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समाज

यूएन: म्यांमार के कई शहरों में कम से कम 18 की मौत

१ मार्च २०२१

म्यांमार में तख्तापलट के बाद से लोकतंत्र की बहाली की मांग कर रहे लोगों का प्रदर्शन लगातार जारी है. रविवार को पुलिस की गोलीबारी में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई. यूएन मानवाधिकार आयोग ने हिंसा की निंदा की है.

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Myanmar | Proteste nach Militärputsch
तस्वीर: AP Photo/picture alliance

संयुक्त राष्ट्र ने रविवार को म्यांमार में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की निंदा की और देश के सैन्य शासकों से बलपूर्वक कार्रवाई रोकने का आग्रह किया है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने इसे सैन्य तख्तापलट के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शनों का सबसे घातक दिन बताया. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता रवीना शामदासानी ने एक बयान में कहा, "हम म्यांमार में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की कड़ी निंदा करते हैं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल के इस्तेमाल को तुरंत रोकने के लिए सेना से आग्रह करते हैं."

सबसे अधिक कार्रवाई म्यांमार के तीन शहरों यंगून, दवेई और मंडाले में हुई. इन शहरों में पुलिस ने नागरिक आंदोलन को खत्म करने के लिए बल का इस्तेमाल किया और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों को निशाना बनाया. शामदासानी ने आगे कहा, "म्यांमार के लोगों को शांति के साथ इकट्ठा होने और लोकतंत्र की बहाली की मांग करने का अधिकार है." उन्होंने कहा, "इन मौलिक अधिकारों का सम्मान सेना और पुलिस द्वारा किया जाना चाहिए, न कि हिंसा और और खूनी दमन किया जाना चाहिए."

Myanmar | Proteste nach Militärputsch
पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के स्टेन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया. तस्वीर: Thuya Zaw/ZUMA Wire/imago images

सैन्य शासन की कार्रवाई की निंदा

1 फरवरी को देश की सेना ने विद्रोह किया और चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल कर डाला था. सेना का कहना है कि पिछले साल नवंबर में आम चुनाव में धांधली हुई थी. सैन्य तख्तापलट को लोगों ने पसंद नहीं किया था लेकिन शुरूआती कुछ दिनों में विरोध प्रदर्शन शुरू नहीं हुआ था. फिर, कुछ दिनों बाद सेना के खिलाफ लोगों के विरोध प्रदर्शन ने गति पकड़ना शुरू किया और अब ये लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए हैं. शुरू में सुरक्षा बल थोड़ी सावधानी के साथ काम कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे जनता का विरोध फैलता गया, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई में तेजी आई.

बड़ी संख्या में गिरफ्तारी

म्यांमार की सेना ने कई दशकों तक देश पर राज किया, जबकि ताजा सैन्य तख्तापलट के विरोध में लाखों नागरिक अब हर दिन सड़कों पर उतर रहे हैं, लेकिन इस देश में सत्ता के सैन्य अधिग्रहण ने एक बार फिर दुनिया को चिंता में डाल दिया है. इस बीच अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने सुरक्षाबलों की कार्रवाई की निंदा की है. उन्होंने ट्वीट किया, "हम बर्मा के साहसी लोगों के साथ दृढ़ता के साथ खड़े हैं और सभी देशों को उनकी इच्छा के समर्थन में एक स्वर से बोलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं."

Myanmar Yangon Putsch Proteste Polizei Verhaftung
रविवार को भारी संख्या में प्रदर्शनकारी गिरफ्तार.तस्वीर: REUTERS

यंगून में रविवार को भारी संख्या में छात्रों और शिक्षकों को हिरासत में लिया गया. कई जख्मी लोगों की मदद करने की तस्वीर भी इस शहर से सामने आई हैं. एक टीचर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "पुलिस ट्रक से उतरी और उसके बाद बिना किसी चेतावनी के स्टेन ग्रेनेड फेंकना शुरू कर दिया."

ईयू ने प्रतिबंधों की पुष्टि की

यूरोपीय संघ के शीर्ष विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने भी हिंसा की निंदा की, उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि ईयू तख्तापलट के विरोध में प्रतिबंध लगाएगा. बोरेल ने एक बयान में कहा, "हिंसा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अवैध रूप से उखाड़ फेंकने को वैधता नहीं देगी. निहत्थे नागरिकों के खिलाफ गोलीबारी में, सुरक्षा बलों ने अंतरराष्ट्रीय कानून की सख्त अवहेलना दिखाई है और इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए." ईयू आने वाले दिनों में प्रतिबंधों पर अंतिम निर्णय लेगा.

एए/सीके (रॉयटर्स, एपी, एएफपी)

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