तो इससे देश की सुरक्षा को भी खतरा संभव है.

वीडियो देखें 02:52

कीमती कचरा

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