यूएन: कीमतों में वृद्धि और यूक्रेन युद्ध से कुपोषित बच्चों के लिए स्थिति भयावह | मानवाधिकार | DW | 18.05.2022

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मानवाधिकार

यूएन: कीमतों में वृद्धि और यूक्रेन युद्ध से कुपोषित बच्चों के लिए स्थिति भयावह

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी हमले और वैश्विक कोरोना महामारी ने खाद्य आपूर्ति को प्रभावित किया है. यह स्थिति कुपोषित बच्चों के लिए विनाशकारी हो सकती है.

जानलेवा कुपोषण

जानलेवा कुपोषण

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) का कहना है कि कुपोषित बच्चों के जीवन को बचाने के लिए इलाज की लागत में 16 फीसदी की वृद्धि हो सकती है. यूनिसेफ के मुताबिक रेडी-टू-यूज थेराप्यूटिक फूड (आरयूटीएफ) के लिए जरूरी कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का भी इन बच्चों की जान बचाने पर असर पड़ सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अगर अगले छह महीनों में इस क्षेत्र में और धन नहीं जुटाया जाता है तो छह लाख बच्चे इस अति आवश्यक इलाज से वंचित हो सकते हैं. गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों को ऊर्जा से भरपूर एक ऐसा भोजन दिया जाता है, जो मूंगफली, तेल, चीनी और अन्य सामग्री से तैयार किया जाता है.

महंगा हुआ भोजन

यूनिसेफ का कहना है कि इस विशेष भोजन के एक बॉक्स में 150 पैकेट होते हैं, जो छह से आठ सप्ताह तक गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चे के लिए पर्याप्त है. इस तरह से बच्चा कुपोषण की इस स्थिति से बाहर निकल जाता है. बॉक्स की कीमत करीब 41 डॉलर यानी 3,100 रुपये से अधिक होती है. लेकिन अब कीमत में 16 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मौजूदा स्थिति में इस अतिरिक्त लागत से निपटने के लिए यूनिसेफ को 2.5 करोड़ डॉलर की जरूरत है. यूनिसेफ के मुताबिक अन्य कारकों के अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण खाद्य सुरक्षा पहले से ही महत्वपूर्ण दबाव में है और कीमतों में वृद्धि ऐसी स्थिति के लिए "विनाशकारी" हो सकती है. यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा, "दुनिया बच्चों की मौत के लिए एक टिंडरबॉक्स बन रही है जिसे टाला जा सकता है."

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एक अनुमान के मुताबिक गंभीर वेस्टेड (अति गंभीर अविकास) वाले बच्चे जब अपनी लंबाई के हिसाब से बहुत पतले होते हैं तो यह पांच साल से कम उम्र के 1.36 करोड़ बच्चों को प्रभावित करता है और इस आयु वर्ग में पांच में से एक की मृत्यु हो जाती है.

यूनिसेफ का कहना है कि यूक्रेन युद्ध से पहले भी गंभीर रूप से कुपोषित तीन बच्चों में से दो को इस विशेष भोजन तक पहुंच की कमी का सामना करना पड़ा रहा था.

एए/वीके (रॉयटर्स)

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