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राजनीतिविश्व

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा, ट्रंप बोले-अब कोई मतलब नहीं बचा

आमिर अंसारी रॉयटर्स, एएनआई, एएफपी | शिवांगी सक्सेना रॉयटर्स, एपी, डीपीए
प्रकाशित ८ जुलाई २०२६आखिरी अपडेट ८ जुलाई २०२६

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NATO-Gipfel Ankara 2026 | Donald Trump trifft NATO-Generalsekretär Mark Rutte
नाटो शिखर सम्मेलन में मीडिया से बात करते अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अंतरिम युद्धविराम को खत्म बताते हुए तेहरान से बातचीत को 'वक्त की बर्बादी' कहातस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/picture alliance
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बाढ़ और तूफान के बाद चीन में बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

बाढ़ और तूफान के बाद चीन में बड़े पैमाने पर राहत-बचाव अभियान

China Nanning 2026 | Polizei evakuiert Anwohner nach Taifun Maysak in einem Schlauchboot
चीन के कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ के बाद स्थिति खराबतस्वीर: cnsphoto/REUTERS

चीन में लगातार आ रही प्राकृतिक आपदाओं के बाद सरकार ने प्रभावित इलाकों के लिए करोड़ों युआन की अतिरिक्त राहत राशि जारी की है. सरकारी मीडिया के अनुसार, हूबेई प्रांत में सड़कों, स्कूलों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं की मरम्मत के लिए 5 करोड़ युआन तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास और घरों के पुनर्निर्माण के लिए 2 करोड़ युआन दिए गए हैं. हाल ही में आए भीषण तूफान और बवंडरों में यहां 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं.

हिमालय पर तेजी से खत्म हो रही है बर्फ, स्नो-ड्रॉट से नदियों और किसानों को खतरा

वहीं गांसू प्रांत में भूस्खलन की चपेट में आने से 21 वनकर्मियों की मौत हो गई. इस आपदा से निपटने और राहत कार्यों के लिए सरकार ने 3 करोड़ युआन की सहायता मंजूर की है. दूसरी ओर, दक्षिणी गुआंग्शी क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय तूफान मेसाक के कारण आई बाढ़ से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 1.3 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है.

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और पेयजल आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे हजारों लोग कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. बचाव अभियान में 8,000 से अधिक कर्मियों और 5,700 नौकाओं को लगाया गया है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि एक और शक्तिशाली तूफान, सुपर टाइफून बावी, सप्ताहांत में दक्षिण-पूर्वी चीन से टकरा सकता है. इस बीच बांग्लादेश और भारत में भी भारी मानसूनी बारिश और भूस्खलन के कारण कई लोगों की मौत की खबरें हैं.

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यूएन रिपोर्ट: 2030 विकास लक्ष्यों से पीछे दुनिया, गरीबी और भूख खत्म करने का लक्ष्य खतरे में को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

यूएन रिपोर्ट: 2030 विकास लक्ष्यों से पीछे दुनिया, गरीबी और भूख खत्म करने का लक्ष्य खतरे में

Gazastreifen Chan Junis 2026 | Verteilung warmer Mahlzeiten an Vertriebene im Flüchtlingslager
यूएन ने चेतावनी दी है कि चरम गरीबी और भूख समाप्त करने जैसे प्रमुख लक्ष्य गंभीर खतरे में हैंतस्वीर: Bashar Taleb/AFP

संयुक्त राष्ट्र की नई सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) रिपोर्ट 2026 के अनुसार दुनिया 2030 तक निर्धारित विकास लक्ष्यों को हासिल करने की राह से पीछे चल रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 17 वैश्विक लक्ष्यों के तहत तय किए गए केवल 36 प्रतिशत लक्ष्य ही समय पर पूरे होने की दिशा में हैं, जबकि लगभग आधे लक्ष्यों पर प्रगति धीमी है और 15 फीसदी की स्थिति 2015 के स्तर से भी नीचे चली गई है. यूएन ने चेतावनी दी है कि चरम गरीबी और भूख समाप्त करने जैसे प्रमुख लक्ष्य गंभीर खतरे में हैं.

गिरते पड़ते दक्षिण अफ्रीका से भागते विदेशी

रिपोर्ट के अनुसार विकासशील देशों के लिए वित्तपोषण में चार ट्रिलियन डॉलर की कमी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है. वर्ष 2025 में विकास सहायता में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जो अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक कमी है. वैश्विक गरीबी दर 2026 में 10 फीसदी पर बनी हुई है, जो 2015 की तुलना में केवल तीन प्रतिशत अंक कम है. वहीं ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाओं जैसी वैश्विक घटनाओं ने खाद्य सुरक्षा पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे भूख और कुपोषण खत्म करने के प्रयास प्रभावित हुए हैं.

जर्मनी में हर सातवें बच्चे पर गरीबी का खतरा

हालांकि कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति भी दर्ज की गई है. दुनिया की 92 फीसदी आबादी तक बिजली की पहुंच हो चुकी है और स्वच्छ पानी, स्वच्छता तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है. कई देशों में बाल विवाह और फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) के मामलों में कमी आई है, लेकिन उप-सहारा अफ्रीका और दक्षिण एशिया में यह समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है. यूएन की उप महासचिव अमीना जे. मोहम्मद ने कहा कि यदि देश अधिक तेजी, एकजुटता और दृढ़ संकल्प के साथ कदम उठाएं तो 2030 के लक्ष्य अभी भी हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है.

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वायनाड: भारी बारिश के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, मलबे में फंसे लोगों की तलाश को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

वायनाड: भारी बारिश के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, मलबे में फंसे लोगों की तलाश

Indien Wayanad 2024 | Such- & Rettungseinsatz nach verheerenden Erdrutschen
लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा हैतस्वीर: National Disaster Response Force/AFP

केरल के वायनाड जिले में मंगलवार को भारी मानसूनी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के बाद राहत और बचाव दल लापता पांच लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं. इस हादसे में सुरंग निर्माण स्थल के पास काम कर रहे कम से कम तीन श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य घायल हो गए हैं. घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है.

क्या भारत में पर्यावरणीय खतरों को नजरअंदाज किया जा रहा है?

लगातार बारिश के बावजूद आपदा प्रबंधन दल, पुलिस और स्निफर डॉग्स की मदद से खोज अभियान जारी है. प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र को कई हिस्सों में बांटकर तलाशी अभियान शुरू किया है. घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मिट्टी का विशाल ढेर ढहता दिखाई दे रहा है, जिससे पेड़ उखड़ गए और निर्माण स्थल के आसपास लगी बैरिकेडिंग बह गई.

संकेतों की अनदेखी का नतीजा थी वायनाड की त्रासदी

केरल के गृह मंत्री टी सिद्धीक ने दावा किया कि यह पूरी तरह प्राकृतिक नहीं बल्कि "मानव निर्मित" भूस्खलन था. उनका आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान निकाली गई मिट्टी और मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान नहीं किया गया, जबकि पहले ही चेतावनी दी गई थी. हालांकि निर्माण कंपनी ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि भूस्खलन कार्यस्थल से काफी ऊपर के क्षेत्र में शुरू हुआ था.

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जर्मनी की अदालत ने 15 मरीजों की हत्या के मामले में डॉक्टर को सुनाई उम्रकैद को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

जर्मनी की अदालत ने 15 मरीजों की हत्या के मामले में डॉक्टर को सुनाई उम्रकैद

Deutschland | Frühere RAF-Terroristin Daniela Klette gefasst
जर्मनी में बर्लिन की क्षेत्रीय अदालत ने 15 मरीजों की हत्या के मामले में 41 वर्षीय डॉक्टर को उम्रकैद की सजा सुनाई.तस्वीर: John Macdougall/AFP/Getty Images

जर्मनी में बर्लिन की क्षेत्रीय अदालत ने 15 मरीजों की हत्या के मामले में 41 वर्षीय डॉक्टर योहानेस एम. को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने उनके चिकित्सकीय पेशे पर आजीवन प्रतिबंध भी लगा दिया है और यह भी माना कि यह मामला "विशेष गंभीरता" की श्रेणी में आता है. दोषी डॉक्टर ने सितंबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच 15 मरीजों की जान ली. इनमे 12 महीलाएं और 3 पुरुष थे. उनकी उम्र 25 से 94 वर्ष के बीच थी. योहानेस मरीजों को एनेस्थेटिक (बेहोशी की दवा) और मांसपेशियों को शिथिल करने वाली दवाओं का घातक मिश्रण देता था , जिससे उनकी सांस की मांसपेशियां काम करना बंद कर देती थीं और कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो जाती थी.
 
कम से कम पांच मामलों में योहानेस ने हत्या के सबूत मिटाने के लिए पीड़ितों के अपार्टमेंट में आग लगा दी. अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 जुलाई 2024 की सुबह आरोपी ने बर्लिन के क्रॉयसबर्ग इलाके में 75 वर्षीय पुरुष की हत्या की. छह घंटों बाद उसने पड़ोसी इलाके में 76 वर्षीय महिला की भी हत्या कर दी.  इस मामले का खुलासा तब हुआ जब केयर सेवा से जुड़े कर्मचारियों को आरोपी की गतिविधियों पर संदेह हुआ. इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अगस्त 2024 में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
 
फैसले से पहले सोमवार को आरोपी ने अदालत में स्वीकार किया था कि उसने लोगों की हत्या की है. पिछले साल अभियोजकों ने कहा था, "ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपी के पास लोगों की हत्या करने का कोई अन्य मकसद नहीं था, सिवाय हत्या करने के."
 
योहानेस ने अपनी डॉक्टरेट थीसिस हत्या (हॉमिकाइड) विषय पर लिखी थी.

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पश्चिमी देशों से यूएन की अपील, अफगानिस्तान को न करें नजरअंदाज को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

पश्चिमी देशों से यूएन की अपील, अफगानिस्तान को न करें नजरअंदाज

Afghanistan Provinz Chost 2026 | Taliban-Soldaten mit Flugabwehrgeschütz auf der Suche nach pakistanischen Kampfjets
यूएन के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने पश्चिमी देशों से अफगानिस्तान के साथ संवाद और सहयोग बनाए रखने की अपील कीतस्वीर: Stringer/REUTERS

संयुक्त राष्ट्र के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने पश्चिमी देशों से अफगानिस्तान के साथ संवाद और सहयोग बनाए रखने की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त बरहम सालेह और यूएनडीपी प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि अफगानिस्तान की अनदेखी करना दुनिया के लिए महंगा पड़ सकता है. उनके अनुसार अगर देश में अस्थिरता बढ़ती है तो इसका असर आतंकवाद, मादक पदार्थों की तस्करी, अपराध और शरणार्थियों के पलायन के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महसूस किया जा सकता है.

महिलाओं के विरोध से तालिबान को किस बात का डर?

तालिबान और रूस के बीच क्यों बढ़ रही नजदीकियां?

अफगानिस्तान इस समय कई संकटों से एक साथ जूझ रहा है. 2023 के बाद से पाकिस्तान और ईरान से करीब 60 लाख लोग वापस लौट चुके हैं, जबकि इस वर्ष 20 लाख और लोगों के लौटने की संभावना है. आर्थिक तंगी, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं और अंतरराष्ट्रीय सहायता में भारी कटौती ने हालात को और कठिन बना दिया है. संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों ने चेतावनी दी कि स्वास्थ्य और खाद्य सहायता कार्यक्रमों के लिए धन की कमी से लाखों लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है.

हालांकि अधिकारियों ने यह भी माना कि सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण और नशीले पदार्थों के उत्पादन में कमी जैसे क्षेत्रों में कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है. इसके बावजूद महिलाओं और लड़कियों पर तालिबान सरकार द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सबसे बड़ी चिंता बने हुए हैं. दोनों अधिकारियों का मानना है कि अलगाव की नीति के बजाय रचनात्मक संवाद और सहयोग के जरिए ही अफगानिस्तान में सुधार, स्थिरता और समावेशी व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है.

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ट्रंप का दावा: यूक्रेन युद्ध खत्म होने के करीब, नाटो शिखर सम्मेलन में होगी अहम चर्चा को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

ट्रंप का दावा: यूक्रेन युद्ध खत्म होने के करीब, नाटो शिखर सम्मेलन में होगी अहम चर्चा

Ukraine Saporischschja 2026 | Rettungsarbeiten nach russischem Luftangriff
बीते चार साल से रूस-यूक्रेन युद्ध जारी हैतस्वीर: REUTERS

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन और रूस के बीच चार साल से अधिक समय से चल रहे युद्ध के समाधान की संभावना पहले से कहीं ज्यादा करीब नजर आ रही है. ट्रंप ने बताया कि हाल ही में उनकी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अलग-अलग बातचीत हुई है. उनका दावा है कि दोनों नेता युद्ध समाप्त करना चाहते हैं और इस मुद्दे पर तुर्की में हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान भी चर्चा होगी.

नाटो बैठक की शुरुआत में ही सहयोगियों पर जम कर बरसे ट्रंप

चीन में रूसी सैनिकों को दी जा रही ट्रेनिंग पर जर्मनी ने चीनी राजदूत को किया तलब

दूसरी ओर, रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिनमें कम से कम 28 लोगों की मौत हो गई. हालांकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यूक्रेन संकट को लेकर ट्रंप का रुख पहले जैसा ही है और उनके विचारों में किसी बड़े बदलाव की बात सही नहीं है. उन्होंने कहा कि पुतिन और ट्रंप भविष्य में भी बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं.

उधर, जेलेंस्की ने ट्रंप के साथ अपनी हालिया बातचीत को "बहुत अच्छी" बताया. फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यूक्रेन की हालिया सैन्य सफलताओं, खासकर रूस के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों के बाद, ट्रंप इस युद्ध को नए नजरिये से देख रहे हैं.

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महाराष्ट्र में मानसून का कहर, 1 जून से अब तक 62 लोगों की मौत, तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

महाराष्ट्र में मानसून का कहर, 1 जून से अब तक 62 लोगों की मौत, तटीय जिलों के लिए रेड अलर्ट

Indien Mumbai 2026 | Arbeiter räumen Straße nach Monsunregen & Sturmschäden
बारिश से जुड़ी घटनाओं में कई लोगों की मौत हुईतस्वीर: Punit Paranjpe/AFP

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में अचानक बाढ़, नदियों के उफान और इमारतों के ढहने जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर दी है. महाराष्ट्र राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) की ओर से बुधवार को जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 1 जून से अब तक राज्य में 62 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 पशुओं की भी जान गई है.

Indien Mumbai 2026 | Fußgänger passiert entwurzelten Baum nach Monsunregen
भारी बारिश के कारण महाराष्ट्र में जान माल का नुकसान हुआतस्वीर: Punit Paranjpe/AFP

स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (एसईओसी) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य के तटीय और पश्चिमी जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई. सबसे ज्यादा असर ठाणे और पालघर में देखने को मिला. इस दौरान ठाणे में 196.9 मिमी, पालघर में 185.4 मिमी, रायगढ़ में 134.1 मिमी, मुंबई उपनगर में 125.0 मिमी और पुणे में 69.4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई.

भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी

रिपोर्ट के अनुसार, 1 जून से अब तक हुई कुल बारिश के आधार पर लगभग सभी जिले सामान्य से बहुत अधिक बारिश की श्रेणी में पहुंच चुके हैं. पालघर में सामान्य से 457.3 प्रतिशत और पुणे में 435.4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई हैय

आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, पिछले पांच सप्ताह में हुई 62 मौतों में सबसे अधिक जानें इमारतों और दीवारों के ढहने तथा आकाशीय बिजली गिरने की घटनाओं में गई हैं. संरचनाओं के ढहने से 25 लोगों की मौत हुई और 41 लोग घायल हुए. ये घटनाएं मुख्य रूप से नासिक, ठाणे, और मुंबई उपनगर में हुईं. वहीं बिजली गिरने की घटनाओं में 23 लोगों की मौत और 17 लोग घायल हुए.

लगातार बारिश के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. इसके चलते कई निचले इलाकों के गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है.

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ट्रंप बोले ईरान से युद्धविराम खत्म, तेल की कीमतों में इजाफा को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

ट्रंप बोले ईरान से युद्धविराम खत्म, तेल की कीमतों में इजाफा

NATO-Gipfel Ankara 2026 | Donald Trump trifft NATO-Generalsekretär Mark Rutte
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम खत्म करने का एलान किया.तस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/picture alliance

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब खत्म हो गया है. यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है. तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या ईरान के साथ संघर्षविराम अभी भी कायम है, तो उन्होंने कहा, “जहां तक मेरा सवाल है, यह खत्म हो चुका है.” 

होर्मुज में नाकाबंदी से पूरी दुनिया पर असर

उन्होंने आगे कहा, "ईरान के साथ बातचीत करना समय की बर्बादी है. अगर हमारे शानदार वार्ताकार बात करना चाहते हैं तो मैं उन्हें जारी रखने दूंगा, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता. मुझे ये लोग पसंद नहीं हैं.”

ट्रंप के इस बयान के बाद तेल की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

समुद्री रास्ते बनेंगे ताकत का अखाड़ा?

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यह संकट फरवरी के अंत में अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान पर किए गए बड़े हमलों के बाद शुरू हुआ था. ईरान का कहना है कि वह यहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेगा और अपने तय रास्ते से हटने वाले जहाजों को निशाना बनाने की चेतावनी दी.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि उसकी सेनाओं ने ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर हमला किया. इनमें ईरानी वायु रक्षा प्रणाली, तटीय रडार केंद्र और आईआरजीसी की 60 छोटी नौकाएं शामिल थीं.

बता दें मंगलवार को ईरान के उप विदेश मंत्री ने अमेरिका के हमलों को पिछले महीने हुए अमेरिका-ईरान समझौते का उल्लंघन बताया और निर्णायक कदम उठाने का सख्त संदेश दिया.

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जर्मनी में टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े यौन अपराधों की जांच, चीनी महिलाओं को निशाना बनाने के आरोप को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

जर्मनी में टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े यौन अपराधों की जांच, चीनी महिलाओं को निशाना बनाने के आरोप

Symbolbild Telegram Messenger blockiert
जर्मनी में ऑनलाइन टेलीग्राम नेटवर्क की जांच के दौरान यौन अपराधों से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए तस्वीर: picture-alliance/dpa/TASS/A. Vaganov

जर्मनी में एक ऑनलाइन टेलीग्राम नेटवर्क की जांच के दौरान यौन अपराधों से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं. अभियोजकों के अनुसार, खुद को 'जर्मन ड्राइविंग स्कूल फॉर एक्सपर्ट्स' कहने वाले एक टेलीग्राम समूह में शामिल लोग कथित तौर पर महिलाओं के साथ बलात्कार करने, उन्हें नशीला पदार्थ देकर बेहोश करने और हमलों के वीडियो व तस्वीरें साझा करने की बातें करते थे.

जांचकर्ताओं ने टेलीग्राम ऐप पर मौजूद करीब दो दर्जन ग्रुप चैट की कई सालों की पोस्ट खंगाली हैं. अधिकारियों का मानना है कि ये चैट मुख्य रूप से जर्मनी में रहने वाले चीनी पुरुषों के ऑनलाइन नेटवर्क का हिस्सा थीं, जिसमें अधिकतर चीनी महिलाओं को निशाना बनाया जाता था. हालांकि, जांच से जुड़े कई बड़े सवालों के जवाब अभी सार्वजनिक नहीं हुए हैं. जांच की जा रही है कि क्या यह नेटवर्क यूरोप और अमेरिका में सामने आए उन ऑनलाइन समूहों से जुड़ा है, जहां महिलाओं को नशीला पदार्थ देकर यौन हमला करने को बढ़ावा दिया जाता है.

फ्रैंकफर्ट के मुख्य सरकारी अभियोजक डोमिनिक मीज कहते हैं, "इन आरोपियों में खास तौर पर क्रूरता, पीड़िताओं को वस्तु समझने की मानसिकता और अपराधों की चालाकी से योजना बनाने की बात सामने आई है."

जर्मनी में रह रही चीनी महिलाएं पीड़िताओं के समर्थन में अदालत की कार्यवाही में शामिल हो रही हैं. फू शियाओ नाम की एक महिला करीब 500 किलोमीटर की यात्रा कर पिछले सप्ताह बर्लिन पहुंचीं. वह कहती हैं, "जो बात सबसे ज्यादा गुस्सा दिलाती है, वह यह देखना है कि ऐसे समूह महिलाओं से नफरत करते हैं और उनके प्रति कोई सम्मान नहीं रखते. महिलाओं को इंसान नहीं समझा जाता.”

पुरुषों से दूर रहें, जर्मन पुलिस अधिकारी की महिलाओं को सलाह

इस जांच के आधार पर अब तक तीन मुख्य सदस्यों को बलात्कार और अन्य अपराधों में दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि चौथे आरोपी के खिलाफ बर्लिन में मुकदमा चल रहा है.

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अमेरिका में आईसीई एजेंट की गोली से एक और मौत को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

अमेरिका में आईसीई एजेंट की गोली से एक और मौत

USA Houston 2026 | Gedenkstätte nach tödlichem Schuss eines ICE-Agenten auf mexikanischen Autofahrer
टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में आईसीई के एजेंट द्वारा 39 वर्षीय मैक्सिकन नागरिक की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद विरोध हो रहा है.तस्वीर: Antranik Tavitian/REUTERS

अमेरिका के टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट (आईसीई) के एक एजेंट द्वारा 39 वर्षीय मैक्सिकन नागरिक लोरेंजो सालगाडो अराउजो की गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के अनुसार, अराउजो को एक लक्षित कार्रवाई के दौरान रोकने की कोशिश की गई थी, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया और कथित तौर पर एक आईसीई अधिकारी की ओर वाहन बढ़ा दिया, जिसके बाद एजेंट ने आत्मरक्षा में गोली चलाई.

अमेरिका में एक और व्यक्ति की फेडरल एंजेटों की गोली से मौत

घटना के बाद एफबीआई ने मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं, डेमोक्रेटिक सांसद सिल्विया गार्सिया और लैटिनो अधिकार संगठनों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि अतीत में भी कुछ आईसीई गोलीबारी मामलों में अधिकारियों के दावों और बाद में सामने आए वीडियो साक्ष्यों में अंतर पाया गया था. स्थानीय लोगों और अधिकार समूहों ने सभी वीडियो फुटेज, संचार रिकॉर्ड और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की मांग की है.

अराउजो के बेटे रोनाल्डो सालगाडो ने कहा कि उनके पिता करीब 35 वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे, निर्माण क्षेत्र में काम करते थे और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्य अनुमति प्राप्त करने की कोशिश कर रहे थे. उन्होंने कहा, "मेरे पिता इसके हकदार नहीं थे." घटना के बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभा भी आयोजित की गई. समुदाय के कई लोगों ने आईसीई की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है.

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पश्चिम बंगाल: बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले के आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

पश्चिम बंगाल: बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले के आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत

Indien | Proteste in Kalkutta
बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले के आरोपी की पुलिस मुठभेड़ में मौत की खबर सामने आई. तस्वीर: Satyajit Shaw/DW

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के दुष्कर्म और हत्या मामले में गिरफ्तार एक आरोपी की पुलिस कार्रवाई में मौत हो गई. अधिकारियों के अनुसार, आरोपी प्रभास मंडल को मंगलवार को अपराध स्थल के पुनर्निर्माण (क्राइम सीन रीकंस्ट्रक्शन) के लिए ले जाया जा रहा था. तभी उसने कथित तौर पर पुलिसकर्मी की सर्विस पिस्तौल छीनने की कोशिश की और हिरासत से भागने का प्रयास किया. पुलिस के मुताबिक, प्रभास मंडल की इस कोशिश के बाद पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें वह घायल हो गया. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रभास मंडल को मृत घोषित कर दिया.

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने इस घटना की आलोचना की और इसे 'जंगल राज' बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा, "बारुईपुर दुष्कर्म-हत्या मामले के आरोपी प्रभास मंडल की मुठभेड़ में हत्या! बंगाल में क्या चल रहा है? बंगाल के लोगों, नए बंगाल का स्वागत कीजिए-'उत्तर प्रदेश 2.0.' बंगाल में बीजेपी की सरकार नहीं है. यह जंगल राज है."

यह मामला बारुईपुर इलाके की 12 वर्षीय बच्ची की मौत से जुड़ा है. बच्ची का शव बीते 5 जुलाई को सूरज्यापुर हाट इलाके से बरामद किया गया था. वह इससे एक दिन पहले 4 जुलाई को लापता हुई थी. घटना सामने आने के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि आरोपियों में से एक आरोपी बच्ची को पहले एक झोपड़ीनुमा स्थान पर ले गया था, जहां पहले से दो अन्य आरोपी मौजूद थे.

क्या बीजेपी सरकार की इस पहल से बदलेगी पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा की तस्वीर?

प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में संकेत मिला है कि बच्ची की मौत जीवित अवस्था में डूबने से हुई थी. हालांकि पुलिस ने कहा है कि मौत के सही कारण और परिस्थितियों की पुष्टि अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट और विसरा जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही हो पाएगी.

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ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के सवाल, 29 ऑटो कंपनियों को लिखा पत्र को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

ई-20 पेट्रोल पर केजरीवाल के सवाल, 29 ऑटो कंपनियों को लिखा पत्र

Indien PK Arvind Kejriwal
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उन्होंने ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखा है.तस्वीर: Sanchit Khanna/Hindustan Times/Sipa USA/picture alliance

आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने ई-20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों को पत्र लिखा है. केजरीवाल ने दावा किया कि कुछ कंपनियां सार्वजनिक रूप से ई-20 को पुराने वाहनों के लिए सुरक्षित बता रही हैं, जबकि उनके वाहन मैनुअल में ई-10 से अधिक एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.

केजरीवाल ने बताया कि उन्होंने मारुति, टोयोटा और हीरो को अलग से पत्र लिखकर पूछा है कि क्या 2023 से पहले बने वाहनों में ई-20 का इस्तेमाल सुरक्षित है. उन्होंने कंपनियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि यदि ई-20 के उपयोग से माइलेज में 5 प्रतिशत से अधिक की कमी आती है या वाहन के किसी पुर्जे को नुकसान होता है, तो क्या उपभोक्ताओं को मुआवजा दिया जाएगा.

एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर परेशान लोग

वहीं, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ई-20 को लेकर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए कहा कि इस ईंधन को वाहन निर्माता और उपभोक्ता दोनों स्वीकार कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों दोपहिया और लाखों चारपहिया वाहन एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रहे हैं और ई-25 पर कोई फैसला व्यापक परीक्षण और उद्योग जगत से चर्चा के बाद ही लिया जाएगा.

बायोएथेनॉल उत्पादन के इंडोनेशिया के बड़े सपने

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चीन में बने जहाजों पर अमेरिकी शुल्क से जर्मनी को हो सकता है फायदा को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

चीन में बने जहाजों पर अमेरिकी शुल्क से जर्मनी को हो सकता है फायदा

China Guangdong 2025 | Marine-Flotte kehrt nach Eskorte-Einsatz zurück
अमेरिका नवंबर से चीन में बने मालवाहक जहाजों पर अतिरिक्त पोर्ट शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है.तस्वीर: Zhang Dayu/Xinhua/picture alliance

अमेरिका नवंबर से चीन में बने मालवाहक जहाजों पर अतिरिक्त पोर्ट शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है. जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक रिसर्च (डीआईडब्ल्यू) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से जर्मनी को फायदा हो सकता है, जबकि अमेरिका को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जर्मनी की शिपिंग कंपनियां दूसरे कई देशों की तुलना में चीन में बने जहाजों का कम इस्तेमाल करती हैं. ऐसे में नए शुल्क का असर जर्मनी पर कम पड़ेगा. इससे जर्मन कंपनियों के लिए अमेरिका में अपना सामान बेचना आसान हो सकता है और उनका निर्यात करीब दो फीसदी बढ़ेगा.

अमेरिका का कहना है कि वह यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उठा रहा है. उसका मकसद जहाज निर्माण के क्षेत्र में चीन की बढ़ती पकड़ को कमजोर करना है. यह शुल्क जहाज में लदे सामान पर नहीं, बल्कि इस बात पर लगेगा कि जहाज किस देश में बनाया गया है. हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार इस फैसले का नुकसान खुद अमेरिका को भी हो सकता है. अतिरिक्त शुल्क के कारण अमेरिका में सामान मंगाने और भेजने की लागत बढ़ जाएगी. अनुमान है कि इससे अमेरिका का आयात 0.2 फीसदी और निर्यात 0.3 फीसदी तक घट सकता है.

अर्थशास्त्री सोनाली चौधरी ने कहा कि जब कंपनियों की लागत बढ़ती है तो उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है. इसका असर कारोबार और सामान की मांग, दोनों पर पड़ता है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप के फिनलैंड, डेनमार्क और पोलैंड जैसे देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. वहीं कोस्टा रिका, वियतनाम और पाकिस्तान जैसे देशों का अमेरिका को होने वाला निर्यात करीब 9 फीसदी तक घट सकता है. दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया को भी जर्मनी की तरह फायदा मिलने की संभावना है. उसका अमेरिका को निर्यात करीब दो फीसदी बढ़ सकता है.

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आईओसी ने रूसी ओलंपिक समिति से हटाया निलंबन को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

आईओसी ने रूसी ओलंपिक समिति से हटाया निलंबन

IOC debattiert mögliche Wiederzulassung Russlands
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने रूसी ओलंपिक समिति पर 2023 से लागू निलंबन को अस्थायी रूप से हटा दिया है.तस्वीर: FABRICE COFFRINI/AFP/Getty Images

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने रूसी ओलंपिक समिति (आरओसी) पर अक्टूबर 2023 से लागू निलंबन को अस्थायी रूप से हटा दिया है. यह फैसला तब लिया गया जब आईओसी ने पाया कि रूसी ओलंपिक समिति ने यूक्रेन के कब्जे वाले क्षेत्रों लुहान्स्क, दोनेत्स्क, खेरसोन और जापोरिज्जिया से जुड़े क्षेत्रीय खेल निकायों को अपनी सदस्यता सूची से हटा दिया है. इस कदम को लॉस एंजेलिस 2028 ओलंपिक से पहले रूस की खेल जगत में वापसी की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है.

आईओसी अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने कहा कि संगठन किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता, लेकिन खिलाड़ियों को उनकी सरकारों के फैसलों की सजा नहीं मिलनी चाहिए. इस निर्णय के बाद रूसी खिलाड़ी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक क्वालीफिकेशन स्पर्धाओं में हिस्सा ले सकेंगे. हालांकि आईओसी ने अभी यह तय नहीं किया है कि रूस को ओलंपिक में अपने राष्ट्रीय ध्वज, रंग और राष्ट्रगान के साथ भाग लेने की अनुमति दी जाएगी या नहीं.

दूसरी ओर, यूक्रेन और कई खिलाड़ी संगठनों ने इस फैसले की आलोचना की है. उनका कहना है कि यूक्रेन में जारी युद्ध और रूस के पुराने डोपिंग विवादों को देखते हुए यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया है. हालांकि आईओसीने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लौटने वाले सभी रूसी खिलाड़ियों को कड़े एंटी-डोपिंग नियमों का पालन करना होगा. इसके बावजूद कुछ खेल महासंघ, जैसे वर्ल्ड एथलेटिक्स, अब भी रूसी खिलाड़ियों पर अपने अलग प्रतिबंध बनाए हुए हैं.

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ईरान पर अमेरिकी हमलों पर नाटो प्रमुख बोले, "यह बिल्कुल जरूरी था" को स्किप करें
८ जुलाई २०२६

ईरान पर अमेरिकी हमलों पर नाटो प्रमुख बोले, "यह बिल्कुल जरूरी था"

नाटो महासचिव मार्क रूटे ने ईरान पर अमेरिका के ताजा हमलों का समर्थन करते हुए उन्हें "बिल्कुल जरूरी" बताया है. अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से पहले पत्रकारों से बातचीत में रुटे ने कहा कि संघर्ष विराम का उल्लंघन होने की स्थिति में अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया उचित थी.

रुटे ने कहा, "जब संघर्ष विराम लागू है और ईरान उसका उल्लंघन कर रहा हो, जैसा कि हमने कल जहाजों पर हुए हमलों में देखा, तो मेरा मानना है कि अमेरिका की मजबूत प्रतिक्रिया बिल्कुल जरूरी है."

उन्होंने संकेत दिया कि आज होने वाली नाटो नेताओं की बैठक में ईरान का मुद्दा भी प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेगा.

नाटो प्रमुख ने आगे कहा, "मुझे उम्मीद है कि आज सहयोगी देश इस बात की पुष्टि करेंगे कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने नहीं दी जानी चाहिए. दूसरा, नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलना बेहद आवश्यक है."

ईरान युद्ध: कारोबार के ये ठिकाने भी होर्मुज जितने अहम

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आमिर अंसारी, डीडब्ल्यू हिन्दी, नई दिल्ली
आमिर अंसारी डीडब्ल्यू के दिल्ली स्टूडियो में कार्यरत विदेशी संवाददाता.