अब सेल्फी ना भेजने वाले शिक्षकों का नहीं कटेगा वेतन | भारत | DW | 24.07.2019
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भारत

अब सेल्फी ना भेजने वाले शिक्षकों का नहीं कटेगा वेतन

कैसा हो अगर हर दिन आपको दफ्तर पहुंचते ही अपने बॉस को कंप्यूटर के सामने बैठ कर सेल्फी भेजनी पड़े? उत्तर प्रदेश के स्कूलों में हाजिरी लगाने के लिए ऐसा ही कुछ चल रहा था.

बच्चों की तस्वीरों को ले कर दुनिया के तमाम देशों में नियम कानून हैं. अकसर बच्चों से जुड़ी किसी खबर के साथ भी उनकी तस्वीर नहीं छापी जाती है या फिर चेहरे को छिपा दिया जाता है. भारत में टीवी स्क्रीन पर बलात्कार पीड़ित बच्ची या अन्य पीड़ित का चेहरा दिखाने की अनुमति नहीं है लेकिन इस पर अमल नहीं होता. करीना कपूर खान जैसे सेलिब्रिटियों के बच्चों की तस्वीर लगभग हर दिन अखबारों में छपती है. साथ ही सोशल मीडिया पर भी बच्चों की तस्वीरें खूब पोस्ट की जाती हैं.

जर्मनी में अगर आप किसी स्कूल में जा कर तस्वीर लेते हैं तो आपको हर बच्चे के माता पिता से अनुमति लेनी होती है. डाटा सिक्युरिटी को ले कर लोग यहां बेहद सतर्क हैं. ऐसे में जब बात बच्चों की आती है, तो इसे और भी संजीदगी से लिया जाता है. लेकिन भारत में डिजिटल क्रांति का अलग ही रूप दिखता है. उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जब शिक्षकों के टाइम पर ना आने की बात उठी तो सरकारी तंत्र ने इसका यह उपाय निकाला कि शिक्षक रोज सुबह असेंबली के दौरान बच्चों के साथ सेल्फी ले और उसे जिम्मेदार अधिकारी को भेज दे. इस तरीके से शायद शिक्षकों ने स्कूल में वक्त से आना शुरू कर भी दिया हो लेकिन बच्चों के डाटा और निजता के अधिकार के उल्लंघन की ओर किसी का ध्यान नहीं गया है.

बहरहाल उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में सुबह की प्रार्थना के दौरान सेल्फी खींचकर ना भेजने वाले शिक्षकों का वेतन काटने का फैसला राज्य सरकार ने वापस ले लिया है. प्रदेश की बेसिक शिक्षा मंत्री अनुपमा जायसवाल ने मंगलवार को विधानसभा परिषद में शून्यकाल के दौरान कार्यस्थगन की एक सूचना पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि सेल्फी ना भेजने वाले शिक्षकों का उस दिन का वेतन काटने का आदेश वापस ले लिया गया है.

शिक्षक दल के नेता ओम प्रकाश शर्मा, हेम सिंह पुंडीर और अन्य सदस्यों ने सूबे के विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों द्वारा गत 20 जून को पत्र के माध्यम से सरकारी प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को रोज सुबह पाठशाला में प्रार्थना के दौरान सेल्फी खींचकर जिम्मेदार अधिकारी को भेजने के आदेश को नियम विरुद्ध करार देते हुए कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया था. पुंडीर और शर्मा ने कहा कि सेल्फी खींचकर भेजने की व्यवस्था में प्रोत्साहन के साथ दंड भी लगा दिया गया था, जो उचित नहीं है.

अनुपमा जायसवाल ने कहा कि गांवों के लोग शिक्षकों के समय पर विद्यालय न आने की शिकायत करते हैं, इसीलिए स्कूलों में सेल्फी की व्यवस्था लागू की गई है, "सरकार शिक्षकों के साथ है और उनका किसी भी सूरत में अपमान नहीं करना चाहती." प्रदेश सरकार ने बीते माह जारी आदेश में प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए सुबह प्रार्थना के दौरान बच्चों के साथ सेल्फी खींचकर भेजना अनिवार्य कर दिया था. ऐसा न करने वाले शिक्षकों का उस दिन का वेतन काटने को भी कहा गया था.

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