संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को अधिकारिक भाषा बनाने पर हंगामा | दुनिया | DW | 03.01.2018
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दुनिया

संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को अधिकारिक भाषा बनाने पर हंगामा

लोकसभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और कांग्रेस नेता शशि थरूर के बीच तीखी नोकझोंक हुई. शशि थरूर ने हिन्दी को यूएन में अधिकारिक भाषा बनाने की जरूरत पर सवाल उठाए, वहीं स्वराज ने अपने जवाब में उन्हें "इग्नोरेंट" कहा.

सुषमा स्वराज ने एक सवाल के जवाब में कहा, "यह अक्सर पूछा जाता है कि संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी एक अधिकारिक भाषा क्यों नहीं है. आज, मैं सदन से कहना चाहूंगी कि इसके लिए सबसे बड़ी समस्या नियम है." स्वराज ने बताया कि नियम के अनुसार, "संगठन के 193 सदस्य देशों के दो तिहाई सदस्यों यानि 129 देशों को हिन्दी को अधिकारिक भाषा बनाने के पक्ष में वोट करना होगा और इसकी प्रक्रिया के लिए वित्तीय लागत भी साझा करनी होगी."

उन्होंने कहा, "इसके संबंध में मतदान के अलावा, देशों के ऊपर राशि का अतिरिक्त भार भी है. हमें समर्थन करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर देश इस प्रक्रिया से दूर भागते हैं. हम इस पर काम कर रहे हैं. हम फिजी, मॉरिशस, सुरीनाम जैसे देशों से समर्थन लेने की कोशिश कर रहे हैं, जहां भारतीय मूल के लोग रहते हैं." उन्होंने आगे कहा, "जब हमें इस तरह का समर्थन मिलेगा और वे लोग वित्तीय बोझ को भी सहने के लिए तैयार होंगे, यह अधिकारिक भाषा बन जाएगी." स्वराज ने कहा कि सरकार संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी को अधिकारिक भाषा बनाने के लिए सरकार किसी भी तरह की राशि खर्च करने के लिए तैयार है लेकिन राशि खर्च करने से उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होगी.

सुषमा स्वराज ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि उन्होंने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संयुक्त राष्ट्र में हिन्दी में भाषण दिया था. स्वराज ने कहा, "जब हमारे यहां विदेशी मेहमान आते हैं, और अगर वे अंग्रेजी में बोलते हैं तो हम भी अंग्रेजी में बोलते हैं. अगर वे अपनी भाषा में बोलते हैं, तो हम हिन्दी में बोलते हैं. जहां तक भाषा की गरिमा का सवाल है, विदेश मंत्रालय ने अब तक हिन्दी में ज्यादा काम नहीं किया है."

संयुक्त राष्ट्र में काम कर चुके और संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए वर्ष 2006 में हुए चुनाव में दूसरा स्थान प्राप्त करने वाले थरूर ने हिन्दी को आगे बढ़ाने पर सवाल उठाए और कहा कि हिन्दी भारत की राष्ट्रीय भाषा भी नहीं है. उन्होंने कहा, "हिन्दी राष्ट्रीय भाषा नहीं हैं, यह अधिकारिक भाषा है. हिन्दी को आगे बढ़ाने पर एक महत्वपूर्ण प्रश्न उभरता है. हमें संयुक्त राष्ट्र में आधिकारिक भाषा की क्या जरूरत है? अरबी, हिन्दी से ज्यादा नहीं बोली जाती है, लेकिन यह 22 देशों में बोली जाती है. हिन्दी केवल एक देश की आधिकारिक भाषा के तौर पर प्रयोग की जाती है."

थरूर ने आगे कहा, "सवाल यह है कि इससे क्या प्राप्त होगा. अगर इसकी जरूरत है तो हमारे पास प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री हैं, जो हिन्दी में बोलना पसंद करते हैं. वे ऐसा करते हैं और उनके भाषण को अनुवाद करने के लिए राशि अदा कर सकते हैं. आने वाले समय में हो सकता है कि भविष्य के प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री तमिलनाडु से हों." उन्होंने कहा, "सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी है. मैं हिन्दी भाषी क्षेत्र के लोगों के गर्व को समझ सकता हूं, लेकिन इस देश के लोग जो हिन्दी नहीं बोलते हैं, वे भी भारतीय होने पर गर्व महसूस करते हैं."

थरूर के बयान पर सत्ता पक्ष ने विरोध किया. सुषमा स्वराज ने थरूर के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हिन्दी को कई देशों में भारतीय प्रवासी भी बोलते हैं. यह कहना कि हिन्दी केवल भारत में बोली जाती है, यह आपकी अज्ञानता है." उन्होंने अपने लिखित जवाब में कहा कि भारत हिन्दी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने के लिए 129 देशों के संपर्क में है.

आईएएनएस/आईबी

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