किस उम्र तक बन जाना चाहिए पिता? | विज्ञान | DW | 05.04.2019
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विज्ञान

किस उम्र तक बन जाना चाहिए पिता?

डॉक्टर अकसर सलाह देते हैं कि स्वस्थ संतान के लिए महिलाओं को 35 की उम्र से पहले मां बनना चाहिए. यहां तक कि पहला बच्चा 30 से पहले कर लेना चाहिए. लेकिन पिता की उम्र का क्या हो?

40 से 50 साल की उम्र के बीच महिलाएं मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति में पहुंच जाती हैं. इसके बाद मासिक धर्म बंद हो जाता है और महिलाओं की प्रजनन की क्षमता खत्म हो जाती है. जहां एक उम्र के बाद महिलाएं संतान उत्पन्न नहीं कर सकतीं, वहीं पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता.

अब तक यही माना जाता रहा है कि जितनी ज्यादा उम्र में महिलाएं बच्चा पैदा करती हैं, बच्चे की सेहत को उतना ही ज्यादा खतरा भी होता है और कुछ ऐसी बीमारियां भी हो सकती हैं जो जीवन भर संतान के साथ ही रहती हैं. लेकिन जहां तक पुरुषों की बात है तो कभी इस तरह की कोई बात नहीं की जाती. ताजा शोध बताते हैं कि पिता की उम्र का भी संतान की सेहत पर उतना ही असर पड़ता है, जितना मां की उम्र का. मतलब यह हुआ कि उम्र के बढ़ने के साथ पुरुषों के वीर्य की गुणवत्ता घटती रहती है और ये बीमारियों को भी अंजाम देती है.

बायोलॉजिकल साइकिएट्री नाम की विज्ञान पत्रिका में छपे एक शोध के अनुसार पिता की उम्र ज्यादा होने का सीधा संबंध स्किजोफ्रीनिया के साथ देखा गया है. स्किजोफ्रीनिया एक ऐसी मानसिक बीमारी है जिसमें व्यक्ति का बर्ताव असामान्य हो जाता है और तार्किक रूप से चीजों को सोचने या समझने की क्षमता नहीं बचती. शोध करने वाले चाइना मेडिकल यूनिवर्सिटी के शी हेंग वांग का इस बारे में कहना है, "पिता की उम्र में हर दस साल की बढ़ोतरी से संतान में स्किजोफ्रीनिया का खतरा 30 फीसदी और बढ़ जाता है."

शोध के अनुसार पुरुषों की उम्र 35 से ज्यादा होने से संतान को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. मिसाल के तौर पर 40 की उम्र से ज्यादा वालों की संतान को 30 की उम्र से कम वालों की तुलना में ऑटिज्म का खतरा 5.75 फीसदी ज्यादा दर्ज किया गया. इसके अलावा इन संतानों में एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर, साइकॉसिस, बायपोलर डिसऑर्डर, खुदकुशी की कोशिश और नशे की लत जैसे खतरे भी दर्ज किए गए.

इसके अलावा स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक सर्वेक्षण में 2007 से 2016 के बीच पैदा हुए चार करोड़ से ज्यादा बच्चों का आंकड़ा जमा किया गया. इसमें देखा गया कि ज्यादा उम्र के पिता की संतान को कई मामलों में जन्म के वक्त आईसीयू में रखना पड़ा या फिर उनका वक्त से काफी पहले ही जन्म हो गया और ऐसे बच्चों का वजन भी 35 साल से कम उम्र के पिताओं की संतानों की तुलना में कम रहा. इतना ही नहीं इससे महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान मधुमेह का खतरा भी ज्यादा रहा. खास कर 55 साल की उम्र से ज्यादा वाले पुरुषों के मामलों में महिलाओं को जेस्टेशनल डायबटीज का खतरा 34 फीसदी ज्यादा देखा गया.

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर माइकल आइजनबर्ग का कहना है, "हम जानते हैं कि जैसे जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है, बच्चे के लिए खतरा भी बढ़ता रहता है लेकिन ये शोध हमें ये प्रमाण दे रहा है कि पिता की उम्र का भी असर होता है." कुल मिला कर मां और पिता दोनों की उम्र 35 से कम हो, तो बच्चों की सेहत बेहतर रहती है.

वैज्ञानिक पहलुओं के अलावा बच्चों पर माता पिता की उम्र के सामाजिक असर पर भी अध्ययन होते रहे हैं. माक्स प्लांक इंस्टीट्यूट फॉर डेमोग्राफिक रिसर्च के मीको मिर्सकिला ने अपनी स्टडी में पाया है कि मां की उम्र जितनी ज्यादा होती है, संतान की शिक्षा का स्तर भी उतना ही ज्यादा होता है. बहुत कम उम्र में शादी हो जाने के कारण जो महिलाएं खुद ही उच्च शिक्षा हासिल नहीं कर पाती हैं, वे खुद को और अपने परिवार के हकों को ले कर बहुत जागरूक नहीं होती हैं और ऐसे में उनके बच्चे भी बहुत ज्यादा शिक्षित नहीं हो पाते हैं.

सैम बेकर/ईशा भाटिया

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