सीरिया चुनाव: पश्चिमी देशों ने कहा न वह ′स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष′ | दुनिया | DW | 26.05.2021
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दुनिया

सीरिया चुनाव: पश्चिमी देशों ने कहा न वह 'स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष'

अमेरिका, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों ने सीरिया के "छलपूर्ण चुनाव" को मौजूदा राष्ट्रपति बशर अल असद की तरफ से रचा एक दिखावा बताया है.

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने बुधवार को सीरिया के चुनाव को न तो "स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष" बताते हुए एक बयान जारी किया है. पश्चिमी देशों का दावा है कि चुनाव मौजूदा राष्ट्रपति बशर अल असद द्वारा धोखाधड़ी है और चुनाव में उनकी जीत पक्की है. मंगलवार को जारी संयुक्त बयान में पश्चिमी देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा, "हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2254 में निर्धारित ढांचे के बाहर चुनाव कराने के असद सरकार के फैसले की निंदा करते हैं. हम नागरिक समाज संगठनों, सीरियाई विपक्षी दल और सभी सीरियाई लोगों की आवाज का समर्थन करते हैं. विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया को नाजायज बताते हुए इसकी निंदा की है."

इन देशों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर "उच्च स्तर की पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए जरूरी है कि ये चुनाव संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में हों." संयुक्त बयान में कहा गया है कि सीरिया के बाहर रहने वाले सीरियाई शरणार्थियों समेत सभी लोगों को मतदान प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए था. 

अभी सीरियाई कानून के तहत विदेश में रहने वाले सिर्फ वही सीरियाई मतदान कर सकते हैं जो आधिकारिक मुहर लगे स्वीकृत सीरियाई पासपोर्ट पर देश से बाहर गए हैं. इसके तहत गृहयुद्ध के कारण देश छोड़कर भागे सीरियाई लोगों को वोट देने का अधिकार नहीं है. संयुक्त बयान में कहा गया, "इन तत्वों के बिना, ये छलपूर्ण चुनाव राजनीतिक समाधान की दिशा में प्रगति का प्रतिनिधित्व नहीं करते. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मानवाधिकारों के हनन को खत्म करने के असद शासन के प्रयासों को बिना शर्त खारिज करने का आह्वान करते हैं."

चुनाव में अन्य उम्मीदवार कौन हैं?

राष्ट्रपति बशर अल असद के अलावा, अरब ऑर्गनाइजेशन फॉर ह्यूमन राइट्स के प्रमुख मुहम्मद अहमद मैरी और पूर्व मंत्री अब्दुल्ला सलौम अब्दुल्ला राष्ट्रपति पद के लिए मैदान में हैं. राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को जन्म से सीरियाई नागरिक होना चाहिए और कम से कम 40 साल का होना चाहिए. उम्मीदवारों को दोहरी नागरिकता के साथ-साथ विदेशी पार्टनर रखने की अनुमति नहीं है. एक शर्त यह भी है कि उम्मीदवार चुनाव से पहले तक दस साल सीरिया में रहा हो.

सीरियाई विपक्षी समूहों ने चुनाव को अवैध बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है. विपक्ष की सीरियाई संवैधानिक समिति के नेता हादी अल-बहारा ने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए को बताया कि चुनाव अवैध हैं. उन्होंने कहा, "वर्तमान में, कोई भी सुरक्षित और तटस्थ वातावरण नहीं है जो सभी सीरियाई लोगों को मतदान के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाता हो." तुर्की में एक अन्य सीरियाई विपक्षी समूह द सीरियन नेशनल काउंसिल ने भी चुनाव को खारिज कर दिया है. समूह ने कहा, "सीरिया में एकमात्र स्वीकार्य चुनाव वह होगा जिसमें युद्ध अपराधी बशर अल असद नहीं होंगे."

सीरिया 2011 के बाद से गृहयुद्ध में उलझा हुआ है. लोकतंत्र समर्थक समूहों के अरब वसंत के बाद से असद की सेना जेहादी संगठनों से लड़ाई लड़ रही है. शुरू में तो विद्रोही समूहों ने होम्स शहर और अलेप्पो जैसे बड़े क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था. लेकिन रूसी सेना की मदद से असद की सेना ने अधिकांश इलाके पर फिर से कब्जा जमा लिया. हिंसा और लड़ाई में अब तक हजारों सीरियाई मारे गए हैं, जबकि दसियों लाख विस्थापित हुए हैं. 

एए/वीके (रॉयटर्स, एएफपी, डीपीए)

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