मुर्दों में जान फूंकने की ख्वाहिश | विज्ञान | DW | 01.07.2016
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विज्ञान

मुर्दों में जान फूंकने की ख्वाहिश

एक ऐसी इमारत जहां -80 डिग्री पर इंसानी शव संभाले जाएंगे. जिस दिन विज्ञान मृत्यु से जीतेगा उस दिन इन शवों में फिर से जान फूंकने की कोशिश की जाएगी.

इंसान हमेशा से मौत से जीतना चाहता है, वह अमर होना चाहता है. अमेरिका में मृत्यु के खिलाफ एक ऐसी ही लड़ाई छेड़ने की तैयार हो रही है. कई सालों की प्लानिंग के बाद अमेरिका के टेक्सस प्रांत में टाइमशिप बिल्डिंग का निर्माण शुरू हो चुका है. खास वास्तु शास्त्र के आधार पर बनाई जा रही इस इमारत में हजारों शवों को बर्फीले तापमान पर जमा कर रखा जाएगा. अगर भविष्य में कभी इंसान मौत के खिलाफ जीत सका तो यहां रखे मुर्दों को फिर से जिंदा करने की कोशिश की जाएगी.

न्यू साइंटिस्ट वेबसाइट ने इस प्रयोग को क्रायोजेनिक्स का केंद्र कहा है. भौतिक विज्ञान में क्रायोजेनिक्स का मतलब होता है कि बेहद निम्न तापमान पर तत्व के उत्पादन और व्यवहार का अध्ययन करना.

इमारत को मशहूर आर्किटेक्ट स्टीफन वैलेंटाइन ने डिजायन किया है. यहां सिर्फ शव ही नहीं रखे जाएंगे बल्कि कोशिकाएं, उत्तक, डीएनए और अंग भी संभाले जाएंगे. वैलेंटाइन के मुताबिक यह पृथ्वी पर ऐसा सबसे बड़ा केंद्र होगा जहां जीवन और क्रायोप्रिजर्वेशन का काम व्यापक स्तर पर होगा. प्रोजेक्ट का मकसद इंसान को ऐसे भविष्य में ले जाना है जहां मौत की जगह चिरयौवन होगा.

जानिये, क्या है मृत्यु का विज्ञान

क्रायोप्रिर्जेवेशन एक ऐसी प्रणाली है जिसके तहत इंसान और पशुओं के शरीर को बेहद निचले तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है. इसमें जैविक सामग्री को माइनस 80 डिग्री से माइनस 196 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर रखा जाता है. क्रायोप्रिजर्वेशन से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में विज्ञान मृत्यु से जीत जाएगा और इन शरीरों में फिर से जान फूंकी जा सकेगी.

हालांकि क्रायोनिक्स की आलोचना भी होती है. आलोचकों मुताबिक यह अमीरों का दिमागी फितूर है.

ओंकार सिंह जनौटी

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