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अपराधभारत

पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

८ जुलाई २०२६

पश्चिम बंगाल में बलात्कार और हत्या मामले के एक आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत पर सवाल उठे हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपी ने एक अधिकारी की पिस्तौल छीन कर फायरिंग की और भागने की कोशिश की, जवाबी फायरिंग में उसकी मौत हो गई.

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कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करती लड़कियां
कोलकाता में एक किशोरी की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई तस्वीर: Prabhakar Mani Tewari/DW

कोलकाता से सटे दक्षिण 24-परगना जिले के बारुईपुर इलाके में 12  साल की एक किशोरी की बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी. उसका शव रविवार,5 जुलाई को इलाके के एक तालाब से बरामद होने के बाद इलाके में भारी तनाव पैदा हो गया. स्थानीय लोगों ने संदेह के आधार पर एक युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. हालांकि मंगलवार को प्रभावित इलाके के दौरे पर गए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उस युवक को बेकसूर बताया था.

इस मामले में पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप लग रहे हैं. स्थानीय लोगों को कहना है कि अगर पुलिस ने सक्रियता दिखाई होती तो किशोरी को बचाया जा सकता था. मुख्यमंत्री ने पुलिस वालों की लापरवाही साबित होने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है. उन्होंने पुलिस महानिदेशक सिद्धनाथ गुप्ता से इस मामले पर 72 घंटे में रिपोर्ट मांगी है.

इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर प्रभाष मंडल नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. उससे पूछताछ के आधार पर तीन दूसरे लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था.

इस घटना के विरोध में रविवार से ही कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं. मजबूत करने और अपराधियों को कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है. राज्य मेंमहिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हाल ही में सरकार ने दुर्गा स्क्वॉड के गठनका एलान किया है.

कोलकाता में विरोध प्रदर्शन करने निकले लोग
बलात्कार और हत्या की घटना के बाद पश्चिम बंगाल में विरोध प्रदर्शन और धरने हो रहे हैं तस्वीर: Prabhakar Mani Tewari/DW

गिरफ्तारी और मुठभेड़

प्रभाष के इस मामले में शामिल होने की जानकारी आखिर कैसे मिली? पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया, "हमने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज कब्जे में लेकर गहराई से जांच शुरू की. उसमें  किशोरी को अंतिम बार एक युवक के साथ जाते देखा गया था. यह युवक प्रभाष मंडल था. स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर शिनाख्त के बाद प्रभाष मंडल को गिरफ्तार किया गया.

मंगलवार को मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों के दौरे के बाद देर रात करीब पौने एक बजे पुलिस की एक टीम घटना को रिकंस्ट्रक्ट करने के लिए अभियुक्त प्रभाष को साथ लेकर उस तालाब के पास पहुंची जहां किशोरी का शव मिला था.

बारुईपुर के पुलिस अधीक्षक पलाश चंद्र ढाली ने डीडब्ल्यू को बताया, "पुलिस की एक टीम देर रात अभियुक्त को साथ लेकर घटना के रिकंस्ट्रक्ट के लिए मौके पर ले गई थी. उसने अचानक एक पुलिस वाले का हथियार छीन कर पुलिस पर फायरिंग कर दी और वहां से भागने की कोशिश करने लगा. जवाबी फायरिंग में उसे गोली लगी. अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."

मौके पर मौजूद पुलिस के एक और अधिकारी ने भी लगभग यही बात कही है. उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताया, "हम अभियुक्त को लेकर घटना के रिकंसट्रक्ट के लिए तालाब के किनारे पहुंचे थे. प्रभाष के पास ही कैनिंग थाने के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर रोनी सरकार खड़े थे. हम लोग अभी वहां घटना के बारे में बात कर रहे थे. अचानक प्रभाष रोनी की कमर में लगा रिवाल्वर छीन कर भागने लगा."

उनके मुताबिक, पुलिस टीम ने उसका पीछा किया. लेकिन उसने रिवाल्वर से गोली चला दी. उसके बाद बारुईपुर थाने के प्रभारी अर्घ्य मंडल ने आत्मरक्षा में उस पर फायरिंग की. प्रभाष को छाती और कमर में गोली लगी.

जेल में बंद महिलाओं के साथ किया गया रेप और वर्जिनिटी टेस्ट

उस अधिकारी ने बताया कि गंभीर रूप से घायल प्रभाष को बारुईपुर सब-डिवीजनल अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत गोषित कर दिया. इस बीच, सरकार ने मुठभेड़ की घटना की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.

कौन है प्रभाष?

प्रभाष बारुईपुर में सूर्यपूर इलाके में रहता था. उसके घर में माता-पिता के अलावा पत्नी और एक बेटा है. पत्नी इलाके के कई घरों में झाड़ू-पोछा लगाने का काम करती है. बलात्कार और हत्या के मामले में प्रभाष की गिरफ्तारी के बाद वह अपने बेटे के साथ मायके चली गई थी.

स्थानीय लोगों ने बताया कि प्रभाष के पास कोई स्थायी काम नहीं था. वह कभी रिक्शा वैन चलाता था तो कभी रंगाई-पुताई का काम करता था. वह नशे का भी आदी थी. उसकी मां संध्या मंडल बताती है कि वह किसी की बात नहीं सुनता था और नशे का आदी था.

प्रभाष की मौत के बाद संध्या ने पत्रकारों से कहा, "बेटे की मौत का दुख तो है. लेकिन उसे अपने किए की सजा मिल गई. अब हम ना तो उसका चेहरा देखना चाहते हैं और ना ही उसके शव को घर ले आएंगे."

पत्नी चंपा ने पत्रकारों से कहा, "उसने गलती की थी, इसलिए गोली से मरना पड़ा. उसका चरित्र शुरू से ही ऐसा रहा है. उसके साथ रहते हुए मैंने भी बहुत तकलीफ सही है. उसे नशे की भी लत थी. मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि उसने यह काम ( रेप और हत्या) नहीं किया होगा. "

दूसरी ओर, बारुईपुर की पीड़िता के पिता ने पुलिस मुठभेड़ में एक अभियुक्त की मौत पर खुशी जताई है. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में पुलिस की जांच और सरकार के काम पर संतोष जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने जैसा भरोसा दिया था वैसा ही काम हो रहा है. मुझे उम्मीद है बाकी अभियुक्तों को भी कड़ी सजा मिलेगी.

'ईश्वरीय न्याय' या 'जंगलराज'

अभियुक्त प्रभाष मंडल की पुलिस मुठभेड़ में मौत पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. सत्तारूढ़ बीजेपी ने इसे ईश्वरीय न्याय बताते हुए कहा है कि सरकार ने एक मिसाल कायम की है. दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट की तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी एक पोस्ट में कहा कि बंगाल में अब जंगलराज शुरू हो गया है. उन्होंने सवाल किया कि बंगाल पुलिस आखिर क्या कर रही है?  

हालांकि तृणमूल कांग्रेस पार्टी के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि कानून में मुठभेड़ का प्रावधान है. रेप और हत्या के दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

बीजेपी के प्रवक्ता देवजित सरकार ने इसे 'ईश्वरीय न्याय' बताया है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा है कि सरकार अपराध पर काबू पाने के लिए कड़े कदम उठा रही है. यह घटना इस बात का सबूत है कि अब राजनीतिक संरक्षण की वजह से कोई अपराधी नहीं बच सकता.

हालांकि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इस मुठभेड़ की जांच की मांग की है. उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "मुठभेड़ में अपराधियों के सफाए की बजाय न्याय व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए. कानून में भी फांसी का प्रावधान है."

राज्य में हाल के वर्षो में पुलिस मुठबेड़ में मौत की इस पहली घटना पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि आखिर पुलिस इतनी लापरवाह कैसे हो गई कि अभियुक्त पिस्तौल छीनने में कामयाब हो गया. मानवाधिकार कार्यकर्ता सौम्य सरकार ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा, "अगर सचमुच ऐसा हुआ तो पुलिस अभियुक्त की कमर के निचले हिस्से में भी तो गोली मार सकती थी. क्या सीने पर गोली लगना महज संयोग है?"