आतंकवादियों ने शाहबाज के साथ क्या-क्या किया! | दुनिया | DW | 17.05.2016
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दुनिया

आतंकवादियों ने शाहबाज के साथ क्या-क्या किया!

जब आपको पता न हो कि शाम तक आप जिंदा रहेंगे या नहीं, तब आपका दिन कैसे कटेगा? शाहबाज तासीर ने इसी तरह पांच साल काटे. रोज सुबह से शाम एक मौत मरने जैसा था. और इस पर आतंकियों के ढाए जुल्म, जो उन्होंने अब बताए हैं.

पाकिस्तानी पंजाब के पूर्व गवर्नर के बेटे शाहबाज तासीर पांच साल आतंकवादियों की कैद में रहे. दो महीने पहले छूटे तासीर ने बताया है कि उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ. उन्हें कोड़े मारे गए, उनका मुंह सी दिया गया और उन्हें गोली भी मारी गई.

अपने ही बॉडीगार्ड की गोलियों का शिकार हुए शाहबाज तासीर के बेटे सलमान तासीर को आतंकियों ने 2011 में लाहौर से अगवा कर लिया था. वह मार्च में घर लौटे. अब शुक्रवार को पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बेटे हैदर गिलानी भी तीन साल आतंकियों की कैद में रहने के बाद घर लौटे तो दोनों की मुलाकात हुई. उसके बाद सलमान तासीर ने बताया कि उनके साथ क्या-क्या हुआ.

मार्च में घर लौटने के बाद शाहबाज ने पहली बार मीडिया से बात की. उन्होंने बताया कि आतंकवादियों ने उनके नाखून तक खींच लिए थे लेकिन उन्होंने कभी यह उम्मीद नहीं छोड़ी कि वह एक दिन घर लौटेंगे.

Shahbaz Taseer

"उन्होंने मुझे कोड़े मारे, मुंह सी दिया और गोली भी मारी."

किसी हॉलीवुड फिल्म जैसा

बीबीसी उर्दू सर्विस और सीएनएन को दिए इंटरव्यू में तासीर ने बताया कि उन्हें पाकिस्तान के कबायली इलाकों और अफगानिस्तान में रखा गया था. उन्हें अगवा करने वाले आतंकी उज्बेकिस्तान के इस्लामिक आंदोलन से प्रभावित थे. यह संगठन भी अल कायदा से जुड़ा रहा है और 2014 में कराची एयरपोर्ट पर हमला करने के लिए जिम्मेदार है.

तासीर ने बताया, "मुझे करीब एक साल तक यातनाएं दी गईं. ये यातनाएं हॉलीवुड की किसी फिल्म में दिखाए जाने वाली यातनाओं जैसी थीं जिनमें परिवारों और सरकारों पर दबाव डालने के लिए किसी को प्रताड़ित किया जाता है. मसलन, उन्होंने मेरे नाखून खींच-खीच कर उतारे. पहले तो उन्होंने मुझे कोड़े मारे. वे मेरी नंगी पीठ को ब्लेड से काटते और फिर उस पर नमक लगा देते. उन्होंने मेरा मुंह सील दिया और एक हफ्ते तक मुझे भूखा रखा. मेरी टांग में गोली मारी. पीठ से मांस काट दिया. सात दिन तक मेरा खून बहता रहा और मुझे कोई मदद नहीं दी गई."

अपनी उम्र के तीसरे दशक में अपने पिता को आतंकियों के हाथों खोने वाले तासीर इन हालात में भी बचे रहने को अपनी निजी जीत बताते हैं. उन्होंने कहा कि धैर्य और उम्मीद ने ही उन्हें बचाए रखा. तासीर ने कहा, "लोग, दोस्त, घरवाले सब कहते हैं कि तुम बहुत बहादुर हो. तुम वापस आ गए. कमाल कर दिया. लेकिन मैं अपने बारे में यह सब नहीं कह सकता. मैं तो बस इतना कह सकता हूं कि मैंने धीरज रखना सीखा."

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