1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

पुतिन ने कहा, 'यूक्रेन में हमारे लक्ष्य पूरे होकर रहेंगे'

आयुष यादव एपी, एएफपी, डीपीए | आदर्श शर्मा एएनआई, रॉयटर्स
प्रकाशित १९ दिसम्बर २०२५आखिरी अपडेट १९ दिसम्बर २०२५

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.

https://p.dw.com/p/55gGq
मॉस्को में वार्षिक संबोधन के दौरान पत्रकारों से बात करते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन
चार घंटे से अधिक समय तक चली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुतिन ने विश्वास जताया कि रूस यूक्रेन में अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लेगातस्वीर: Alexander Nemenov/REUTERS
आपके लिए अहम जानकारी को स्किप करें

आपके लिए अहम जानकारी

यूक्रेन को 90 अरब यूरो का लोन देगा यूरोपीय संघ 

भेदभाव के शिकार श्वेत पुरुष अपनी शिकायत दर्ज कराएं: ट्रंप प्रशासन

संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में कितने घंटे हुई चर्चा

बांग्लादेश में छात्र नेता की मौत के बाद हिंसा, अखबारों के दफ्तर फूंके

2025 में भारत ने 334 में से 331 दिन झेली प्राकृतिक आपदाओं की मार

25 साल बाद भी यूरोपीय संघ नहीं कर पाया 'मर्कोसुर समझौता'

जलवायु संकट को लेकर जापानी नागरिकों ने सरकार पर किया मुकदमा

बांग्लादेश में चुनाव टालने के लिए जानबूझकर भड़काई जा रही है हिंसा: पूर्व मंत्री

'सर तन से जुदा' नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

पुतिन ने कहा, 'यूक्रेन में हमारे लक्ष्य पूरे होकर रहेंगे'

पुतिन ने कहा, 'यूक्रेन में हमारे लक्ष्य पूरे होकर रहेंगे' को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

पुतिन ने कहा, 'यूक्रेन में हमारे लक्ष्य पूरे होकर रहेंगे'

मॉस्को में वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और मौजूद अन्य लोग
ईयू द्वारा यूक्रेन को दिए गए कर्ज को पुतिन ने बताया डकैतीतस्वीर: Alexander Nemenov/REUTERS

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चार घंटे से अधिक समय तक चली अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में विश्वास जताया कि रूस यूक्रेन में अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर लेगा. उन्होंने दावा किया कि रूसी सेना ने पूरे मोर्चे पर रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है और यूक्रेन की सेना हर क्षेत्र में पीछे हट रही है. पुतिन ने स्पष्ट किया कि यदि कीव शांति वार्ता के लिए रूस की शर्तों को नहीं मानता है, तो मॉस्को सैन्य बल के माध्यम से अपने लक्ष्य हासिल करेगा.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित शांति योजना के बीच पुतिन ने कहा कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन संघर्ष के मूल कारणों को सुलझाना जरूरी है. उन्होंने नाटो महासचिव मार्क रुटे के बयानों को "बकवास" बताते हुए खारिज किया और कहा कि ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति रूस को सीधा दुश्मन नहीं मानती. पुतिन ने यह भी आरोप लगाया कि यूरोपीय नेता अब भी अमेरिकी राजनीति में बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं.

यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा यूक्रेन को 90 अरब यूरो का कर्ज देने के फैसले पर भी पुतिन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. पुतिन ने कहा कि यूक्रेन को मदद देने के लिए रूसी संपत्तियों का किसी भी तरह का उपयोग "डकैती" के समान होगा. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कदम से निवेशकों का भरोसा टूटेगा और यूरो क्षेत्र की विश्वसनीयता को भारी नुकसान पहुंचेगा.

पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना में वॉलंटियरों की कमी नहीं है और इस साल अब तक 4 लाख से अधिक लोग स्वेच्छा से सेना में शामिल हुए हैं. कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने एक सैनिक की विधवा की पेंशन समस्या को तुरंत हल करने का वादा किया और घरेलू आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा की. कार्यक्रम का अंत एक हल्के फुल्के पल के साथ हुआ, जब एक युवक ने वीडियो लिंक के माध्यम से अपनी प्रेमिका को शादी के लिए प्रपोज किया.

https://p.dw.com/p/55imr
राहुल गांधी ने जर्मन पर्यावरण मंत्री से की मुलाकात, जलवायु संकट पर की चर्चा को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

राहुल गांधी ने जर्मन पर्यावरण मंत्री से की मुलाकात, जलवायु संकट पर की चर्चा

बर्लिन में एक दूसरे से हाथ मिलाते जर्मन पर्यावरण मंत्री कार्स्टन श्नाइडर और कांग्रेस नेता राहुल गांधी
राहुल गांधी पांच दिन के जर्मनी दौरे पर हैंतस्वीर: INCIndia X/ANI Photo

भारत की लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी पांच दिवसीय जर्मनी यात्रा के दौरान बर्लिन में जर्मनी के संघीय पर्यावरण मंत्री कार्स्टन श्नाइडर से मुलाकात की. इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों नेताओं ने वैश्विक स्तर पर गहराते जलवायु परिवर्तन के संकट और भविष्य के लिए टिकाऊ, जन  केंद्रित समाधानों की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की. कांग्रेस पार्टी ने इस संवाद को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और साझा वैश्विक चुनौतियों से निपटने की दिशा में एक सार्थक कदम है.

अपनी इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने जर्मनी के पूर्व चांसलर ओलाफ शॉल्त्स के साथ दोपहर के भोजन पर मुलाकात की, जहां उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक कूटनीति से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार साझा किए. इसके अलावा, उन्होंने बर्लिन में 'कनेक्टिंग कल्चर्स' कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और सच्चाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रवासी भारतीयों को देश की सांस्कृतिक विविधता का दूत बताया.

इस दौरे का एक अन्य प्रमुख आकर्षण म्यूनिख स्थित 'बीएमडब्ल्यू वर्ल्ड' संग्रहालय का दौरा रहा, जहां राहुल गांधी ने जर्मन ऑटोमोबाइल तकनीक के साथ साथ भारतीय इंजीनियरिंग की कुशलता को भी करीब से देखा. राहुल गांधी ने इस दौरान भारत में घटती मैन्युफैक्चरिंग दर पर चिंता जताते हुए जोर दिया कि देश की सफलता की कुंजी उत्पादन बढ़ाने में है और भारत को एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में और अधिक प्रयास करने चाहिए.

हालांकि, संसद के शीतकालीन सत्र के बीच राहुल गांधी की इस विदेश यात्रा ने भारत में राजनीतिक गलियारों में बहस भी छेड़ दी है. जहां सत्तापक्ष ने सत्र के दौरान उनकी अनुपस्थिति पर सवाल उठाए हैं, वहीं कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह दौरा वैश्विक स्तर पर प्रगतिशील नेतृत्व के साथ संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए पूर्व निर्धारित था. राहुल गांधी शनिवार को अपनी इस महत्वपूर्ण यात्रा को समाप्त कर स्वदेश वापस लौटेंगे.

https://p.dw.com/p/55iMS
'सर तन से जुदा' नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती: इलाहाबाद हाईकोर्ट को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

'सर तन से जुदा' नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट की बिल्डिंग
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े आरोपी को राहत देने से किया इनकारतस्वीर: Nomad Harshit/Pond5 Images/IMAGO

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि "गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सर तन से जुदा" जैसे नारे लगाना केवल धार्मिक भावना से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत की कानून व्यवस्था, संप्रभुता और अखंडता के लिए एक खुली चुनौती है. न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने मौलाना तौकीर रजा की जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की.

अदालत ने कहा कि यह नारा लोगों को कानून हाथ में लेने और सशस्त्र विद्रोह के लिए उकसाता है और लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर आधारित भारतीय कानूनी व्यवस्था और संवैधानिक उद्देश्यों को सीधे तौर पर चुनौती देता है. हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इस नारे का कुरान या किसी अन्य मुस्लिम धार्मिक ग्रंथ में कोई उल्लेख नहीं है. अदालत ने चिंता जताई कि कई लोग इसका सही अर्थ और प्रभाव जाने बिना इसका व्यापक रूप से उपयोग कर रहे हैं.

न्यायाधीश ने कहा कि भारत की संप्रभुता और अखंडता सर्वोच्च है और किसी भी व्यक्ति या समूह को ऐसी दंड प्रक्रिया (सिर कलम करना) का आह्वान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो भारत के कानून का हिस्सा नहीं है. 

राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि 26 मई को बरेली में धारा 163 (बीएनएस) लागू होने के बावजूद भीड़ जमा हुई थी. आरोप है कि मौलाना और उनके साथियों ने भीड़ को उकसाया, जिसके बाद लगभग 500 लोगों ने पुलिस पर पथराव, पेट्रोल बम से हमला और गोलीबारी की, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा. अदालत ने अपराध की गंभीरता और समाज पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया.

https://p.dw.com/p/55iES
बांग्लादेश में चुनाव टालने के लिए जानबूझकर भड़काई जा रही है हिंसा: पूर्व मंत्री को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

बांग्लादेश में चुनाव टालने के लिए जानबूझकर भड़काई जा रही है हिंसा: पूर्व मंत्री

लोगों से घिरे हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस
मोहम्मद यूनुस पर जानबूझकर हिंसा फैलाने का आरोपतस्वीर: Mohammad Ponir Hossain/REUTERS

बांग्लादेश के पूर्व मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार देश में जानबूझकर हिंसा और अराजकता फैला रही है ताकि आगामी आम चुनावों को टाला जा सके. समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत को एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि कट्टरपंथी तत्वों को एकजुट कर देशव्यापी अशांति पैदा की जा सके.

पूर्व मंत्री ने दावा किया कि ढाका में भारतीय उप उच्चायुक्त के आवास पर हमला सुनियोजित और राज्य प्रायोजित था. उन्होंने कहा कि यूनुस सरकार भारत को उकसाने की कोशिश कर रही है ताकि संकट का अंतरराष्ट्रीयकरण किया जा सके. उन्होंने शरीफ उस्मान हादी को एक "कट्टरपंथी" बताया और मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि हादी की हत्या उसके अपने ही सशस्त्र समूह के किसी करीबी सदस्य ने की है.

चौधरी के अनुसार, इस हिंसा का दूसरा मुख्य उद्देश्य उन जमीनी राजनीतिक कार्यकर्ताओं को खत्म करना है जो अभी भी देश के भीतर सक्रिय हैं. उन्होंने 'प्रोथोम आलो' और 'द डेली स्टार' जैसे मीडिया घरानों पर हुए हमलों को भी पूर्व नियोजित बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक मंत्रियों ने खून बहाने की बात नहीं की, तब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं थी, लेकिन मंत्रियों के उकसावे के बाद भीड़ ने हिंसा शुरू की.

जहां एक ओर पूर्व मंत्री सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, वहीं मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इन घटनाओं को मुट्ठी भर अराजक तत्वों की करतूत बताया है. सरकार ने हादी की मौत पर शनिवार को राजकीय शोक घोषित किया है और मीडिया घरानों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगी है. इस बीच, भारत ने बांग्लादेश में अपने राजनयिक मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है.

https://p.dw.com/p/55i4h
जलवायु संकट को लेकर जापानी नागरिकों ने सरकार पर किया मुकदमा को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

जलवायु संकट को लेकर जापानी नागरिकों ने सरकार पर किया मुकदमा

जापान में भूकंप के दौरान बाढ़ का एक दृश्य
दक्षिण कोरिया और जर्मनी में भी ऐसे मुकदमे दायर किए जा चुके हैंतस्वीर: Mainichi Shimbun/REUTERS

जापान के लगभग 450 नागरिकों ने गुरुवार (18 दिसंबर) को केंद्र सरकार के खिलाफ देश का पहला ऐसा मुकदमा दायर किया है, जिसमें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए उठाए गए कदमों को अपर्याप्त और असंवैधानिक बताया गया है. इन नागरिकों का तर्क है कि सरकार की ढुलमुल नीतियों के कारण उनके स्वास्थ्य और आजीविका पर सीधा खतरा मंडरा रहा है, जो उनके शांतिपूर्ण जीवन जीने के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है.

मुकदमे में शामिल लोगों ने हाल के वर्षों में जापान में पड़ी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और प्राकृतिक आपदाओं को आधार बनाया है:

  • स्वास्थ्य संकट: नागरिकों का कहना है कि भीषण गर्मी के कारण लोग खेतों में काम करते समय गिर रहे हैं और कई मौतों की खबरें भी आई हैं.
  • आर्थिक नुकसान: निर्माण कार्य और खेती से जुड़े लोगों का कहना है कि गर्मी की वजह से काम की रफ्तार धीमी हो गई है, जिससे उन्हें भारी वित्तीय नुकसान हो रहा है.
  • बच्चों का भविष्य: शिकायतकर्ताओं में एक मां भी शामिल है, जिन्होंने कहा कि गर्मी के कारण बच्चे पार्क में नहीं खेल पा रहे हैं और स्विमिंग पूल तक बंद करने पड़ रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि वादी बहुत बड़ी रकम की मांग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने प्रति व्यक्ति केवल 1,000 येन (लगभग 545 रुपये) के मुआवजे की मांग की है. वकीलों का कहना है कि इस मुकदमे का मकसद पैसा कमाना नहीं, बल्कि सरकार को उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराना और जनता में जागरूकता फैलाना है. वे चाहते हैं कि अदालत यह घोषित करे कि सरकार के मौजूदा लक्ष्य पेरिस समझौते (1.5°C लक्ष्य) के अनुरूप नहीं हैं.

जापान ने 2013 के स्तर की तुलना में 2035 तक उत्सर्जन में 60 फीसदी और 2040 तक 73 फीसदी कटौती का लक्ष्य रखा है. हालांकि, इन नागरिकों का कहना है कि ये लक्ष्य कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं और अपर्याप्त हैं. इसी तरह के सफल मुकदमे पहले दक्षिण कोरिया (2024) और जर्मनी (2021) में देखे जा चुके हैं, जहां अदालतों ने सरकार के जलवायु लक्ष्यों को असंवैधानिक करार दिया था.

https://p.dw.com/p/55i3B
25 साल बाद भी यूरोपीय संघ नहीं कर पाया 'मर्कोसुर समझौता' को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

25 साल बाद भी यूरोपीय संघ नहीं कर पाया 'मर्कोसुर समझौता'

यूरोपीय संसद के पास प्रदर्शन के दौरान जलते टायरों के पास खड़ा एक प्रदर्शनकारी
अब इसे जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया गया है. तस्वीर: Yves Herman/REUTERS

यूरोपीय संघ (ईयू) और मर्कोसुर देशों के बीच होने वाले ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते को एक बार फिर टाल दिया गया है. 25 वर्षों की लंबी बातचीत के बाद भी, ब्रसेल्स में हुए हालिया शिखर सम्मेलन में सहमति नहीं बन सकी और अब इसे जनवरी 2026 तक के लिए टाल दिया गया है. 

मर्कोसुर समझौता क्या है?

यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र बनाने वाला एक समझौता है, जिसमें यूरोपीय संघ के 27 देश और दक्षिण अमेरिकी देश (ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे) शामिल हैं. इसका लक्ष्य दोनों गुटों के बीच 90 फीसदी से अधिक उत्पादों पर टैरिफ (सीमा शुल्क) को धीरे-धीरे खत्म करना है. 

इससे यूरोपीय संघ के वाहन, मशीनरी और वाइन का निर्यात बढ़ेगा, जबकि मर्कोसुर देशों के बीफ, चीनी और सोयाबीन को यूरोपीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी. हालांकि, इस समझौते के खिलाफ यूरोपीय किसानों ने ब्रसेल्स की सड़कों पर उग्र प्रदर्शन किया, जिसमें 1,000 से अधिक ट्रैक्टरों के साथ सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया. 

दरअसल फ्रांस, इटली और पोलैंड के किसानों को डर है कि दक्षिण अमेरिका से सस्ता बीफ और अनाज आने से वे प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे. यूरोपीय किसानों का तर्क है कि मर्कोसुर देशों में कीटनाशकों और खाद्य सुरक्षा के नियम यूरोप जितने सख्त नहीं हैं. 

इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों ने 'मिरर क्लॉज' और सख्त सुरक्षा शर्तों की मांग की है. फ्रांस और इटली जैसे देशों में दक्षिणपंथ के उभार और किसानों के गुस्से ने सरकारों को हस्ताक्षर करने से रोक दिया है. 

जर्मनी और स्पेन जैसे देश इस समझौते के प्रबल समर्थक हैं. उनका तर्क है कि अमेरिका के संभावित टैरिफ और चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दक्षिण अमेरिका के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध जरूरी हैं. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन ने उम्मीद जताई है कि जनवरी तक बातचीत पूरी कर ली जाएगी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह देरी यूरोपीय संघ की साख पर सवाल उठाती है.

https://p.dw.com/p/55hyT
सिद्धारमैया बोले, ढाई साल के लिए सीएम बनने का कोई समझौता नहीं हुआ को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

सिद्धारमैया बोले, ढाई साल के लिए सीएम बनने का कोई समझौता नहीं हुआ

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच खींचतान चल रही हैतस्वीर: IDREES MOHAMMED/AFP

कर्नाटक विधानसभा सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनने से जुड़ा कोई समझौता नहीं हुआ है. सत्र के आखिरी दिन विपक्षी पार्टी बीजेपी की ओर से सिद्धारमैया के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, जिसके जवाब में सिद्धारमैया ने यह बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरे पांच साल के लिए मुख्यमंत्री बने रहेंगे. 

सिद्धारमैया ने कहा, “अभी भी मैं मुख्यमंत्री हूं और मैं ही मुख्यमंत्री बना रहूंगा, जब तक कि हाईकमान कोई और फैसला नहीं ले लेता.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने ढाई साल के बारे में कभी कुछ नहीं कहा. ढाई साल से जुड़ा कोई समझौता नहीं हुआ है.” उन्होंने इससे पहले मंगलवार को भी कहा था कि हाईकमान का आदेश आने तक वे मुख्यमंत्री बने रहेंगे. 

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच खींचतान चल रही है. शिवकुमार के समर्थकों का कहना है कि कर्नाटक में चुनाव जीतने के बाद यह समझौता हुआ था कि शुरुआती ढाई साल के लिए सिद्धारमैया सीएम रहेंगे और उसके बाद कुर्सी डीके शिवकुमार को सौंप देंगे. हालांकि, सिद्धारमैया और उनके समर्थक ऐसे किसी भी समझौते से इनकार करते हैं.

https://p.dw.com/p/55hD1
2025 में भारत ने 334 में से 331 दिन झेली प्राकृतिक आपदाओं की मार को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

2025 में भारत ने 334 में से 331 दिन झेली प्राकृतिक आपदाओं की मार

बाढ़ के बीच पानी से गुजरता हुआ एक शख्स
इस दौरान कम से कम 4,419 लोगों की जान गईतस्वीर: MUNIR UZ ZAMAN/AFP

दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) और डाउन टू अर्थ की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने साल 2025 के पहले 11 महीनों (जनवरी से नवंबर) के 99 फीसदी दिनों में चरम मौसमी घटनाओं का सामना किया है. आंकड़ों के मुताबिक, 334 दिनों में से 331 दिन देश के किसी न किसी हिस्से में लू, शीतलहर, बिजली गिरने, तूफान, बाढ़ या भूस्खलन जैसी आपदाएं दर्ज की गईं. 

तबाही के प्रमुख आंकड़े (जनवरी-नवंबर 2025) : 

  • मानवीय क्षति: कम से कम 4,419 लोगों की जान गई (2022 के मुकाबले मौतों में 47% की वृद्धि)
  • कृषि पर प्रहार: लगभग 1.74 करोड़ हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई (2022 के मुकाबले यह नुकसान नौ गुना अधिक है)
  • संपत्ति का नुकसान: कम से कम 1,81,459 घर नष्ट हो गए
  • पशुधन: लगभग 77,189 जानवरों की मौत हुई

रिपोर्ट के अनुसार, आपदाओं का वितरण पूरे देश में रहा, लेकिन कुछ राज्यों ने इसका सबसे घातक रूप देखा. हिमाचल प्रदेश में सबसे अधिक बार चरम मौसम देखा गया (लगभग 80% दिन). सबसे ज्यादा मौतें आंध्र प्रदेश (608) में दर्ज की गईं, इसके बाद मध्य प्रदेश और झारखंड का स्थान रहा. 

महाराष्ट्र में 80.4 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई, इसके बाद गुजरात और कर्नाटक का नंबर आता है. उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड) में सबसे अधिक 311 दिन आपदाएं दर्ज की गईं और यहां मौतों का आंकड़ा (1,459) भी सबसे ज्यादा रहा.

https://p.dw.com/p/55h7D
बांग्लादेश में छात्र नेता की मौत के बाद हिंसा, अखबारों के दफ्तर फूंके को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

बांग्लादेश में छात्र नेता की मौत के बाद हिंसा, अखबारों के दफ्तर फूंके

बांग्लादेश में एक प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी झंडे के साथ छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी
छात्र नेता शरीफ उस्मान हादीतस्वीर: Mehedi Hasan/REUTERS

बांग्लादेश में 'जुलाई विद्रोह' के प्रमुख नेता और इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद देश भर में तनाव फैल गया है. हादी को पिछले सप्ताह ढाका में अज्ञात हमलावरों ने सिर में गोली मार दी थी, जिसके बाद गुरुवार रात सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. इस खबर के फैलते ही ढाका के शाहबाग और ढाका विश्वविद्यालय में हजारों छात्र और समर्थक सड़कों पर उतर आए और "हादी के हत्यारों को फांसी दो" के नारे लगाए.

हादी की मौत से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ढाका के कारवां बाजार स्थित देश के दो सबसे बड़े अखबारों, प्रोथोम आलो और द डेली स्टार के कार्यालयों पर हमला कर दिया. भीड़ ने इमारतों में तोड़फोड़ की और आग लगा दी, जिससे कई पत्रकार और कर्मचारी अंदर ही फंस गए. बाद में सेना ने आकर स्थिति को नियंत्रित किया और फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ये मीडिया संस्थान उनकी विचारधारा के खिलाफ काम कर रहे थे.

अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए शनिवार (20 दिसंबर) को राजकीय शोक की घोषणा की है. उन्होंने दोषियों को जल्द पकड़ने का वादा किया और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है. सरकार ने हादी के हत्यारों की जानकारी देने वाले को 50 लाख टका का इनाम देने का भी ऐलान किया है. इस बीच, कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस हत्या के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाते हुए भारतीय उच्चायोग के बाहर भी प्रदर्शन किया, हालांकि, भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

https://p.dw.com/p/55gzE
संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में कितने घंटे हुई चर्चा को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

संसद के शीतकालीन सत्र में दोनों सदनों में कितने घंटे हुई चर्चा

मनरेगा की जगह लेने के लिए लाए गए वीबी जी राम जी बिल का लोकसभा में विरोध करते विपक्षी पार्टियों के सांसद
शीतकालीन सत्र के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और चुनाव सुधारों पर विशेष चर्चा हुईतस्वीर: Sansad TV/ANI

संसद के उच्च सदन राज्यसभा का 269वां सत्र शुक्रवार, 19 दिसंबर को समाप्त हो गया. बीते सितंबर में उप राष्ट्रपति चुने गए सीपी राधाकृष्णन ने इस सत्र में पहली बार राज्यसभा की अध्यक्षता की. उन्होंने कहा कि सांसदों ने उनका पूरा सहयोग किया और पांच मौकों पर वे देर तक बैठने या दिन के भोजन के लिए मिलने वाला समय छोड़ने के लिए भी तैयार हुए.

उन्होंने बताया कि इस सत्र में सदन की कार्यवाही करीब 92 घंटे चली, जिससे सत्र की उत्पादकता 121 फीसदी पर पहुंच गई. शून्यकाल में चर्चा के लिए हर दिन औसतन 84 नोटिस दिए गए और हर दिन शून्यकाल के दौरान औसतन 15 से अधिक मुद्दे उठाए गए. इसके अलावा, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर हुई चर्चा में 82 सदस्य शामिल हुए, वहीं चुनाव सुधारों पर तीन दिन चली चर्चा में 57 सदस्यों ने अपनी बात रखी. 

18वीं लोकसभा का छठवां सत्र भी शुक्रवार को पूरा हो गया. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बताया कि सदन की 15 बैठकें हुईं, 92 घंटे और 25 मिनट कार्यवाही चली और 111 फीसदी की उत्पादकता दर हासिल हुई. सत्र के दौरान, सरकार ने दस बिल पेश किए जिनमें से आठ बिल पास हो गए. वंदे मातरम पर करीब 11 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 65 सदस्यों ने भाग लिया. चुनाव सुधारों पर करीब 13 घंटे चर्चा हुई, जिसमें 63 सदस्यों ने हिस्सा लिया. 

https://p.dw.com/p/55gve
भेदभाव के शिकार श्वेत पुरुष अपनी शिकायत दर्ज कराएं: ट्रंप प्रशासन को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

भेदभाव के शिकार श्वेत पुरुष अपनी शिकायत दर्ज कराएं: ट्रंप प्रशासन

वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप
ईईओसी की स्थापना भेदभाव से निपटने के लिए की गई थीतस्वीर: Mc2 Bruce Morgan/US Navy/Planet Pix/ZUMA/picture alliance

ट्रंप प्रशासन ने श्वेत पुरुषों से आग्रह किया है कि यदि उन्होंने कार्यस्थल पर नस्लीय या यौन भेदभाव का सामना किया है, तो वे इसकी रिपोर्ट करें. 'समान रोजगार अवसर आयोग' (ईईओसी) की अध्यक्ष एंड्रिया लुकास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस अभियान की शुरुआत की. उन्होंने लिखा, "क्या आप एक श्वेत पुरुष हैं जिसने अपने लिंग या नस्ल के आधार पर भेदभाव का अनुभव किया है? आपके पास संघीय नागरिक अधिकार कानूनों के तहत मुआवजा पाने का दावा हो सकता है."

ईईओसी अध्यक्ष का यह बयान उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की उस पोस्ट के कुछ घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने विविधता, समानता और समावेश (डीईआई) कार्यक्रमों को बुराई करार दिया था. एंड्रिया लुकास ने जोर देकर कहा कि ईईओसी कार्यस्थलों पर सभी प्रकार के नस्लीय और यौन भेदभाव को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसमें श्वेत पुरुष कर्मचारी और आवेदक भी शामिल हैं. प्रशासन का तर्क है कि कई कंपनियां डीईआई नीतियों को लागू करते समय मेरिट की अनदेखी कर रही हैं, जिससे देश के बहुसंख्यक वर्ग के अधिकारों का हनन हो रहा है.

जनवरी 2025 में सत्ता संभालने के बाद से ही राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने संघीय सरकार द्वारा चलाए जा रहे डीईआई कार्यक्रमों को बंद करने की दिशा में तेजी से काम किया है. ईईओसी, जिसकी स्थापना 1964 के नागरिक अधिकार अधिनियम के तहत भेदभाव से निपटने के लिए की गई थी, अब अपनी वेबसाइट पर विशेष रूप से "डीईआई संबंधित भेदभाव" को हाइलाइट कर रहा है. सरकार का मानना है कि ये कार्यक्रम अमेरिका विरोधी हैं और इनका उद्देश्य योग्यता के बजाय पहचान के आधार पर अवसर देना है, जिसे अब कानूनी रूप से चुनौती दी जा रही है.

https://p.dw.com/p/55gcF
यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के सहायता पैकेज को मिली मंजूरी को स्किप करें
१९ दिसम्बर २०२५

यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के सहायता पैकेज को मिली मंजूरी

एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की
समझौते के तहत फिलहाल जब्त रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल इस खर्च के लिए नहीं किया जाएगातस्वीर: John Thys/AFP/Getty Images

ब्रसेल्स में चले लंबे विचार-विमर्श के बाद, यूरोपीय संघ (ईयू) के नेताओं ने साल 2026 और 2027 के लिए यूक्रेन को 90 अरब यूरो (लगभग 106 अरब डॉलर) की वित्तीय सहायता देने पर सहमति जता दी है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने एक्स पर इसकी पुष्टि करते हुए कहा, "हमारी डील हो गई है. हमने वादा किया था और हमने इसे पूरा किया."

यह समझौता यूक्रेन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना इस फंड के अगले साल उसे 45 से 50 अरब यूरो के घाटे का सामना करना पड़ सकता था.

इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि फिलहाल जब्त रूसी संपत्तियों का इस्तेमाल इस खर्च के लिए नहीं किया जाएगा. इसके बजाय, यह कर्ज यूरोपीय संघ के साझा बजट द्वारा समर्थित होगा. हालांकि, जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन को यह नया कर्ज तभी चुकाना होगा जब रूस युद्ध के हर्जाने का भुगतान कर देगा. यदि रूस ऐसा नहीं करता है, तो अंततः जब्त की गई रूसी संपत्तियों का उपयोग ही इस कर्ज की भरपाई के लिए किया जाएगा.

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने यूरोपीय नेताओं से समाधान की अपील की थी, ताकि सैन्य उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके. रूसी संपत्तियों के इस्तेमाल पर सहमति न बन पाने के कारण यह वैकल्पिक समझौता किया गया है.

https://p.dw.com/p/55gHL
और पोस्ट दिखाएं
आयुष यादव
आयुष यादव एडिटर, डीडब्ल्यू हिन्दीhttps://x.com/aayush9906?s=21
आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.