ऑपरेशन सिंदूर अपनी शर्तों पर रोका: राजनाथ सिंह
प्रकाशित ३० अप्रैल २०२६आखिरी अपडेट ३० अप्रैल २०२६
आपके लिए अहम जानकारी
इंस्टाग्राम पर "8647" की तस्वीर बनी विवाद की जड़, पूर्व एफबीआई प्रमुख जेम्स कोमी पर ट्रंप को धमकी देने का आरोप.
ऑपरेशन सिंदूर सरकार ने अपनी शर्तों पर रोका, क्षमता की कोई कमी नहीं, लंबे युद्ध के लिए भारत पूरी तरह तैयार: राजनाथ सिंह
प्रेस की आजादी 25 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर
प्रेस की आजादी 25 वर्षों में सबसे निचले स्तर पर चली गई है. मीडिया अधिकारों की वकालत करने वाली रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने गुरुवार को यह जानकारी दी. यह संगठन हर साल प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी करता है. संगठन का कहना है, "इंडेक्स के 25 साल के इतिहास में पहली बार दुनिया के आधे से ज्यादा देश प्रेस के लिहाज से 'मुश्किल' या फिर 'बेहद गंभीर' श्रेणी में आ गए हैं. संगठन के मुताबिक, "सभी देशों और इलाकों का औसत स्कोर पहले कभी इतना कम नहीं रहा."
अभिव्यक्ति की आजादी पूरी दुनिया में चुनौतियां झेल रही है. संगठन ने इंडेक्स जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के पत्रकारों पर "ढांचागत" हमलों और सऊदी अरब का जिक्र किया जिसने 2025 में एक पत्रकार को फांसी की सजा दी थी.
आरएसएफ का कहना है कि प्रेस की आजादी के लिहाज से "अच्छा" माने जाने वाले देशों में रहने वाली आबादी 20 फीसदी से घट कर 1 फीसदी के नीचे आ गई है. उत्तरी यूरोप के केवल सात देश ही इस श्रेणी में आते हैं. नॉर्वे इन देशों में सबसे ऊपर है.
अमेरिका पहले इस मामले में "काफी अच्छा" कहे जाने वाले देशों की श्रेणी में था लेकिन 2024 में यह वहां से गिर कर "मुश्किल" श्रेणी में आ गया. 2024 में ही डॉनल्ड ट्रंप दोबारा राष्ट्रपति चुने गए थे उसके बाद यह सात स्थान और गिर कर अब 64वें नंबर पर पहुंच गया है. व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व वाला रूस भी 172वें नंबर पर है. आरएसएफ के मुताबिक अप्रैल 2026 में वहां 48 पत्रकार जेल में थे. 2026 में सबसे ज्यादा गिरावट सैन्य शासन वाले नाइजर में आया है. 37 स्थान नीचे गिर कर यह 120वें नंबर पर पहुंच गया है.
इंडेक्स में जर्मनी 14वें नंबर पर है जबकि चीन 172वें और भारत 157वें नंबर पर. शीर्ष पर मौजूद तीन देशों में नॉर्वे के अलावा नीदरलैंड्स और एस्तोनिया हैं. डेनमार्क चौथे और स्वीडन पांचवें नंबर पर है.
जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में दिखाने पर नेपाल एयरलाइंस ने मांगी माफी
नेपाल एयरलाइंस ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मैप में भारतीय क्षेत्रों को गलत तरीके से दिखाए जाने पर माफी मांगी. मीडिया रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि एयरलाइन ने जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया था. विवाद उठने के बाद एयरलाइन ने कहा कि यह मैप नेपाल या नेपाल एयरलाइंस के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाता. एक्स पर जारी बयान में कंपनी ने बताया कि पोस्ट में "गंभीर मानचित्रात्मक त्रुटियां" थीं, जिसके चलते इसे तुरंत हटा दिया गया.
पड़ोसियों से भारत के रिश्तों पर चीन का साया
नेपाल एयरलाइंस ने अपने बयान में कहा कि वह इस चूक के लिए खेद जताती है और भविष्य में ऐसी गलतियों से बचने के लिए आंतरिक समीक्षा कर रही है. एयरलाइन ने कहा कि वह क्षेत्र में अपने पड़ोसियों के साथ मजबूत रिश्तों को महत्व देती है और इस पोस्ट से किसी को ठेस पहुंची हो तो उसके लिए वह अफसोस जताती है.
भारत और नेपाल के बीच लिंपियाधुरा, कालापानी और लिपुलेख को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद चला आ रहा है. इससे पहले 2020 में नेपाल के नया राजनीतिक नक्शा जारी किए जाने और कालापानी को भारत के मानचित्र में दिखाए जाने पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था. इन इलाकों को लेकर दोनों देशों के दावे लंबे समय से कूटनीतिक मतभेद का कारण बने हुए हैं.
डॉनल्ड ट्रंप की धमकी के बाद तेल की कीमत 4 साल के उच्चस्तर पर
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी महीनों तक जारी रह सकती है. इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव चार साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया.
गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत का अमेरिकी बेंचमार्क ब्रेंट पांच फीसदी बढ़ कर जून की डिलीवरी के लिए 124 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया.
ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीति अटकी हुई है. इस बीच बुधवार को डॉनल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से टेलिफोन पर बात की. पुतिन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इस्राएल, ईरान के खिलाफ युद्ध दोबारा शुरू करते हैं तो इसके "नुकसानदेह नतीजे" होंगे.
तेल क्षेत्र के अधिकारियों से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी बमबारी से ज्यादा असरदार साबित हुई है. ईरान यह मांग कर रहा है कि कोई समझौता होने से पहले नाकेबंदी को खत्म करना होगा.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बुधवार को कहा कि उसने "नाकेबंदी का उल्लंघन करने वाले 42 कारोबारी जहाजों को लौटा कर अहम उपलब्धि हासिल की है." सेंट्रल कमांड के मुताबिक "41 टैंकरों में 6.9 करोड़ बैरल तेल था जो ईरान की सरकार नहीं बेच सकी." इस तेल की अनुमानित कीमत करीब 6 अरब अमेरिकी डॉलर है.
ट्रंप को धमकाने के आरोपों में एफबीआई के पूर्व निदेशक अदालत में पेश हुए
अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई के पूर्व निदेशक जेम्स कोमी बुधवार को वर्जीनिया में अदालत में पेश हुए. उन पर एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राष्ट्रपतिडॉनल्ड ट्रंप के जीवन के लिए खतरा पैदा करने के आरोप हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति के मुखर आलोचक कोमी पर कई दूसरे संघीय अपराधों के तहत भी आरोप लगाए गए हैं. मई 2025 में उन्होंने एक इंस्टाग्राम पर शंखों की एक तस्वीर डाली थी. तस्वीर में शंखों को नॉर्थ कैरोलाइना की एक बीच पर 8647 की आकृति में सजाया गया था. ट्रंप का कहना है कि यह कूट भाषा में एक धमकी थी.
कोमी पर "जान बूझ कर अमेरिकी राष्ट्रपति को शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने और उनकी जान पर खतरा पैदा करने के आरोप गए हैं." इसके साथ ही उन पर किसी और देश की तरफ से खतरा पैदा करने का भी आरोप लगाया गया है. इन दोनों में से हरेक के लिए उन्हें 10 साल की कैद की सजा हो सकती है.
एफबीआई के पूर्व निदेशक अलेक्जैंड्रिया की अदालत में सुनवाई के लिए हाजिर हुए और वहां से उन्हें बाद में घर जाने की अनुमति मिल गई.
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टोड ब्लांशे ने पत्रकारों से कहा है कि वह नहीं जानते कोमी दोबारा कब अदालत में पेश होंगे. ब्लांशे से जब पूछा गया कि क्या कोई भी अगर "8647" नंबरों को पोस्ट करेगा उस पर यही आरोप लगेंगे? जवाब में ब्लांशे ने कहा, "हरेक धमकी अलग है, हर बार जब राष्ट्रपति को धमकी दी जाएगी तो यह जरूरी नहीं कि उसके लिए अभियोग लगे. यह जांच पर निर्भर है. यह सभी दूसरे कारकों पर निर्भर है."
डॉनल्ड ट्रंप का कहना है कि एफबीआई के पूर्व प्रमुख "अच्छी तरह से" भावार्थ जानते थे. अदालत में सुनवाई के बाद ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर लिखा है, "8647 का मतलब है 'राष्ट्रपति ट्रंप को मार दो.' जेम्स कोमी जो एक बुरे पुलिसकर्मी हैं, सबसे बुरे में से एक, इसे अच्छी तरह जानते थे."
इंस्टाग्राम पोस्ट डालने के बाद कोमी ने इसके लिए माफी मांगी और कहा था कि उन्हें, "नहीं पता था कि कुछ लोग इन संख्याओं को हिंसा से जोड़ेंगे." कोमी ने यह भी कहा, "मेरे सामने यह कभी नहीं आया लेकिन मैं हर तरह की हिंसा का विरोध करता हूं और इस पोस्ट को हटा रहा हूं."