अमेरिका ने 1,000 चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं का वीजा रद्द किया | दुनिया | DW | 10.09.2020

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दुनिया

अमेरिका ने 1,000 चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं का वीजा रद्द किया

मई के महीने में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कुछ चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं की देश में एंट्री पर प्रतिबंध लगा दिया था, उसके बाद यह पहला आधिकारिक अनुमान है. चीन और अमेरिका के बीच पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है.

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की कि 1,000 से अधिक चीनी छात्रों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं. रद्द किए गए वीजा की यह संख्या इस हफ्ते तक की है. अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मई के महीने में कुछ चीनी छात्रों और शोधकर्ताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था. उसके बाद अमेरिकी सरकार द्वारा दी गई यह पहली आधिकारिक संख्या है. उस समय चीनी छात्रों पर प्रतिबंध लगाते हुए ट्रंप ने कहा था कि उनका इस्तेमाल संवेदनशील अमेरिकी तकनीक और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी को हासिल करने के लिए हो रहा है.

अमेरिका चीन पर एक यूनिवर्सिटी की कोविड-19 की रिसर्च चुराने की कोशिश का आरोप भी लगा चुका है और उसका कहना है कि देश में चीनी सरकार द्वारा जासूसी के मामले भी बढ़े हैं. ट्रंप अपने चुनाव अभियान में भी चीन पर कई गंभीर आरोप लगाते आए हैं. वे कोरोना वायरस को रोकने में चीन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठा चुके हैं. ट्रंप कई बार अपने भाषणों में कोरोना वायरस को "चीनी वायरस" तक कह चुके हैं.

USA Chinesische Studenten in New York

चीनी झंडों के साथ कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में छात्र.

दूसरी ओर वीजा रद्द किए जाने पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, "हम चीन से वैध छात्रों और विद्वानों का स्वागत करना जारी रखेंगे, जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के सैन्य प्रभुत्व के लक्ष्यों को आगे नहीं बढ़ाते हैं." विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी साझा नहीं की कि किन लोगों के वीजा रद्द किए गए हैं. हालांकि, समाचार एजेंसी रॉयटर्स को अमेरिकी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कई चीनी छात्रों ने बताया है कि उन्हें नोटिस मिला जिसमें कहा गया है कि उनके वीजा रद्द हो चुके हैं.

साल 2018-19 में करीब 3,70,000 चीनी छात्रों ने अमेरिकी विश्वविद्यालों में दाखिला लिया था और इन छात्रों ने फीस और अन्य शुल्क के तौर पर करीब 14 अरब अमेरिकी डॉलर अदा किए थे. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वीजा रद्द करना कुछ ही छात्रों को प्रभावित करता है. गौरतलब है अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्र सबसे अधिक चीन उसके बाद भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब और कनाडा से आते हैं.

एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

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