पाकिस्तान में मिलिट्री बेस बना सकता है चीन: पेंटागन | दुनिया | DW | 07.06.2017
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दुनिया

पाकिस्तान में मिलिट्री बेस बना सकता है चीन: पेंटागन

पेंटागन की एक रिपोर्ट में संकेत दिये गये हैं कि चीन भविष्य में पाकिस्तान में अपना एक सैन्य बेस बना सकता है. रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अफ्रीकी देश जिबूटी में एक बेस बनाने के बाद चीन विदेश में नये बेस बनाएगा.

यह अनुमान अमेरिकी रक्षा मंत्रालय की 97 पेज की एक सालाना रिपोर्ट में जताया गया है, जिसे अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश किया गया है. इस रिपोर्ट में चीन की 2016 की सैन्य गतिविधियों का विवरण है.

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में चीन का रक्षा बजट 180 अरब डॉलर से भी ज्यादा होने का अनुमान है. हालांकि चीन आधिकारिक तौर पर अपना रक्षा बजट 954.35 अरब युआन यानी 140.4 अरब डॉलर बताता है.

अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक चीन अपनी आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी होने के बावजूद रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी करना चाहता है. इस रिपोर्ट में बार-बार जिबूटी में चीन के नौसैनिक बेस का जिक्र है. रणनीतिक रूप से बेहद अहम लोकेशन पर स्थित जिबूती में पहले से ही अमेरिकी सेना का एक अहम सैन्य बेस है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन पाकिस्तान जैसे उन देशों में सैन्य बेस बनाने की कोशिश कर सकता है, जिनके साथ लंबे समय से उनके दोस्ताना रिश्ते हैं और उनके साझा सामरिक हित हैं. जिबूटी हिंद महासागर के दक्षिण-पश्चिमी मुहाने पर स्थित है. वहां चीन का सैन्य ठिकाना भारत की चिंताओं को बढ़ाता है.

रिपोर्ट में इस बात की चर्चा नहीं है कि पाकिस्तान में बनने वाले चीन के संभावित मिलिट्री बेस को लेकर भारत किस तरह की प्रतिक्रिया देगा. लेकिन यह जरूर बताया गया है कि पाकिस्तान एशिया प्रशांत क्षेत्र में चीन के हथियारों के लिए सबसे बड़ा बाजार है.

साल 2011 से 2015 के बीच चीन ने 20 अरब डॉलर से ज्यादा के हथियार बेचे, जिसमें से 9 अरब डॉलर के हथियार इस क्षेत्र में बेचे. इसके अलावा पिछले साल चीन ने पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत वह पाकिस्तान को 8 पंडुब्बियां बेचेगा.

पेंटागन की इस रिपोर्ट में चीन की सेना के समुद्र और अंतरिक्ष में शुरू किये गये अभियानों का जिक्र है. इसके अलावा चीन पर अमेरिकी कम्प्यूटरों को हैक करने और अहम जानकारियों में सेंध लगाने का आरोप भी लगाया गया है.

चीन के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से जब इस रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पेंटागन की इस रिपोर्ट को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए खारिज कर दिया.

एसएस/एके (रॉयटर्स)

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