खुल गया स्टोनहेंज की मेगालिथ चट्टानों का रहस्य | दुनिया | DW | 31.07.2020
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दुनिया

खुल गया स्टोनहेंज की मेगालिथ चट्टानों का रहस्य

वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है कि स्टोनहेंज की विशालकाय चट्टानें कहां से आई थीं. मेगालिथ कही जाने वाली इन चट्टानों को लेकर सदियों से रहस्य बना हुआ था. यह इंग्लैंड के विल्टशर में स्थित एक विश्व प्रसिद्ध स्मारक है.

इंग्लैंड के इस विश्वप्रसिद्ध स्मारक का एक सैंपल कई दशकों से अमेरिका में रखा है. इसी सैंपल की जियो केमिकल टेस्टिंग से रिसर्चरों ने पता लगाया है कि स्टोनहेंज के 52 में से 50 एक ही जगह से आए हैं. ग्रे रंग के बलुआ पत्थर से बनी इन मोनोलिथ चट्टानों का उद्गम इस स्मारक स्थल से करीब 25 किलोमीटर दूर वेस्ट वुड्स नाम की जगह पर है. इस जगह का प्रागैतिहासिक काल से संबंध रहा है, जहां नियोविथिक काल की एक विशाल कब्रगाह हुआ करती थी.

दक्षिणी इंग्लैंड के स्टोनहेंज को नियोलिथिक अजूबा माना जाता है क्योंकि इसे लेकर कई सवाल अनुत्तरित हैं. जैसे कि इतिहासकारों, पुरातत्विदों से लेकर आम जन में इस बात पर हैरानी रही है कि ये कैसे बना होगा. इसे बनाने का मकसद क्या रहा होगा? और ये विशालकाय चट्टानें आई कहां से होगीं? अब जाकर कम से कम इस आखिरी सवाल का जवाब मिल गया है.

कई लोग हर साल दिसंबर में साल की सबसे लंबी रात के बाद स्टोनहेंज पर सूर्योदय देखने की परंपरा निभाते हैं.

कई लोग हर साल दिसंबर में साल की सबसे लंबी रात के बाद स्टोनहेंज पर सूर्योदय देखने की परंपरा निभाते हैं.

इस स्टडी से संबंधित पेपर साइंस एडवांसेज नाम के जर्नल में छपा है. इसके मुख्य लेखक डेविड नाश ब्राइटन यूनिवर्सिटी में फिजिकल जियोग्राफी के प्रोफेसर हैं. उनकी टीम ने इन 30 फीट ऊंची और करीब 30 मीट्रिक टन भारी चट्टानों की जांच के लिए एक नया तरीका लगाया. पहले उन्होंने पोर्टेबल एक्स-रे का इस्तेमाल कर चट्टान की रासायनिक संरचना समझी. इससे पता चला कि यह 99 फीसदी सिलिका की बनी है और बाकी कई छोटे छोटे तत्वों से भी. नाश ने बताया "इससे हमें समझ आया कि इनमें से ज्यादातर का रसायक एक सा ही है और फिर हम उसी एक मुख्य स्रोत की तलाश में लग गए."

इसके बाद टीम ने इसके अन्य सैंपलों की और बारीकी से जांच करने के लिए विशाल स्पेक्ट्रोमीट्री उपकरण का इस्तेमाल किया. इससे उन्हें चट्टाने की संरचना के बारे में और जानकारी मिली जिसकी उन्होंने 20 संभावित स्थलों से तुलना की और वेस्ट वुड्स को इसके सबसे करीब पाया. इससे पहले 17वीं सदी के एक प्राकृतिक दार्शनिक जॉन ऑबरी ने ही इसे "ओवरटोन वुड" से जोड़ा था जो कि शायद वेस्ट वुड्स का पुराना नाम रहा हो. 

माना जाता है कि यहां स्थित छोटे "ब्लूस्टोन्स" वेल्स से लाए गए थे. नई स्टडी बताती है कि ये बड़ी चट्टानें भी उसी समय यहां लाई गई थीं. इन भारी बोल्डर्स को उस दौर में यहां तक कैसे लाया गया होगा, यह रहस्य खुलना अभी भी बाकी है. नाश की टीम अब भी उस रास्ते की खोज में लगी है जिसका इस्तेमाल कर ये चट्टानें यहां लाई गई होंगी.

आरपी/आईबी (एएफपी)

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