यूक्रेन युद्ध: और बिगड़ सकता है यमन का खाद्य संकट | दुनिया | DW | 07.03.2022

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दुनिया

यूक्रेन युद्ध: और बिगड़ सकता है यमन का खाद्य संकट

जैसे-जैसे यूक्रेन में युद्ध तेज होता जा रहा है, गेहूं की वैश्विक आपूर्ति बाधित हो रही है. खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने से युद्धग्रस्त यमन में भूख का संकट और बढ़ने की आशंका है.

यूक्रेन में युद्ध का असर यमन तक

यूक्रेन में युद्ध का असर यमन तक

युद्ध, अकाल, भुखमरी और अब भोजन की कमी. मध्य पूर्व के गृहयुद्ध से तबाह हुए देश यमन में भोजन का संकट और बढ़ गया है. गृहयुद्ध से बेहाल यमन में लोग अब आटा खरीदने के लिए बेताब हैं. विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) ने पिछले सप्ताह कहा था कि यूक्रेन संकट से ईंधन और खाद्य कीमतों में और वृद्धि हो सकती है. यमन के कई हिस्सों में, पिछले एक साल में खाद्य कीमतों में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है.

गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी

रूस और यूक्रेन दुनिया के लगभग 29 प्रतिशत गेहूं का उत्पादन करते हैं. अब दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया है, जिससे वैश्विक गेहूं निर्यात और शिपमेंट में बाधाएं बढ़ रही हैं और गेहूं की कीमत तेजी से बढ़ रही हैं. यमन में संघर्ष और महंगाई ने लाखों लोगों को अकाल की कगार पर धकेल दिया है.

युद्ध में पिसता बचपन

यमन की राजधानी सना के एक थोक व्यापारी मोहम्मद अल-निमरी ने कहा कि लोग तेजी से खरीदारी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, "वे सतर्क हो गए हैं." अल-निमरी के मुताबिक, "एक व्यक्ति दस या बीस बोरी आटा खरीद रहा है." एक और व्यापारी ने कहा कि मांग में इतनी बढ़ोतरी को देखते हुए कुछ व्यापारियों ने कीमतों में इजाफा किया है.

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सात साल पुराने संघर्ष ने यमन को विभाजित कर दिया है. एक ओर, दक्षिणी शहर में अदन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार है और दूसरी ओर सना में ईरानी समर्थित हूथी विद्रोही समूह है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता वाली अदन सरकार ने पिछले दिनों भोजन संकट पर एक बैठक की और घोषणा की कि देश में अगले चार महीनों के लिए गेहूं और अन्य बुनियादी जरूरतों का पर्याप्त भंडार है.

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इस बीच हूथी समूह के उद्योग उप मंत्री मोहम्मद अल-हाशिमी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि प्रशासन के पास कई महीनों का गेहूं है और यूक्रेन और रूस से अधिक स्टॉक आ रहे थे.

विश्व खाद्य कार्यक्रम जो हर महीने 1.3 करोड़ लोगों को राशन देता आया था, उसने जनवरी से अपने राशन सप्लाई को घटाकर 80 लाख लोगों तक सीमित कर दिया, साथ ही उसने आने वाले दिनों में और कटौती का संकेत दिया.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार यमन वर्तमान में दुनिया के सबसे खराब मानवीय संकट से जूझ रहा है, जिसमें लगभग दो करोड़ लोग या देश की एक तिहाई आबादी को किसी भी सहायता की सख्त जरूरत है. बच्चे इस स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हैं और कुल 1.1 करोड़ लोग मानवीय सहायता पर निर्भर हैं. यानी पांच में से चार यमनी बच्चों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

एए/सीके (रॉयटर्स, एएफपी)

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