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यूक्रेन युद्ध: जेलेंस्की बोले, रूस बातचीत को लंबा खींच रहा

आमिर अंसारी रॉयटर्स, एएनआई | निखिल रंजन एएफपी, एपी, रॉयटर्स
प्रकाशित १८ फ़रवरी २०२६आखिरी अपडेट १८ फ़रवरी २०२६

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जिनेवा में यूक्रेन और रूस की अमेरिकी मध्यस्थता में बातचीत खत्म हो गई है.तस्वीर: Alexander Ryumin/TASS/picture alliance
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रूस और यूक्रेन की बातचीत पूरी, समझौता अब भी दूर को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

रूस और यूक्रेन की बातचीत पूरी, समझौता अब भी दूर

जिनेवा में बातचीत करते रूस और यूक्रेन के अधिकारी
जिनेवा में अमेरिकी मध्यस्थता में रूस और यूक्रेन की बातचीत पूरी हो गई है तस्वीर: National Security and Defence Council of Ukraine/REUTERS

जिनेवा में यूक्रेन और रूस की अमेरिकी मध्यस्थता में बातचीत खत्म हो गई है. इस दौरान बातचीत में थोड़ी प्रगति जरूर हुई लेकिन दोनों पक्ष इलाकों को लेकर कोई सहमति नहीं बना सके जो कि सबसे प्रमुख मुद्दा है. 
चार साल से चली आ रही जंग को रोकने को लिए अमेरिका दबाव बना रहा है. इस युद्ध में दसियों हजार लोगों की मौत हुई है, इसके साथ ही पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया है. हालांकि यूक्रेन और रूस इस बात पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि युद्ध के बाद कौन सी जमीन किसे मिलेगी. 
रूस यूक्रेन के पूर्वी दोनेत्स्क इलाके पर पूरी तरह नियंत्रण चाहता है. उसने बातचीत के जरिए इसे मिलने पर ताकत के जरिए हासिल करने की भी बात कही है. उधर यूक्रेन ने उसकी यह मांग खारिज कर दी है. यूक्रेन का यह भी कहना है कि वह तब तक किसी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा जब तक कि उसे सुरक्षा गारंटी नहीं मिल जाती कि रूस उस पर फिर हमला नहीं करेगा.

जिनेवा के होटल से बातचीत के बाद बाहर निकलते यूक्रेन के अधिकारी
रूस और यूक्रेन की दो दिन चली बातचीत में कुछ प्रगति हुई लेकिन समझौता अब भी दूर है तस्वीर: Pierre Albouy/REUTERS

बातचीत पूरी होने के बाद जेलेंस्की ने पत्रकारों से कहा, "हम देख सकते हैं कि जमीनी काम पूरा हो गया है, हालांकि अभी स्थितियों में अंतर है, क्योंकि समझौता आसान नहीं था." 
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि दोनों पक्ष संघर्ष विराम से जुड़े "लगभग सभी मुद्दों" पर सहमत हो गए हैं जिसमें एक निगरानी तंत्र होगा और अमेरिका उसमें शामिल रहेगा. जेलेंस्की के मुताबिक यूक्रेन के पूर्वी हिस्से में कब्जे में लिए गए इलाकों और रूसी कब्जे वाले झापोरिझिया न्यूक्लियर प्लांट के भविष्य को लेकर कोई समाधान नहीं निकला है. 
रूस ने यूक्रेन पर फरवरी 2022 में हमले के साथ युद्ध शुरू हुआ था. 

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फ्रांस में लगातार 35 दिन बारिश के बाद रिकॉर्ड टूटा को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

फ्रांस में लगातार 35 दिन बारिश के बाद रिकॉर्ड टूटा

दक्षिण पश्चिमी फ्रांस के ला रियोल शहर की पानी में डूबी सड़कें
फ्रांस में लगातार 35 दिनों की बारिश के बाद रिकॉर्ड टूट गया हैतस्वीर: Philippe Lopez/AFP

फ्रांस की लोइर नदी में एक आदमी लापता हो गया है. बाढ़ प्रभावित पश्चिमी फ्रांस के इस इलाके में लगातार 35वें दिन बारिश हुई है जो एक रिकॉर्ड है. 1959 में मौसम संबंधी रिकॉर्ड रखना शुरू होने के बाद से यह पहली बार है जब फ्रांस में किसी जगह लगातार 35 दिन तक बरसात हुई है. पश्चिमी फ्रांस के चार विभागों को अलर्ट कर दिया गया है. इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है. पेड्रो तूफान के आने के बाद यहां जो मौसम की स्थिति बनी है उसके आने वाले दिनों में और बिगड़ने की आशंका है. 

दक्षिण पश्चिमी शहर बोर्दो के मेयर ने शहर में आपातकालीन योजना सक्रिया कर दी है. यहां 1999 के बाद पहली बार बाढ़ आई है. कई और शहरों में आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है. मंगलवार को लोइर नदी के किनारे बसे एक शहर का निवासी लापता हो गया. उसकी कनू (एक तरह की छोटी नाव) नदी में डूब गई. बुधवार को सेंते शहर की कई सड़कें बाढ़ के पानी में डूब गईं. कुल मिला कर 50 सड़कों पर और 900 से ज्यादा घरों में पानी भर गया है. 

शहरों को बाढ़ और गर्मी से कैसे बचा सकते हैं?

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रमजान में नमाज के लिए सिर्फ 10,000 लोगों को अल अक्सा में जाने की अनुमति को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

रमजान में नमाज के लिए सिर्फ 10,000 लोगों को अल अक्सा में जाने की अनुमति

यरुशलम में अल अक्सा मस्जिद का परिसर
इस्राएल ने रमजान में अल अक्सा मस्जिद में 10,000 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी हैतस्वीर: Gazi Samad/Anadolu/picture alliance

इस्राएल ने पूर्वी यरुशलम की अल अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करने वालों की संख्या तय करने का फैसला किया है. रमजान के महीने में 10,000 लोगों को वहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई है. इस्राएली प्रशासन ने वेस्ट बैंक के फलस्तीनियों पर उम्र आधारित सीमाएं भी लगाई हैं. यहां प्रवेश के लिए पुरुषों की उम्र 12 साल से कम या फिर 55 साल से ज्यादा होनी चाहिए. इसी तरह महिलाओं की उम्र 50 साल या उससे ऊपर होने की शर्त रखी गई है. 

यरुशलम जैसी पवित्र जगह को लेकर इतनी शत्रुता क्यों है

इस्राएल के रक्षा मंत्रालय की नागरिक मामलों के लिए जिम्मेदार एजेंसी सीओजीएटी ने कहा है, "10 हजार फलस्तीनी श्रद्धालुओं को रमजान के महीने में शुक्रवार की नमाज के लिए टेंपल माउंट में जाने की अुनमति होगी. इसके लिए उन्हे दैनिक परमिट पहले से लेना होगा." सीओजीएटी के अधिकारियों ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया कि यह सीमाएं सिर्फ पश्चिमी बैंक से आने वाले फलस्तीनी लागों पर लागू होगी. इस्राएल ने 1967 के युद्ध में इस इलाके पर कब्जा कर लिया था. रमजान के दौरान लाखों फलस्तीनी लोग पारंपरिक रूप से अल अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने आते हैं. यरुशलम के पूर्व में मौजूद इस मस्जिद को इस्लाम में तीसरी सबसे पवित्र जगह मानी जाती है. 

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भारत‑जर्मनी ने एआई पैक्ट पर हस्ताक्षर किए को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

भारत‑जर्मनी ने एआई पैक्ट पर हस्ताक्षर किए

Indien Neu-Delhi 2026 | Plakat für die India AI Impact Summit 2026 an Straße in Neu-Delhi
जर्मनी और भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए "एआई पैक्ट" पर हस्ताक्षर किएतस्वीर: Arun Sankar/AFP/Getty Images

जर्मनी और भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए बुधवार, 18 फरवरी को नई दिल्ली में "एआई पैक्ट" पर हस्ताक्षर किए. जर्मनी के डिजिटल मंत्री कार्स्टेन विल्डबर्गर और भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह समझौता उस समय किया, जब दुनिया भर के नेता एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं. इस समझौते में इंडस्ट्रियल, एनर्जी, हेल्थ और एग्रीकल्चर सेक्टर में पहल शामिल हैं.

समझौते में स्किल्ड वर्कर्स की आवाजाही पर भी जोर दिया गया है, जिसके तहत दोनों देशों में संपर्क केंद्र स्थापित किए जाएंगे ताकि भारतीय छात्रों और पेशेवरों की गतिशीलता आसान हो सके. दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया कि वे एआई को जिम्मेदारी, सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इससे पहले जनवरी में एआई, सेमीकंडक्टर, डिजिटल पेमेंट और स्टार्ट-अप्स पर अगले दो वर्षों के लिए संयुक्त परियोजनाओं के लिए सहमति बनी थी.

विल्डबर्गर के मुताबिक, ‘"एआई पैक्ट" हाल ही में हुए भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते को गति देगा और जर्मन कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा करेगा.

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रेअर अर्थ और एआई पर बातचीत के लिए भारत पहुंचे ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

रेअर अर्थ और एआई पर बातचीत के लिए भारत पहुंचे ब्राजील के राष्ट्रपति लूला

Südafrika Johannesburg 2025 | G20-Gipfel | Lula da Silva
लूला एक मंत्रियों के एक बड़े दल और शीर्ष सीईओ वाली व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैंतस्वीर: Ricardo Stuckert/PR

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा बुधवार, 18 फरवरी को नई दिल्ली पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत हुआ. लूला एक मंत्रियों के एक बड़े दल और शीर्ष सीईओ वाली व्यवसायिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए हैं. उनकी इस यात्रा का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रेअर अर्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समेत कई अहम मुद्दों पर बातचीत करना है. भारत और ब्राजील के संबंधों को भारतीय विदेश मंत्रालय ने "करीबी और बहुआयामी" बताया है.

लूला गुरुवार को नई दिल्ली में ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में हिस्सा लेंगे, जहां वे एआई गलत सूचना को रोकने के लिए वैश्विक विनियमों की मांग करेंगे. इसके बाद शनिवार को वे प्रधानमंत्री मोदी से औपचारिक वार्ता करेंगे. दोनों देश ब्रिक्स के सदस्य हैं और इस साल समूह की अध्यक्षता भारत के पास है. इसके पहले ब्राजील इशका अध्यक्ष था. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और अमेरिकी व्यापार नीतियां भी वार्ता के एजेंडा में शामिल हैं.

क्या रेअर अर्थ पर चीन का दबदबा खत्म कर सकते हैं पश्चिमी देश?

ब्राजील खुद को चीन प्रधान बाजार में रेअर अर्थ्स के एक वैकल्पिक वैश्विक स्रोत के रूप में पेश कर रहा है. वहीं भारत के लिए ब्राजील लातिन अमेरिका में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 12 अरब डॉलर से अधिक रहा. ब्राजील भारत को कपास, बीज, सोयाबीन तेल और विभिन्न खनिजों के लिए संभावनाओं वाला बड़ा बाजार मानता है, जिसका अब तक ज्यादा उपयोग नहीं हुआ है. 

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एनवीडिया ने भारतीय कंपनियों के साथ की बड़ी साझेदारियां को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

एनवीडिया ने भारतीय कंपनियों के साथ की बड़ी साझेदारियां

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अमेरिकी चिप कंपनी एनवीडिया तस्वीर: Justin Sullivan/Getty Images/AFP

अमेरिकी चिप दिग्गज एनवीडिया ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षमता बढ़ाने के लिए बुधवार, 18 फरवरी को कई भारतीय टेक कंपनियों के साथ पार्टनरशिप की घोषणाएं कीं. यह घोषणाएं नई दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुईं, जिसे वैश्विक एआई गवर्नेंस और भारत की तकनीकी नेतृत्व क्षमता पर चर्चा के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है.

मुंबई की क्लाउड और डेटा सेंटर कंपनी एल एंड टी ने बताया कि वह एनवीडिया के साथ मिलकर देश का ‘सबसे बड़ा गीगावॉट-स्केल एआई फैक्ट्री’ बनाने जा रही है. कंपनी चेन्नई में 30 मेगावॉट और मुंबई में 40 मेगावॉट क्षमता वाले डेटा सेंटर तैयार करेगी, जिनमें एनवीडिया के शक्तिशाली प्रोसेसर इस्तेमाल होंगे. इसके अलावा योट्टा ने भी दो अरब डॉलर के निवेश के तहत 20,000 से अधिक एनवीडिया ब्लैकवेल प्रोसेसर लगाने की योजना की घोषणा की.

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भारत के आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आने वाले दो वर्षों में देश को 200 अरब डॉलर से अधिक निवेश मिलने की उम्मीद है. अदाणी ग्रुप ने 2035 तक 100 अरब डॉलर के निवेश से ‘हाइपरस्केल एआई-रेडी डेटा सेंटर्स’ स्थापित करने का एलान किया, जबकि माइक्रोसॉफ्ट, एंथ्रोपिक और इंफोसिस जैसी कंपनियों ने भी नई साझेदारियों के बारे में बताया.

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समिट में दुनिया भर के नेताओं की मौजूदगी के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि ठोस और बाध्यकारी वादों की उम्मीद कम है. अब तक हुए वैश्विक एआई सम्मेलनों की तरह इस बार भी घोषणाएं व्यापक और गैर-बाध्यकारी रहने की आशंका जताई जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बदलती एआई तकनीक के सामने सरकारों को प्रभावी और साझा गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनाने के लिए और अधिक तत्परता दिखानी होगी.
 

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पोलैंड की सेना ने सैन्य परिसर में चीनी कारों के प्रवेश पर रोक लगाई को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

पोलैंड की सेना ने सैन्य परिसर में चीनी कारों के प्रवेश पर रोक लगाई

पोलैंड में सेना की पार्किंग में खड़ी गाड़ियां
पोलैंड की सेना ने सैन्य परिसर में चीनी कारों के प्रवेश पर रोक लगा दी है तस्वीर: 12 Brygada Zmechanizowana/Handout/REUTERS

पोलैंड की सेना ने सैन्य परिसर में चायनीज कारों के प्रवेश पर रोक लगा दी है. उन्हें उम्मीद है कि इस तरह वे तकनीकी रूप से उन्नत कारों के जरिए संवेदनशील डेटा जमा करने की कोशिश को रोक सकेंगे. पोलैंड की सेना ने इस रोक को उचित ठहराते हुए जारी बयान में कहा है कि आधुनिक कारें बेहद उन्नत सेंसरों और संचार तंत्रों से लैस हैं जो, "अनियंत्रित तरीके से डेटा को जमा और उन्हें इस्तेमाल" कर सकती हैं.  

गाड़ियां अब वीडियो, आवाज और लोकेशन जुटा लेती हैं और इस बात का डर है कि चीनी कार बनाने वाले इनमें से कुछ संवेदनशील आंकड़ों को अपनी सरकारों के साथ साझा कर सकते हैं. सेना का कहना है कि लोकेशन, वीडियो और आवाज जमा करने वाली सभी कारो के सैन्य इलाकों में जाने पर रोक होगी.

कारों में इन सेवाओं के बंद करने के बाद उन्हें वहां ले जाया जा सकता है. इसका मतलब है कि नए प्रतिबंध सिर्फ चायनीज कारों पर ही लागू नहीं होंगे. इसके साथ ही सेना के अधिकारियों के फोन को चीन में बनी किसी भी गाड़ी के इंफोटेनमेंट सिस्टम से कनेक्ट नहीं किया जा सकेगा. सेना का कहना है कि ये सारे उपाय रक्षात्मक हैं और नाटो देशों के नियमों के अनुरूप हैं. 

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तुर्की के सांसदों ने पीकेके लड़ाकों को समाज में दोबारा शामिल करने का समर्थन किया को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

तुर्की के सांसदों ने पीकेके लड़ाकों को समाज में दोबारा शामिल करने का समर्थन किया

हथियार छोड़ने के बाद पीकेके के लड़ाके
पीकेके ने पिछले साल तुर्की के साथ अपना सशस्त्र संघर्ष खत्म करने की घोषणा की थीतस्वीर: Channel8/DHA

तुर्की में हथियार डालने वाले कुर्द लड़ाकों को समाज में दोबारा शामिल किया जाना चाहिए. तुर्की के सांसदों ने बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुरोध किया है. हालांकि इसमें इन लड़ाकों को "माफी देने" की बात नहीं की गई है.
एक सर्वदलीय आयोग की इस रिपोर्ट का मकसद तुर्की और प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के बीच शांति के कदमों को लिए कानूनी जमीन तैयार करना है. पिछले साल पीकेके ने तुर्की के खिलाफ अपना हथियारबंद संघर्ष बंद करने की औपचारिक घोषणा की थी.

प्रतीक के तौर पर हथियार जला कर संघर्ष खत्म करने का औपचारिक एलान करते पीकेके के लड़ाके
तुर्की के सांसदों ने पीकेके के लड़ाकों को समाज में दोबारा शामिल करने का समर्थन किया है तस्वीर: Shwan Mohammed/AFP

चार दशकों के इस संघर्ष में दोनों तरफ के 50,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई है. आयोग के 50 सांसद इस रिपोर्ट पर बुधवार को ही मतदान करेंगे. इसके बाद यह रिपोर्ट तुर्की की संसद की मंजूरी के लिए रखी जाएगी.  रिपोर्ट में कहा गया है, "कानून को जिन लोगों ने हथियार और हिंसा छोड़ी है उन्हें समाज में दोबारा शामिल करने की कोशिश करनी चाहिए." हालांकि इसमें इस बात पर भी जोर दिया गया है, "कानूनी नियमों को सजामुक्ति या माफी की धारणा नहीं बनानी चाहिए."

इस रिपोर्ट में जेल में बंद पीकेके संस्थापक अब्दुल्लाह ओजालान के भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. ओजालान ने जेल में रहने के दौरान ही उन कोशिशों का नेतृत्व किया जिसने संघर्ष को खत्म किया. ओजालान इस्तांबुल के पास इमराली द्वीप पर बनी जेल की कालकोठरी में 1999 से ही बंद हैं. 
पीकेके ने ओजालान के कैद की परिस्थितियों को आसान बनाने और आखिर में उनकी रिहाई की शर्त रखी थी. पीकेके ने पिछले साल अपने विघटन की घोषणा की और प्रतीक के तौर पर अपने हथियारों को जलाया. 

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पीएम मोदी से मिले स्पेन के राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज: द्विपक्षीय बैठक में डिफेंस, ट्रेड और तकनीक पर हुई बात को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

पीएम मोदी से मिले स्पेन के राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज: द्विपक्षीय बैठक में डिफेंस, ट्रेड और तकनीक पर हुई बात

Indien Neu-Delhi 2026 | Premierminister Narendra Modi trifft den spanischen Ministerpräsidenten Pedro Sánchez
स्पेन के राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीतस्वीर: DPR PMO/ANI

प्रधानमंत्री नरेंद्र ने बुधवार, 18 फरवरी को नई दिल्ली में स्पेन के राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज के साथ बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर बात की. दोनों नेताओं ने व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और कई दूसरे जरूरी सेक्टरों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने बाद में कहा बैठक काफी अच्छी रही.

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल होने के लिए सांचेज नई दिल्ली पहुंचे हैं. यह एक ग्लोबल प्लेटफॉर्म है जो उद्योग-कारोबार और सरकार चलाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर ध्यान देता है.

स्पेन में ये लोग गुफाओं में क्यों रह रहे हैं?

समिट में शामिल होने से पहले सांचेज ने पीएम मोदी के साथ अहम बैठक की. मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, "दिल्ली में राष्ट्रपति पेद्रो सांचेज के साथ एक अच्छी मीटिंग हुई. इंडिया-स्पेन दोस्ती को बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा हुई, खासकर डिफेंस, सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी और दूसरे क्षेत्रों में. हमारे देश 2026 को इंडिया-स्पेन ईयर ऑफ कल्चर, टूरिज्म और एआई के तौर पर मना रहे हैं. इससे लोगों के बीच जुड़ाव और गहरा होगा. स्पेन के विश्वविद्यालय का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है, यह देखकर खुशी हुई. यह भी हमारे लोगों को जोड़ने में बहुत मदद करेगा."

पीएम ने आगे लिखा, "ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटीए का स्पेन के साथ इकोनॉमिक पार्टनरशिप पर बहुत अच्छा असर पड़ेगा और दोनों देशों के लोगों को नए अवसर उपलब्ध कराएगा."

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माइक्रोसॉफ्ट "ग्लोबल साउथ" में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए निवेश करेगा 50 अरब डॉलर को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

माइक्रोसॉफ्ट "ग्लोबल साउथ" में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए निवेश करेगा 50 अरब डॉलर

Indien Neu-Delhi 2026 | Arbeiter montiert Nationalflaggen am Bharat Mandapam für AI-Gipfel
माइक्रोसॉफ्ट ने कहा कि वह दशक अंत तक 50 अरब डॉलर का निवेश करेगीतस्वीर: Arun Sankar/AFP

अमेरिकी टेक दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने बुधवार, 18 फरवरी को एलान किया कि वह ग्लोबल साउथ के देशों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को बढ़ावा देने के लिए इस दशक के अंत तक 50 अरब डॉलर निवेश करेगा. माइक्रोसॉफ्ट के वाइस चेयरमैन और प्रेसिडेंट ब्रैड स्मिथ और माइक्रोसॉफ्ट की वाइस प्रेसिडेंट और चीफ रिस्पॉन्सिबल एआई ऑफिसर नताशा क्रैम्पटन ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि ग्लोबल नॉर्थ में एआई का इस्तेमाल ग्लोबल साउथ की तुलना में लगभग दोगुना है.

क्या एआई और डिजिटलाइजेशन से नौकरियों को खतरा है?

उन्होंने लिखा, "यह खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है. यह असमानता ना केवल राष्ट्रीय और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को प्रभावित करती है, बल्कि इस बात पर भी असर डालती है कि क्या एआई दुनिया भर में अवसरों और समृद्धि को बढ़ाने के अपने व्यापक वादे को पूरा कर सकता है."स्मिथ ने कहा कि 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' ने इस चुनौती को अपने एजेंडे के केंद्र में रखकर बिल्कुल सही काम किया है.

उन्होंने कहा, "एक सदी से भी अधिक समय से, बिजली तक असमान पहुंच ने वैश्विक उत्तर और दक्षिण के बीच बढ़ती आर्थिक खाई को और गहरा कर दिया है. यदि हम तत्काल कार्रवाई नहीं करते हैं, तो एआई की बढ़ती खाई आने वाली सदी में इस असमानता को और बढ़ा देगी."

माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में 'एजुकेटर्स के लिए एलिवेट' कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य 2,00,000 से अधिक स्कूलों, व्यावसायिक संस्थानों और उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत 20 लाख शिक्षकों की क्षमता को बढ़ाना है.

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ईरान और रूस ओमान के सागर में युद्धाभ्यास करेंगे को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

ईरान और रूस ओमान के सागर में युद्धाभ्यास करेंगे

ईरान, रूस और चीन के संयुक्त युद्धभ्यास की फाइल तस्वीर
ईरान और रूस ओमान के सागर में संयुक्त युद्धाभ्यास करेंगे तस्वीर: Iranian Army Office via ZUMA Press/picture alliance

ईरान और रूस की नौसेनाएं ओमान के सागर में गुरुवार, 19 फरवरी को संयुक्त युद्धाभ्यास करेगी. ईरान की मीडिया ने यह जानकारी दी है.
सोमवार को ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने होरमुज की खाड़ी में युद्धाभ्यास शुरू किया था. इस इलाके में फिलहाल अमेरिकी नौसेना के जंगी जहाज भी मौजूद हैं. 

युद्धाभ्यास के प्रवक्ता एडमिरल हसन मागसोदलू के हवाले से आईएसएनए एजेंसी ने खबर दी है, "रिपब्लिक ऑफ ईरान और रूस का संयुक्त नौसेना अभ्यास ओमान के सागर में कल (गुरुवार) होगा. लक्ष्य है समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच संबंधों को मजबूत करना" यह अभ्यास कब तक चलेगा इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

अमेरिकी युद्धपोत अब्राहम लिंकन और दूसरे जंगी जहाज
अमेरिकी नौसेना का विमानवाहक युद्धपोत इन दिनों ओमान होरमुज की खाड़ी के इलाके में हैतस्वीर: Zachary Pearson/US Navy/AFP

ईरान और अमेरिका के अधिकारियों की मंगलवार को जिनेवा में बातचीत हुई थी. इससे पहले दोनों देशों की बातचीत जून, 2025 में ईरान पर इस्राएल के हमले के बाद टूट गई थी. इस युद्ध में अमेरिका ने भी कुछ समय के लिए हिस्सा लिया और ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने विमानवाहक युद्धपोत अब्राहम लिंकन को इलाके में तैनात कर दिया है. इसके साथ ही एक और युद्धपोत वहां भेजा गया है. 
  

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता को 31 हफ्ते का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

बॉम्बे हाई कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता को 31 हफ्ते का गर्भ समाप्त करने की अनुमति दी

Indien Bombay High Court
अदालत ने कहा कि पीड़िता गर्भ जारी नहीं रखना चाहती और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, तत्काल प्रक्रिया करने पर उसकी जान को कोई खतरा नहीं होगातस्वीर: Jane Sweeney/robertharding/imago images

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार, 17 फरवरी को 16 वर्षीय बलात्कार पीड़िता को 31 सप्ताह का गर्भ खत्म करने की अनुमति दे दी है. अदालत ने कहा कि पीड़िता गर्भ जारी नहीं रखना चाहती और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, तत्काल प्रक्रिया करने पर उसकी जान को कोई खतरा नहीं होगा. यह आदेश उस स्थिति में आया है जब पूर्व में मेडिकल बोर्ड ने इतनी उन्नत अवस्था में गर्भ समापन से इनकार कर दिया था.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में हाल ही के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना और उज्जल भूयान की बेंच ने समान परिस्थितियों में महाराष्ट्र की एक नाबालिग की 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति दी थी. उस मामले में भी मेडिकल बोर्ड ने पहले इनकार किया था, लेकिन हाई कोर्ट के निर्देश के बाद उसने नई रिपोर्ट दाखिल की और स्पष्ट किया कि एसओपी के तहत उसकी भूमिका केवल चिकित्सकीय तथ्य बताने की है, ना कि गर्भ खत्म करने पर राय देने की.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश का हो रहा है विरोध

अदालत ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की शुरुआती असहमति कानून की व्यवस्था के अनुरूप थी, पर यह मामला न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करता था. कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की 17 फरवरी की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि बोर्ड ने स्पष्ट रूप से बताया है कि "अगर गर्भ को आज खत्म किया जाता है, तो पीड़िता के जीवन को कोई जोखिम नहीं होगा." इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया.

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ऑस्ट्रेलिया ने इस्लामिक स्टेट से संबंध के चलते नागरिक को देश में आने से रोका को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

ऑस्ट्रेलिया ने इस्लामिक स्टेट से संबंध के चलते नागरिक को देश में आने से रोका

रोज डिटेंशन कैंप में दो लड़कियां
सीरिया के रोज कैंप में इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों की बीवियां और बच्चे रहते हैंतस्वीर: Baderkhan Ahmad/AP Photo/picture alliance

ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने एक नागरिक को वतन लौटने से रोक दिया है. यह नागरिक कथित रूप से इस्लामिक स्टेट से जुड़ा है और सीरिया के डिटेंशन कैंप में है. यह ऑस्ट्रेलियाई उन 34 महिलाओं और बच्चो में शामिल हैं जिन्हें सोमवार को दमिश्क से ऑस्ट्रेलिया विमान से ले जाया जाना था. हालांकि सीरियाई अधिकारियों ने उन्हें रोज के डिटेंशन कैंप में वापस भेज दिया. 
इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों में शामिल रहे कई देशों के लोग, उनकी बीवियां और बच्चे इस गुट के नियंत्रण में रहे इलाके हारने के बाद 2019 से सीरिया के डिटेंशन कैंपों में रह रहे हैं. हारने के बाद भी इस गुट के स्लीपर सेल हैं जो सीरिया और इराक में घातक हमले कर रहे हैं.

ऑस्ट्रेलिया के गृह मंत्री टोनी बुर्के ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियों ने ग्रुप के एक सदस्य से खतरों का आकलन करने के बाद उसे रोकने का फैसला किया है. ऑस्ट्रेलियाई नागरिक होने के बाद भी उसे देश में आने की इजात नहीं होगा. बुर्के ने उस नागरिक की पहचान नहीं बताई ना हीं यह बताया कि यह प्रतिबंध कब तक जारी रहेगा.

एक दिन पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने इस समूह के लोगों को ऑस्ट्रेलिया आने में सहयोग देने से इनकार किया था. अब उसी समूह के एक सदस्य की वतन वापसी पर रोक भी लगा दी गई है. बीते सालों में सीरिया के कैंप से कुछ ऑस्ट्रेलियाई लोग निजी कोशिशों से वापस लौटे हैं. 

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जिनेवा में बातचीत से पहले यूक्रेन पर रूस का फिर हमला को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

जिनेवा में बातचीत से पहले यूक्रेन पर रूस का फिर हमला

यूक्रेन का डोनबास में रूसी हमलों का निशाना बनी इमारतें
यूक्रेन के डोनबास इलाके पर रूसी सेना लगातार हमले कर रही हैतस्वीर: Alexander Ermochenko/REUTERS

रूसी सेनाओं ने यूक्रेन पर मंगलवार की रात को भी हवाई हमले किए. दोनों देशों के प्रतिनिधि जिनेवा में शांति बहाली पर बातचीत कर रहे हैं. इस बीच यूक्रेन पर रूसी हमले जारी हैं.

यूक्रेन की वायुसेना ने बुधवार सुबह बताया कि जिनेवा में दूसरे दिन की बातचीत शुरू होने से पहले रूसी सेना ने एक बैलिस्टिक मिसाइल और 126 ड्रोन से यूक्रेन पर हमला किया. वायु सेना की डिफेंस यूनिट ने इनमें से 100 ड्रोन को नाकाम कर दिया. इससे पहले सोमवार की रात को भी रूसी सेना ने यूक्रेन को निशाना बनाया था जिसकी वजह से दसियों हजार लोगों के घर में बिजली की सप्लाई और घरों की हीटिंग बंद हो गई.

जिनेवा में रूस औऱ यूक्रेन के प्रतिनिधि
यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधियों की जिनेवा में बातचीत हो रही है तस्वीर: National Security and Defence Council of Ukraine/REUTERS

जेलेंस्की पर दबाव

रूस और यूक्रेन के अधिकारी जिनेवा में आज लगातार दूसरे दिन बातचीत करेंगे. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति उन पर चार साल से चले आ रहे यूक्रेन युद्धको रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं.

अमेरिका की मध्यस्थता में ये बातचीत स्विट्जरलैंड में हो रही है. डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले दिनों में दो बार कहा कि यु्द्ध रोकने की बातचीत को सफल बनाने के लिए अब यूक्रेन और जेलेंस्की को कदम उठाना है. मंगलवार को जेलेंस्की ने एक अमेरिकी वेबसाइट पर छपे इंटरव्यू में कहा कि शांति योजना की शर्तों में छूट के लिए ट्रंप सार्वजनिक रूप से यूक्रेन से मांग कर रहे हैं लेकिन रूस से नहीं जो "उचित नहीं" है.

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि डोनबास के जिन इलाकों पर अभी यूक्रेन का कब्जा है उन्हें रूस के हवाले करने का प्रस्ताव यूक्रेन के लोग नहीं मानेंगे. 

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गर्मी से बेहाल हो रही है दुनिया की कॉफी को स्किप करें
१८ फ़रवरी २०२६

गर्मी से बेहाल हो रही है दुनिया की कॉफी

ब्राजील में कॉफी के फल तोड़ता एक किसान
जलवायु परिवर्तन के कारण कॉफी उगाने वाले देश ज्यादा गर्मी झेल रहे हैंतस्वीर: Pablo Porciuncula/AFP

दुनिया में कॉफी उगाने वाले प्रमुख इलाके अत्यधिक गर्मी से जूझ रहे हैं. इसका असर कॉफी की उपज पर पड़ रहा है और उसकी कीमतें बढ़ रही हैं. बुधवार, 18 फरवरी को रिसर्चरों ने यह जानकारी दी.

एक विश्लेषण के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि कॉफी उगाने वाले 25 देशों में हर साल अत्यधिक गर्मी के 47 अतिरिक्त दिनों का सामना कर रहे हैं. 2021 से 2025 के बीच दुनिया की लगभग सारी कॉफी इन्हीं देशों में उगाई गई है. 
ब्राजील, वियतनाम, कोलंबिया, इथियोपिया और इंडोनेशिया दुनिया की 75 फीसदी कॉफी की सप्लाई करते हैं. इन देशों ने औसतन रूप से गर्मी के 57 अतिरिक्त दिनों का सामना किया जिसमें तापमान 30 डिग्री सेल्सियस की तय सीमा के ऊपर रही. यह आंकड़े एक स्वतंत्र एजेंसी क्लाइमेट सेंट्रल के हैं जो जलवायु परिवर्तनों के असर के बारे में दुनिया को जागरूक करती है.

कॉफी के फलों को हाथों में लिए एक किसान
बढ़ती गर्मी का असर दुनिया के सारे कॉफी उगाने वाले देश झेल रहे हैं इसका असर कॉफी की क्वालिटी पर भी पड़ रहा है तस्वीर: Douglas Mano/AFP

क्लाइमेट सेंट्रल की वाइस प्रेसिडेंट क्रिस्टीना डाल का कहना है, "जलवायु परिवर्तन हमारी कॉफी तक पहुंच रहा है. कॉफी उगाने वाले लगभग सभी देश अत्यधिक गर्मी वाले ज्यादा दिनों का सामना कर रहे हैं जो कॉफी को नुकसान, उपज में कमी और उनकी क्वालिटी पर असर डाल सकता है. जाहिर है कि इन सबका असर कीमतों पर भी होगा. 
 

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आमिर अंसारी, डीडब्ल्यू हिन्दी, नई दिल्ली
आमिर अंसारी डीडब्ल्यू के दिल्ली स्टूडियो में कार्यरत विदेशी संवाददाता.
निखिल रंजन
निखिल रंजन निखिल रंजन एक दशक से डॉयचे वेले के लिए काम कर रहे हैं और मुख्य रूप से राजनैतिक विषयों पर लिखते हैं.