अंतरिक्ष में अपनी जगह बनाने के लिए यूरोप बेकरार | विज्ञान | DW | 10.01.2020
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विज्ञान

अंतरिक्ष में अपनी जगह बनाने के लिए यूरोप बेकरार

जर्मनी के साथ पूरा यूरोप मानता है कि डायनासोरों को मिटा देने वाले उल्कापिंड के टकराने जैसी विनाशकारी आकाशीय घटनाओं से बचने के लिए यूरोप को अंतरिक्ष में अपनी अहम जगह बनाने का वक्त आ गया है.

जर्मन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के आंद्रेआस हामर ने हाल ही में देश के उत्तरी तट पर स्पेसपोर्ट बनाने के विचार पर कहा, "हमें अंतरिक्ष में स्वतंत्र पहुंच बनाने की जरूरत है." हामर का बयान जर्मनी की तरह बाकी के यूरोपीय देशों की भविष्य की परियोजनाओं का साफ संकेत देता है. जर्मन सरकार के एयरोस्पेस नीति समन्वयक, थोमास यारत्सोंबेक इस सोच के पीछे तर्क देते हैं कि संभावित संघर्षों और संकटों के मद्देनजर किसी भी देश लिए अंतरिक्ष में खुद की प्रणालियां लगाना जरूरी है. अंतरिक्ष यात्रा कभी भी राजनीति और सत्ता से दूर नहीं रही. अंतरराष्ट्रीय राजनीति के पटल पर एक बार फिर से इस मुद्दे ने ध्यान खींचा है. हाल ही में "अंतरिक्ष बल" को बनाए जाने की घोषणा की गई है. नाटो सैन्य गठबंधन ने भी अंतरिक्ष में अलग "परिचालन डोमेन" की घोषणा की है.

क्या यह ट्रेंड बहुराष्ट्रीय परियोजनाओं की कीमत पर आएगा

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) ने नवंबर में स्पेन के शहर सेविले में संयुक्त अंतरिक्ष परियोजनाओं की नींव रखी. जहां सदस्य देशों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम और फंड पर बातचीत की. ईएसए के महानिदेशक यान वोएर्नर ने सभी देशों से इस अंतरिक्ष प्रोग्राम के लिए ज्यादा फंड देने की अपील की. महानिदेशक यान वोएर्नर ने इस कार्यक्रम में भाग ले रहे देशों से कहा, "हम उल्कापिंड के कारण मरना नहीं चाहेंगे."

 

उन्होंने सेविले में दो दिन तक चले मंत्रिस्तरीय परिषद कार्यक्रम में उस अंतरिक्ष चट्टान का जिक्र किया जिसने पृथ्वी से डायनासोर का अस्तित्व खत्म कर दिया था. वोएर्नर ने कहा कि ईएसए के चार प्रमुख स्तम्भों में "निगरानी का मुद्दा और सुरक्षा" जर्मनी के दिल के करीब रहा है. इसके अलावा खोज और प्रयोग, सेवा, डिजाइन और संचालन बाकी के अहम स्तम्भ हैं. खतरनाक आकाशीय पिंडों का समय पर पता लगाने और उन्हें रोकने के लिए तकनीकों का विकास जरूरी है. पृथ्वी के जीवन को प्रभावित करने वाले खतरों जैसे सोलर फ्लेअर्स को विफल करना इस कार्यक्रम का प्रमुख काम होगा.

महानिदेशक यान वोएर्नर ने अंतरिक्ष के मलबे को एक और बड़ा "जोखिम" बताया है. अंतरिक्ष में मौजूद 4,500 में से लगभग 3,000 सैटेलाइट अब सक्रिय नहीं हैं. यह मलबा बड़ा खतरा साबित हो सकता है. वह कहते हैं "मैं दो दिन पहले एक अखबार में पढ़ रहा था कि हमें अंतरिक्ष के बारे में ज्यादा ना सोचकर उन मुद्दों के बारे में सोचना चाहिए जो हर दिन के काम में आती हैं."

आने वाले सालों में ईएसए का नया एरियन 6 रॉकेट पहली बार शुरू होने वाला है. इसके निर्माण का निर्णय पांच साल पहले लिया गया था. 60 मीटर ऊंचा यह रॉकेट पहले बने रॉकेटों के मुकाबले तेज और सस्ता होगा. लेकिन पांच सालों में अंतरिक्ष के बाजार में बहुत तेजी से बदलाव आए हैं. अमेरिकी कंपनी एलन मस्क की स्पेस एक्स भी खासतौर पर दाम को नीचे धकेल रही है. अमेरिकी रॉकेट के बड़े हिस्से दोबारा प्रयोग में लाए जा सकते हैं. फाल्कन 9 का पहला-चरण बूस्टर पृथ्वी पर वापस भी आ गया है, तो वहीं यूरोप का एरियन 6 एक डिस्पोजेबल उत्पाद है. यूरोप के दृष्टिकोण से यह प्रतिस्पर्धा सही नहीं है. वोएर्नर ने कहा, "एलन मस्क को कार्गो सामान को अंतरिक्ष स्टेशन पर ले जाने के लिए नासा से अरबों मिलते हैं." सवाल यह है कि क्या उन्हें असल में ऐसी सेवाओं के लिए अरबों की जरूरत है या यह उन्हें बाजार में सस्ते लॉन्च की अनुमति देता है.

यूरोपीय संघ बनाम अमेरिका

दूसरी ओर यूरोपीय संघ के संस्थान अक्सर स्पेस एक्स के रॉकेट को उड़ान भरने के लिए पसंद करते हैं, जिनमें जर्मन सशस्त्र बल भी शामिल है. यह बल तो स्पेस एक्स की मदद से अंतरिक्ष में तीन जासूसी उपग्रह भेजने की योजना बना रहे हैं. यही नहीं थोमास यारत्सोंबेक ने जुलाई में कहा था कि "हम एरियन 6 की व्यावसायिक संभावनाओं को लेकर अनिश्चिय की स्थिति में हैं." आरिआनेग्रुप की जर्मन शाखा के प्रमुख पियेर गोडार्ट अंतरिक्ष में सुरक्षा के पहलुओं की बात करते हुए कहते हैं, "अंतरिक्ष यात्रा में मौसम के पूर्वानुमान, सीमा नियंत्रण, इंटरनेट, नेटवर्क रिसेप्शन, टेलीविजन जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं." वह यह भी पूछते हैं कि क्या वाकई में हम खुद को दूसरों पर निर्भर बनाना चाहते हैं. गोडार्ट कहते हैं, "अंतरिक्ष यात्रा में, यह सच है कि लॉन्च पैड पर संप्रभुता के बिना, कक्षा में कोई संप्रभुता नहीं होती." किसी भी मामले में रॉकेट और इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) जर्मन निवेश के बड़े हिस्से हैं. ईएसए में दोनों को बनाए रखने की संभावना है."

हालांकि भविष्य में जर्मन सरकार अंतरिक्ष यात्रा में छोटे, मध्यम उद्यमों (एसएमई) और स्टार्ट-अप्स से अधिक लाभ देखना चाहती है. इनका सुधार स्पष्ट लक्ष्य होगा. थोमास यारत्सोंबेक इस सेक्टर में संभावनाएं देखते हैं, "स्पेस एसएमई हमारे प्रमुख विषय हैं," उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि आईएसएस और आरिआने जैसे बड़े मुद्दों के बीच वे "थोड़े चूक गए." लेकिन इन चुनौतियों से निपटने के लिए फंड की भूमिका अहम है. 2019 में ईएसए का कुल बजट 5.72 बिलियन यूरो (6.32 बिलियन डॉलर) था, जिसका 73 प्रतिशत सदस्य राज्यों द्वारा दिया गया.

फ्रांस के बाद दूसरा सबसे ज्यादा फंड देने वाला देश जर्मनी है. यूरोपीय संघ जैसे संस्थागत भागीदार भी योगदान देते हैं. अगले तीन वर्षों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. वोएर्नर कहते हैं कि ईएसए देश के हर नागरिक से आठ यूरो प्रति वर्ष की मांग कर रहा है. वार्नर का कहना है, "संदेश यह है कि लोग वास्तव में अंतरिक्ष के शौकीन हैं, वे अंतरिक्ष देखना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि हम इसमें सक्रिय रहें."

एसबी/आरपी (डीपीए)

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