तालिबान सरकार के मुखर आलोचक प्रोफेसर रिहा | दुनिया | DW | 12.01.2022

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दुनिया

तालिबान सरकार के मुखर आलोचक प्रोफेसर रिहा

मशहूर अफगान प्रोफेसर और मौजूदा तालिबान सरकार के मुखर आलोचक फैजुल्लाह जलाल के परिवार ने सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई की घोषणा की है. तालिबान ने शनिवार को काबुल में जलाल को "लोगों को भड़काने" के आरोप में गिरफ्तार किया था.

जाने-माने प्रोफेसर फैजुल्लाह जलाल के परिवार वालों ने सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई की घोषणा की. प्रोफेसर जलाल की बेटी हसीना जलाल ने अपने पिता की रिहाई के लिए सोशल मीडिया पर एक अभियान शुरू किया था. वे वॉशिंगटन में जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय की फेलो हैं.

प्रोफेसर जलाल को तालिबान ने शनिवार को काबुल में कथित तौर पर ट्विटर पर भड़काऊ बयान देने के आरोप में हिरासत में लिया था. उसके बाद उन्हें किसी अज्ञात जगह पर रखा गया था. हसीना ने ट्वीट कर लिखा, "निराधार आरोपों पर चार दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद आखिरकार प्रोफेसर जलाल रिहा हो गए हैं."

प्रोफेसर को क्यों गिरफ्तार किया गया था?

प्रोफेसर जलाल की पत्नी मसूदा जलाल ने शनिवार को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि आतंकवादी समूह तालिबान ने उनके पति का अपहरण कर लिया और "उन्हें किसी अज्ञात स्थान पर ले गए." तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने एक ट्वीट में आरोप लगाया था कि फैजुल्लाह जलाल सोशल मीडिया पर बयान देकर लोगों को भड़काने का काम कर रहे हैं. मुजाहिद ने कहा था, "वे लोगों को मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और लोगों की गरिमा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं." मुजाहिद ने अपने बयान में आगे कहा, "उन्हें इसलिए गिरफ्तार किया गया ताकि अन्य लोग इस तरह के निराधार बयान न दें जिससे दूसरों की प्रतिष्ठा प्रभावित हो."

दूसरी ओर प्रोफेसर के परिवार ने कहा कि तालिबान ने जिस ट्विटर अकाउंट का हवाला दिया है वह उनका नहीं बल्कि एक फर्जी अकाउंट था. हसीना जलाल ने कहा कि उन्होंने 5 जनवरी को ट्विटर से संपर्क किया और उन्हें बताया कि उनके पिता ट्विटर पर कभी सक्रिय नहीं रहे हैं.

एक मुखर आलोचक

प्रोफेसर जलाल की गिरफ्तारी की खबर फैलने के कुछ ही समय बाद अलग-अलग हलकों से समर्थन की झड़ी लग गई. लोगों ने प्रोफेसर की तत्काल रिहाई की मांग के साथ तालिबान की कार्रवाई निंदा भी की.

प्रोफेसर जलाल अफगानिस्तान के नेतृत्व के मुखर आलोचक रहे हैं. उन्होंने अतीत में पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अशरफ गनी की नीतियों की भी आलोचना की थी. वे खुलकर अपने विचार व्यक्त करते आए हैं. पिछले साल नवंबर में एक लाइव टीवी बहस के दौरान प्रोफेसर जलाल तालिबान के प्रवक्ता मोहम्मद नईम के साथ भिड़ गए थे. उन्होंने नईम को "बछड़ा" कहते हुए तालिबान की नीतियों की भी आलोचना की थी. अफगानिस्तान में इसे बेहद असभ्य माना जाता है. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. प्रोफेसर जलाल के इस बयान के बाद चिंता जताई जा रही थी कि तालिबान जवाबी कार्रवाई करेगा.

हसीना ने अपने पिता की गिरफ्तारी के बाद कहा था कि तालिबान सोशल मीडिया पोस्ट का इस्तेमाल देश के अंदर मजबूत आवाजों को दबाने के बहाने के रूप में कर रहा है. हसीना ने कहा कि तालिबान की वापसी के बाद उनके पिता ने अफगानिस्तान छोड़ने से इनकार कर दिया था और चुपचाप काबुल में रह रहे थे, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्य यूरोप चले गए थे. प्रोफेसर जलाल लंबे समय से काबुल विश्वविद्यालय में कानून और राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हैं. उन्होंने पिछले दशकों में अफगानिस्तान के नेताओं के आलोचक के रूप में ख्याति अर्जित की है.

एए/सीके (एपी, एएफपी)

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