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उतनी दूर नहीं जाना कि लौटना दूर हो: चले गए विनोद कुमार शुक्ल

आदर्श शर्मा एएनआई, रॉयटर्स | स्वाति मिश्रा एपी, एएफपी
प्रकाशित २३ दिसम्बर २०२५आखिरी अपडेट २३ दिसम्बर २०२५

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विनोद कुमार शुक्ल की तस्वीर
विनोद कुमार शुक्ल को बीते महीने ही हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया थातस्वीर: Frank May/dpa/picture alliance
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सिविल वॉर के बाद पहली बार जर्मनी ने एक अपराधी को सीरिया डिपोर्ट किया को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

सिविल वॉर के बाद पहली बार जर्मनी ने एक अपराधी को सीरिया डिपोर्ट किया

सितंबर 2015 में सीरिया से आया एक माइग्रेंट, जर्मनी की तत्कालीन चांसलर अंगेला मैर्केल की तस्वीर थामे खड़ा है
जर्मनी में रह रहे सीरियाई लोगों की संख्या करीब 10 लाख है. यह पूर्व चांसलर अंगेला मैर्केल की शरणागत नीति की एक बड़ी विरासत रही है. हालांकि, अब माइग्रेशन पर जर्मन सरकार और जनता दोनों के रुख में बहुत तब्दीली आ गई है. (यह फाइल फोटो सितंबर 2015 की है) तस्वीर: Sean Gallup/Getty Images

जर्मनी ने दोषी सिद्ध हो चुके एक अपराधी को सीरिया डिपोर्ट किया है. करीब डेढ़ दशक पहले सीरिया में गृह युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला मौका है, जब किसी सीरियाई को डिपोर्ट किया गया हो. जर्मनी के गृह मंत्रालय ने बताया कि 23 दिसंबर की सुबह इस शख्स को सीरिया की राजधानी दमिश्क में अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया.  

जर्मनी से सीरिया लौट रहे हैं शरणार्थी लेकिन संख्या कम

साल 2011 में लड़ाई शुरू होने के बाद जर्मनी ने सीधे सीरिया में लोगों को डिपोर्ट करना रोक दिया था. पिछले साल विद्रोही गठबंधन के नेतृत्व ने असद को सत्ता से बाहर कर दिया. सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद जर्मनी में मांग तेज हुई कि अब सीरियाई शरणार्थियों को उनके वेतन भेजा जाए. जर्मनी में हुए आम चुनावों के वक्त भी यह मुद्दा उठता रहा. मगर, तत्कालीन गठबंधन सरकार ने कहा कि सीरिया में हालात सुरक्षित हैं या नहीं, यह तय करना फिलहाल जल्दबाजी होगी.

सीरियाई शरणार्थियों को घर जाने की अनुमति देगा जर्मनी

मई 2025 में चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व में नई सरकार बनी. माइग्रेशन पर मैर्त्स की पार्टी ने सख्त रुख अपनाया है. सरकार ने अपराधियों को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया में तेजी लाने की बात कही है. इनमें सीरियाई और अफगान मूल के लोग शामिल हैं. जर्मनी में रह रहे सीरियाई लोगों की संख्या करीब 10 लाख है. यह पूर्व चांसलर अंगेला मैर्केल की शरणागत नीति की एक बड़ी विरासत रही है.

सीरियाई डॉक्टरों के बिना कैसे चलेगा जर्मन हेल्थकेयर?

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ब्रिटिश पुलिस ने ग्रेटा थुनबर्ग को गिरफ्तार किया को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

ब्रिटिश पुलिस ने ग्रेटा थुनबर्ग को गिरफ्तार किया

मीडिया को संबोधित करती हुईं ग्रेटा थुनबर्ग
पुलिस ने फलस्तीन के समर्थन में हो रहे एक प्रदर्शन के दौरान थुनबर्ग को गिरफ्तार किया (फाइल तस्वीर)तस्वीर: Aristidis Vafeiadakis/ZUMA Press Wire/IMAGO

ब्रिटिश पुलिस ने मंगलवार, 23 दिसंबर को लंदन में जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग को गिरफ्तार कर लिया. यूके के कैंपेन ग्रुप 'डिफेंड आवर ज्यूरीज' के मुताबिक, पुलिस ने फलस्तीन के समर्थन में हो रहे एक प्रदर्शन के दौरान थुनबर्ग को गिरफ्तार किया. 

समूह ने बताया कि थुनबर्ग को 'टैररिज्म ऐक्ट' के तहत गिरफ्तार किया गया है. समूह के मुताबिक, थुनबर्ग ने प्रदर्शन के दौरान एक पोस्टर पकड़ा था, जिसपर लिखा था, "मैं पेलेस्टाइन एक्शन प्रिजनर्स का समर्थन करती हूं. मैं नरसंहार का विरोध करती हूं." 'पेलेस्टाइन एक्शन प्रिजनर्स' को ब्रिटिश सरकार ने आतंकवादी समूह घोषित किया हुआ है. 

लंदन पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया कि पहले दो लोगों को एक इमारत पर लाल रंग फेंकने के लिए गिरफ्तार किया गया, "कुछ देर बाद एक 22 वर्षीय महिला भी मौके पर पहुंची… उन्हें एक प्रतिबंधित संगठन (पेलेस्टाइन एक्शन प्रिजनर्स) के समर्थन में एक आइटम (प्लाकार्ड) दिखाने के लिए गिरफ्तार किया गया है, जो टैररिज्म एक्ट 2000 की धारा 13 का उल्लंघन है."  

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'अखलाक मॉब लिंचिंग केस' वापस लेने का यूपी सरकार का आवेदन खारिज को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

'अखलाक मॉब लिंचिंग केस' वापस लेने का यूपी सरकार का आवेदन खारिज

अखलाक की मौत के बाद शोक मनाते उनके रिश्तेदार
सितंबर, 2015 में भीड़ ने पीट-पीटकर अखलाक की हत्या कर दी थीतस्वीर: Reuters/Stringer

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की एक अदालत ने राज्य सरकार के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें 2015 में मोहम्मद अखलाक की हत्या के आरोपियों के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की मांग की गई थी. कानूनी खबरों की वेबसाइट 'लाइव एंड लॉ' के मुताबिक, अतिरिक्त जिला जज सौरभ द्विवेदी ने सरकारी अभियोजक की संबंधित याचिका खारिज कर दी. 

कोर्ट ने इस मामले की नियमित सुनवाई करने का निर्देश दिया और केस से जुड़े सबूतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी आदेश दिया है. यह केस सितंबर 2015 का है, जब गोमांस रखने की अफवाह पर एक उग्र भीड़ ने 52 वर्षीय अखलाक को उनके घर से बाहर निकालकर इतना मारा-पीटा कि उनकी मौत हो गई. इस मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से तीन नाबालिग थे. एक आरोपी की साल 2016 में मौत हो गई. बाकी 14 आरोपी फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं. 

इस साल अक्टूबर में राज्य सरकार ने मामले को वापस लेने के लिए अदालत में आवेदन दिया था. इसमें कहा गया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है. 'सामाजिक सद्भाव की बहाली' के लिए सरकार ने कोर्ट से केस को वापस लेने की अनुमति मांगी. अखलाक के परिवार ने यूपी सरकार के इस आवेदन को कोर्ट में चुनौती दी है. वहीं, अखलाक की पत्नी ने इसके खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी रिट याचिका लगाई है.

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एक भी रूसी हमला ढहा देगा चेर्नोबिल प्लांट का अंदरूनी रेडिएशन शेल्टर को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

एक भी रूसी हमला ढहा देगा चेर्नोबिल प्लांट का अंदरूनी रेडिएशन शेल्टर

चेर्नोबिल प्लांट पर बना न्यू सेफ कन्फाइनमेंट. यह फाइल फोटो नवंबर 2020 की है.
फरवरी 2025 में हुए एक ड्रोन हमले में प्लांट के रक्षा कवच को गंभीर नुकसान पहुंचा थातस्वीर: Patrick Ahlborn/DeFodi Images/picture alliance

यूक्रेन युद्ध के दौरान हुआ एक भी रूसी हमला, निष्क्रिय चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर स्टेशन के अंदरूनी रेडिएशन शेल्टर को ढहा सकता है. चेर्नोबिल प्लांट के निदेशक सेर्गी तराकानोव ने समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में यह आशंका जताई. उन्होंने चेताया, "अगर कोई मिसाइल या ड्रोन सीधा टकराता है या नजदीक ही कहीं गिरता है मसलन इस्कंदर, ईश्वर ना करे ऐसा हो, तो इसकी वजह से इस इलाके में छोटा भूकंप आ जाएगा."

चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट के रक्षा कवच को नुकसान, नहीं कर पा रहा है जरूरी काम

तराकानोव ने आशंका जताई कि इस तरह के हमले की स्थिति में "कोई यह गारंटी नहीं दे सकता है कि उसके बाद शेल्टर फैसिलिटी बची रहेगी. यह मुख्य जोखिम है." उन्होंने जिस शेल्टर की बात कही, वह चेर्नोबिल न्यूक्लियर प्लांट पर बनाया गया रक्षात्मक कवच 'सरकॉफगस' है.

फरवरी 2025 में हुए एक ड्रोन हमले में रक्षा कवच को गंभीर नुकसान पहुंचा था. आरोप है कि यह ड्रोन रूस ने दागा था. दिसंबर 2025 में 'इंटरनेशनल अटॉमिक एनर्जी एजेंसी' (आईएईए) ने बताया कि क्षतिग्रस्त होने का करण रक्षात्मक शील्ड, रेडिएशन को बाहर आने से रोकने में प्रभावी नहीं रहा. 

अगर यूक्रेन पर परमाणु बम गिरा दिया गया तो क्या होगा?

ड्रोन हमले में शील्ड को हुए नुकसान की समीक्षा के बाद आईएईए के महानिदेशक राफाएल गोसी ने कहा कि फौरी मरम्मत का काम हो चुका है, लेकिन  शेल्टर को पूरी तरह दुरुस्त करना जरूरी है. अब चेर्नोबिल के प्लांट डायरेक्टर ने बताया कि बाहरी शेल्टर की पूरी तरह मरम्मत में तीन से चार साल लगेंगे.

यूक्रेनी किशोरों से तोड़-फोड़ करवा रही रूसी खुफिया एजेंसी

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सिर्फ फेफड़े नहीं, दिमाग पर भी असर डालता है वायु प्रदूषण: विशेषज्ञ को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

सिर्फ फेफड़े नहीं, दिमाग पर भी असर डालता है वायु प्रदूषण: विशेषज्ञ

दिल्ली में मास्क लगाकर स्कूटर पर बच्चों को स्कूल छोड़ने जाता एक व्यक्ति
प्रदूषित हवा में थोड़े समय रहने से भी सिरदर्द, चक्कर आने और मानसिक रूप से भ्रमित होने जैसी परेशानियां हो सकती हैंतस्वीर: Sanchit Khanna/Hindustan Times/Sipa USA/picture alliance

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर के बीच बड़ी संख्या में लोग न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की बात कर रहे हैं. न्यूरोलॉजी विशेषज्ञ डॉक्टर विनीत सूरी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा कि आमतौर पर कहा जाता है कि वायु प्रदूषण फेफड़ों या हृदय को प्रभावित करता है, लेकिन काफी रिसर्च के बाद यह कहा जा सकता है कि ये दिमाग पर भी असर डालता है. 

उन्होंने कहा कि प्रदूषित हवा में थोड़े समय रहने से सिरदर्द, चक्कर आने और मानसिक रूप से भ्रमित होने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. वहीं, लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से अल्जाइमर, डिमेंशिया, पार्किसंस, एडीएचडी और बच्चों में ऑटिज्म जैसी परेशानियां हो सकती हैं. विनीत सूरी ने चेताया कि गंभीर रूप से प्रदूषित हवा के संपर्क में आने से स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ता है. 

वायु प्रदूषण का असर कम करने के लिए विशेषज्ञ घर में एयर प्यूरीफायर लगाने और घर के बाहर एन95 या एन99 मास्क लगाने की सलाह देते हैं. प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर विशेषज्ञ घर के अंदर ही अधिक से अधिक समय गुजारने की भी सलाह देते हैं. विशेषज्ञ घर के अंदर इनडोर प्लांट्स रखने की भी सलाह देते हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि प्रदूषित हवा में व्यायाम करने से फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है. 

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पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस का निजीकरण, तीन कंपनियों ने बोली लगाई को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइंस का निजीकरण, तीन कंपनियों ने बोली लगाई

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस का एक विमा
पिछले साल भी पीआईए को बेचने की कोशिश की गई थी, जो नाकाम रही थी. तस्वीर: Rafat Saeed/DW

पाकिस्तान अपनी राष्ट्रीय एयरलाइंस 'पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस' (पीआईए) का निजीकरण करना चाहता है. इस क्रम में 23 दिसंबर को तीन कंपनियों ने बोली लगाई. बोली लगाने की प्रक्रिया लाइव दिखाई गई. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी कैबिनेट से कहा, "इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना जरूरी था, क्योंकि पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा सौदा होने वाला है. अगर बिडिंग कामयाब रही, तो निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी." 

पाकिस्तान: आर्थिक संकट से उबरने के लिए बस आईएमएफ पैकेज काफी नहीं

बिडिंग के तहत, पीआईए की 75 फीसदी हिस्सेदारी ऑफर की गई है. बोली लगाने वाली तीन फर्म हैं: पाकिस्तान की एक निजी एयरलाइन 'एयर ब्लू', लकी सीमेंट और इन्वेस्टमेंट फर्म आरिफ हबीब. सरकार 24 दिसंबर को पीआईए के लिए एक कीमत का एलान करेगी. अगर बोली में न्यूनतम कीमत हासिल होती है, तो उस आधार पर विजेता का नाम बताया जाएगा.

सरकार ने पिछले साल भी पीआईए को बेचने की नाकाम कोशिश की थी. बस एक कंपनी 'ब्लू वर्ल्ड सिटी' ने 36 मिलियन डॉलर की बोली लगाई थी. जबकि सरकार 300 से 350 मिलियन डॉलर चाहती थी. 'प्राइवेटाइजेशन कमीशन' ने कंपनी से कहा कि वो बिडिंग की न्यूनतम अपेक्षा पूरी कर दे, लेकिन कंपनी ने इनकार कर दिया. 

पाकिस्तान में पहुंची चायनीज इलेक्ट्रिक कारें

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उतनी दूर नहीं जाना कि लौटना दूर हो: चले गए विनोद कुमार शुक्ल को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

उतनी दूर नहीं जाना कि लौटना दूर हो: चले गए विनोद कुमार शुक्ल

विनोद कुमार शुक्ल की तस्वीर
विनोद कुमार शुक्ल आमजन के साहित्यकार थे. उनके शब्दों में सरलता थी और हर उम्र के लोग उनके पाठक थेतस्वीर: Frank May/dpa/picture alliance

विनोद कुमार शुक्ल नहीं रहे! 

हिन्दी के प्रख्यात साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार, 23 दिसंबर को निधन हो गया. वे 88 साल के थे. इस महीने की शुरुआत से ही वह रायपुर के एम्स अस्पताल में भर्ती थे. यहीं उन्होंने आखिरी सांस ली. 

विनोद कुमार शुक्ल को बीते महीने ही हिंदी साहित्य के सर्वोच्च सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था. उनके उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' को साहित्य अकादमी पुरस्कार भी दिया गया था.

विनोद कुमार शुक्ल आमजन के साहित्यकार थे. उनके शब्दों में सरलता थी. हर उम्र के लोग उनके पाठक थे. जैसा कि उनके उपन्यास 'हरी घास की छप्पर वाली झोपड़ी और बौना पहाड़' के कवर पर लिखा डिस्क्लेमर: किशोरों, बड़ों और बच्चों का उपन्यास. 

उनकी कविताओं में 'जाना' कई बार इस्तेमाल होता है. जैसे कि, "उतनी दूर नहीं जाना कि लौटना दूर हो, तब भी दूर जाना कि जब लौटूं बहुत दूर से भी लौटूं." या, "जाते-जाते जाया जा सकेगा उस पार, जाकर ही वहां पहुंचा जा सकेगा." एक और कविता "जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे" जिसे लोगों से बड़ा प्रेम मिला, उसकी पंक्तियां हैं, "जो मेरे घर कभी नहीं आएंगे, मैं उनसे मिलने उनके पास चला जाऊंगा. एक उफनती नदी कभी नहीं आएगी मेरे घर, नदी जैसे लोगों से मिलने नदी किनारे जाऊंगा."

एक कविता में विनोद कुमार शुक्ल खुद अपनी इच्छा यूं लिख गए, "मेरी भाषा हर जन्म में बदलती रहे, इसके लिए मैं बार-बार जन्म लेता रहूं. यह मैं जीव-जगत से कहता हूं चिड़ियों, पशुओं, कीट-पतंगों से भी!"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुख जाहिर किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे. छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में राजकीय शोक की घोषणा करने की मांग की है. उन्होंने राज्य के सीएम विष्णुदेव साय को संबोधित करते हुए लिखा, "प्रदेश में इस दौरान किसी भी प्रकार के उत्सव, महोत्सव को कुछ दिनों के लिए टाल दें. यह हम सबका साझा दुःख है."

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चीन 'साइलो फील्ड्स' में जमा कर रहा है सैकड़ों बड़े मिसाइल: अमेरिकी रिपोर्ट को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

चीन 'साइलो फील्ड्स' में जमा कर रहा है सैकड़ों बड़े मिसाइल: अमेरिकी रिपोर्ट

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अमेरिकी रक्षा विभाग की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि चीन ने अपने तीन नए 'साइलो फील्ड्स' में 100 से ज्यादा इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल जोड़े हैं. पेंटागन की यह रिपोर्ट पब्लिक नहीं है, ना ही उसने सार्वजनिक रूप से इसपर कुछ कहा है. 

अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: भारत के लिए पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा खतरा चीन

"साइलो फील्ड्स" वो भूमिगत ढांचा होता है, जिसमें न्यूक्लियर मिसाइल रखे जाते हैं. कथित रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने मंगोलिया से सटी सीमा के पास अपने साइलो फील्ड्स में 100 से ज्यादा सॉलिड-फ्यूल्ड डीएफ-31 आईसीबीएम रखे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीन को उम्मीद है कि वह "2027 के आखिर तक ताइवान पर युद्ध लड़ने और जीतने में सक्षम" होगा.  

सिपरी: हथियारों की नई होड़ के बीच परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ा

'फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट' समेत कई रिपोर्टों के मुताबिक, सैटेलाइट इमेजरी की मदद से साल 2021 में पता चला था कि चीन कम-से-कम दो साइलो फील्ड बना रहा है. फिर 2022 में एक और फील्ड की पहचान की गई. 2023 में आई पेंटागन की सालाना रिपोर्ट में भी इन तीन साइलो फील्ड्स का जिक्र किया गया, लेकिन मिसाइलों की संख्या नहीं बताई गई. 

मीडिया में कथित पेंटागन रिपोर्ट के बाबत आई खबरों के बाद चीन ने अमेरिका से परमाणु निरस्त्रीकरण की जिम्मेदारियां निभाने की अपील की. चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता, लिन जीआन ने कहा कि चीन किसी भी देश के साथ परमाणु हथियारों की होड़ में शामिल नहीं है. 

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किस जगह मिलें, इस सवाल पर थाइलैंड-कंबोडिया की मीटिंग खतरे में को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

किस जगह मिलें, इस सवाल पर थाइलैंड-कंबोडिया की मीटिंग खतरे में

दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एक रैली के दौरान प्रदर्शन कर रहे कंबोडियाई
थाइलैंड अपने ही यहां मीटिंग करना चाहता है, जबकि कंबोडिया ने द्विपक्षीय वार्ता के लिए कुआलालंपुर का नाम सुझाया हैतस्वीर: Kim Jae-Hwan/SOPA Images/IMAGO

थाइलैंड और कंबोडिया में युद्धविराम की शर्तों पर प्रस्तावित बातचीत, जगह के सवाल पर अटकती नजर आ रही है. दोनों देश अपनी सुझाई जगह पर मीटिंग करना चाहते हैं. कंबोडिया ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर द्विपक्षीय वार्ता के लिए मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर का नाम सुझाया. मगर, थाइलैंड अपनी ही जमीन पर मीटिंग करना चाहता है. 

थाईलैंड-कंबोडिया शांति समझौता हुआ, ट्रंप की अगली चुनौती चीन

इस संबंध में कंबोडिया के रक्षा मंत्री ने अपने थाई समकक्ष को पत्र भेजकर लिखा, "सीमा के पास जारी लड़ाई के कारण एक सुरक्षित और निष्पक्ष जगह पर बैठक होनी चाहिए." इसपर थाई रक्षा मंत्री ने मीडिया से कहा कि बॉर्डर कमेटी की पिछली वार्ता कंबोडिया में हुई थी, इसलिए अब मेजबानी की बारी उसकी है. उन्होंने कंबोडिया को आश्वासन दिया कि डरने की जरूरत नहीं, थाईलैंड के लोग सेना और कूटनीति के मसले अलग रखना जानते हैं. 

थाइलैंड ने कहा है कि योजना के मुताबिक, 24 से 27 दिसंबर तक चंथाबूरी में 'द्विपक्षीय सीमा समिति' की बैठक होगी. यह दक्षिणपूर्वी थाइलैंड का एक प्रांत है. थाई रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने पत्रकारों से कहा, "हम गारंटी देते हैं कि चंथाबूरी सुरक्षित है." 

प्रवक्ता के मुताबिक, लड़ाई शुरू होने से पहले ही 'जनरल बॉर्डर कमेटी' की मेजबानी के लिए यह जगह चुन ली गई थी. अब तय कार्यक्रम के मुताबिक मीटिंग होती है या नहीं, यह कंबोडिया पर निर्भर करता है. उधर, कंबोडियाई सरकार के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि मीटिंग की जगह के विषय में उन्हें कोई नई जानकारी नहीं है. 

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क्या एशेज सीरीज के ब्रेक में इंग्लिश खिलाड़ियों ने बहुत शराब पी, इंग्लैंड करेगा जांच को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

क्या एशेज सीरीज के ब्रेक में इंग्लिश खिलाड़ियों ने बहुत शराब पी, इंग्लैंड करेगा जांच

एशेज सीरीज के एक मैच में जोफ्रा आर्चर
एशेज सीरीज 2025 में अब तक हुए तीन टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया जीता हैतस्वीर: Robbie Stephenson/empics/picture alliance

क्या एशेज क्रिकेट सीरीज के दौरान, दूसरे और तीसरे मैच के बीच मिले ब्रेक में इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने बहुत शराब पी? इंग्लैंड टीम के डायरेक्टर रॉब की ने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी. सीरीज में अब तक हुए तीन टेस्ट मैचों में ऑस्ट्रेलिया जीता है.

भारत की महिला दृष्टिबाधित टीम के क्रिकेट खेलने का अलग अंदाज

ब्रिस्बन में खेले गए दूसरे टेस्ट और एडिलेड में तीसरे टेस्ट के बीच इंग्लिश टीम ने ब्रेक लिया था. इस दौरान उन्होंने नूसा नाम के एक तटीय शहर में छुट्टी मनाई. कई ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि नूसा में कुछ खिलाड़ियों ने अच्छा-खासा वक्त शराब पीने में गुजारा. इतना ही नहीं ब्रिस्बन में भी दो दिन उन्होंने खासी शराब पी. 

यह सिर्फ मैच नहीं, बल्कि लड़कियों के लिए इतिहास रचने का मौका है

बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में रॉब ने इन रिपोर्ट्स के संदर्भ में कहा, "कई बार हेडलाइन्स गुमराह करने वाली हो सकती हैं. ऐसी खबरें कि खिलाड़ी छह दिन पीते रहे, स्वीकार नहीं की जा सकती हैं." उन्होंने कहा कि सच्चाई का पता लगाया जाएगा, "मैं ड्रिंकिंग कल्चर से सहमत नहीं हूं. मैं ड्रिंकिंग कल्चर को पसंद नहीं करता." 

चैंपियन एथलीट कैसे कमाते हैं पैसे?

एशेज सीरीज में दो और टेस्ट मैच खेले जाने हैं. ऑस्ट्रेलिया पहले ही तीन मैच जीत चुका है. इंग्लैंड आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया में खेली गई एशेज सीरीज 2010-11 में जीता था. यह सीरीज हर दो साल में खेली जाती है और ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड बारी-बारी से इसकी मेजबानी करते हैं. 

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उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबित

अप्रैल 2018 में मीडिया से बात करता कुलदीप सिंह सेंगर
कुलदीप सिंह सेंगर को दिसंबर, 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थीतस्वीर: Imago/Hindustan Times

उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा पा चुके पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत मिल गई है. दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार, 23 दिसंबर को कुछ शर्तों के साथ सेंगर को जमानत दी. साथ ही, दोषसिद्धि के खिलाफ सेंगर की अपील पर सुनवाई होने तक उसकी सजा भी निलंबित कर दी. कानूनी खबरों की वेबसाइट 'बार एंड बेंच' ने यह जानकारी दी है. 

कोर्ट ने निर्देश दिया है कि सेंगर सर्वाइवर की पांच किलोमीटर की परिधि में नहीं जाएगा. अपील पर सुनवाई होने तक दिल्ली में ही रहना होगा और दोषी ठहराए जाने की स्थिति में बाकी सजा काटने के लिए उपलब्ध रहना होगा. सर्वाइवर या उनकी मां को धमकी ना देना, अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट के पास जमा कराना, हर सोमवार स्थानीय थाने जाकर रिपोर्ट करना भी शर्तों में शामिल है. कोर्ट ने कहा है कि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर जमानत रद्द हो जाएगी. 

दिसंबर 2019 में दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को एक 17 वर्षीय लड़की के बलात्कार का दोषी पाया था और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस बहुचर्चित मामले में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर पर 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. सेंगर ने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ कोर्ट में अपील दाखिल की है, जो अभी लंबित है.

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बांग्लादेश में हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग के खिलाफ भारत में प्रदर्शन को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

बांग्लादेश में हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग के खिलाफ भारत में प्रदर्शन

भारत की राजधानी नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के पास प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश कर रहे पुलिसकर्मी
बीते सप्ताह, बांग्लादेश में भीड़ ने 27 साल के युवक दीपू चंद्र दास को पीटा और फिर आग लगा दी. 23 दिसंबर को इस घटना के विरोध में नई दिल्ली में हुए प्रदर्शन की एक तस्वीरतस्वीर: Manish Swarup/AP Photo/picture alliance

पिछले हफ्ते बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू युवक की भीड़ ने हत्या कर दी. इस घटना के विरोध में, 23 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर प्रदर्शन हुआ, जिसमें शामिल लोगों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है. समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, यह प्रदर्शन 'विश्व हिंदू परिषद' के नेतृत्व में हुआ. 

क्या भारत-विरोध के मुद्दे पर लड़ा जाएगा बांग्लादेश चुनाव?

प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस की तस्वीरें जलाईं और उनके खिलाफ नारे लगाए. "बांग्लादेश के बहिष्कार" की मांग करते पोस्टर दिखे. टीवी फुटेज में दिखा कि प्रदर्शनकारियों ने हाई कमीशन के बाहर लगे बैरिकेडों को पार करने की कोशिश की. इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प हुई. 

23 दिसंबर को नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे वीएचपी कार्यकर्ताओं के हाथ में पोस्टर नजर आ रहे हैं
नई दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के पास प्रदर्शन कर रहे 'विश्व हिंदू परिषद' के कार्यकर्तातस्वीर: Manish Swarup/AP Photo/picture alliance

एक प्रदर्शनकारी ने 'इंडिया टुडे' से कहा, "हमें जरूरत थी कि दिल्ली में बांग्लादेश के हिंदुओं की आवाज उठाएं और हमने यह कर दिया. जब तक वहां एक भी हिंदू को नुकसान पहुंचाया जाएगा, हम नहीं रुकेंगे." 

शेख हसीना से जुड़े हैं भारत-बांग्लादेश संबंधों के तार!

इससे पहले 20 दिसंबर को भी एक प्रदर्शन हुआ था. बांग्लादेश ने कहा है कि प्रदर्शनों के मद्देनजर भारतीय राजदूत को तलब किया गया और घटनाओं की तफ्तीश करने की मांग की गई. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 20 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में "20-25 युवक" शामिल थे, जिन्हें पुलिस ने कुछ ही मिनटों में हटा दिया. 

लिंचिंग की जिस घटना के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, वह बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में हुई. यहां भीड़ ने 27 साल के फैक्ट्री कामगार दीपू चंद्र दास को पीटा और फिर आग लगा दी. भीड़ का आरोप था कि दीपू ने ईशनिंदा की है. लिंचिंग के इस केस में कम-से-कम 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 

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श्रीलंका को 4,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज देगा भारत को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

श्रीलंका को 4,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज देगा भारत

बाढ़ प्रभावित श्रीलंका के लिए राहत सामग्री लेकर पहुंचा भारतीय वायुसेना का सी-130जे विमान
भारत ने सागर बंधु अभियान के तहत श्रीलंका को राहत सामग्री भी भेजी थीतस्वीर: ANI/IMAGO

दित्वाह नाम के चक्रवात से श्रीलंका को बहुत नुकसान पहुंचा. इससे उबरने में सहायता के लिए भारत, श्रीलंका को करीब 4,000 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज देगा. दो दिन के दौरे पर श्रीलंका गए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार, 23 दिसंबर को इसकी घोषणा की. जयशंकर ने एक सोशल पोस्ट में लिखा कि भारत का प्रस्तावित सहायता पैकेज दोनों देशों के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है. 

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जब श्रीलंका 2022 के आर्थिक संकट से उबर ही रहा था, तब प्राकृतिक आपदा ने नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं. जयशंकर ने बताया कि भारत जो मदद देगा, वह चक्रवात के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुए क्षेत्रों में काम आएगा. इसके तहत रेलवे लाइनों, सड़कों और पुलों को बहाल किया जाएगा. क्षतिग्रस्त घरों का पुनर्निमाण किया जाएगा. स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी मदद की जाएगी. 

चक्रवात दित्वाह के चलते श्रीलंका में नवंबर-दिसंबर महीने में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं. 640 से ज्यादा लोगों की जान चली गई. विश्व बैंक का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा के चलते श्रीलंका की अर्थव्यवस्था को करीब चार अरब डॉलर का नुकसान हुआ, जो देश की जीडीपी के चार फीसदी के बराबर है. 

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पाकिस्तान में पुलिस की गाड़ी पर हमला, पांच अधिकारी मारे गए को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

पाकिस्तान में पुलिस की गाड़ी पर हमला, पांच अधिकारी मारे गए

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच गुलाम खान जीरो पॉइंट बॉर्डर क्रॉसिंग के पास सड़क की सुरक्षा में तैनात तालिबान का एक सुरक्षाकर्मी
पाकिस्तान का आरोप है कि जब से तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में लौटा है, टीटीपी आजादी से वहां अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. तालिबान इन आरोपों से इनकार करता हैतस्वीर: AFP/Getty Images

उत्तरपश्चिम पाकिस्तान में संदिग्ध मिलिटेंट्स ने पुलिस की एक गाड़ी पर हमला किया और पांच अधिकारियों की हत्या कर दी. समाचार एजेंसी एपी ने स्थानीय पुलिस के हवाले से बताया कि हमला खैबर पख्तूनख्वा के करक जिले में हुआ. पुलिस की टीम यहां तेल और गैस फील्ड के पास रूटीन गश्ती पर थी.

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स्थानीय पुलिस के प्रमुख नूर वली ने बताया कि अधिकारियों को मारने के बाद हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी. वारदात के बाद पुलिस की एक बड़ी टीम हमलावरों की तलाश में जुट गई है. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सुहैल अफरीदी ने हमले की निंदा की है.

पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता नाकाम

अभी तक किसी समूह ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन आशंका है कि इसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का हाथ हो सकता है. अफगानिस्तान की सरहद से लगे इस प्रांत में पहले हुए कई हमलों में भी अधिकारियों ने इसी संगठन को दोष दिया था.

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पाकिस्तान का आरोप है कि जब से तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता में लौटा है, टीटीपी आजादी से वहां काम करता है. तालिबान इन आरोपों को खारिज करता है. आपसी अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों पक्षों में काफी तनाव है. अक्टूबर में तालिबान ने पाकिस्तान पर ड्रोन हमले का आरोप लगाया. इसके बाद सीमा पर हुई हिंसक झड़पों में बहुत से लोग मारे गए. इस्तांबुल में पिछले हफ्ते हुई वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हुई. 

 

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चीन का 'रीयूजेबल रॉकेट' का दूसरा टेस्ट भी नहीं हुआ सफल को स्किप करें
२३ दिसम्बर २०२५

चीन का 'रीयूजेबल रॉकेट' का दूसरा टेस्ट भी नहीं हुआ सफल

चीन के ज्योच्वैन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च टू-एफ कैरियर रॉकेट उड़ान भरता हुआ
कथित 'स्पेस रेस' में चीन, अमेरिका के साथ गैप को पाटने की कोशिश कर रहा है. इस क्रम में रीयूजेबल रॉकेट एक अहम तकनीक है, जिसमें चीन आगे बढ़ना चाहता हैतस्वीर: Hector Retamal/AFP

चीन को 'लॉन्ग मार्च 12ए' रॉकेट के लॉन्च से रीयूजेबल रॉकेट तकनीक में मनमुताबिक नतीजा नहीं मिला. 22 दिसंबर को हुई लॉन्चिंग में रीयूजेबल रॉकेट का फर्स्ट स्टेज (नीचे के हिस्से में लगा बूस्टर) रीकवर नहीं किया जा सका. हालांकि, रॉकेट का ऊपरी हिस्सा 'सेकेंड स्टेज' कक्षा में तय जगह पर पहुंच गया.

8 दिन की अंतरिक्ष यात्रा 9 महीने के इंतजार में कैसे बदली

'लॉन्ग मार्च 12ए' को चीन की एक सरकारी रॉकेट फर्म ने बनाया है. इसी महीने चीन की एक निजी कंपनी 'लैंडस्केप' ने भी रीयूजेबल रॉकेट लॉन्च किया था, लेकिन उसकी भी लैंडिंग कामयाब नहीं रही.

पृथ्वी से बाहर जीवन का सबसे मजबूत संकेत मिला

'रीयूजेबल रॉकेट टेक्नॉलजी' में लॉन्चर को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उसे रीकवर करके फिर इस्तेमाल किया जा सके. लॉन्चिंग में 'फर्स्ट स्टेज' या मुख्य हिस्सा रॉकेट को वातावरण में तय ऊंचाई पर ले जाता है, और फिर अलग होकर वापस पृथ्वी पर लैंड करता है. रॉकेट का ऊपरी हिस्सा पेलोड को लेकर पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाता है. 

यूरोप के एकमात्र स्पेसपोर्ट में क्या खास है

अंतरिक्ष अभियानों में अमेरिका से आगे निकलने की कोशिश कर रहा चीन इस तकनीक में कामयाबी पाने की कोशिश कर रहा है. मगर, वो अब तक पीछे बना हुआ है. अब तक केवल दो अमेरिकी कंपनियां, स्पेस एक्स और ब्लू ऑरिजिन ही यह कारनामा कर पाई हैं. बल्कि, स्पेस एक्स अकेली कंपनी है जिसे ऑर्बिटल रॉकेट के मुख्य हिस्से को लैंड कराने और वापस उड़ाने में सफलता मिली है. इस तकनीक में कामयाबी का मतलब है, कम लागत में ज्यादा लॉन्च. इसकी मदद से अंतरिक्ष अभियान ज्यादा नियमित और किफायती हो सकेंगे. 

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आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.