सूखे और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे किसानों को राहत देती तकनीक | दुनिया | DW | 10.02.2020
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दुनिया

सूखे और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे किसानों को राहत देती तकनीक

जिंबाब्वे के ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट और बिजली नहीं है, वहां एसएमएस सेवा दी जा रही है ताकि किसान अपनी फसल को कठोर मौसम और कीटों से बचा पाए.

पश्चिमी जिंबाब्वे के ग्रामीण इलाके में जहां अलकतरे की सड़क मौजूद नहीं है, जफत नगवें हर मौसम में इस बात को लेकर चिंतित रहते थे कि सूखा और कीट नियंत्रण के बारे में सलाह देने वाले उन तक कैसे पहुंचेंगे. नगवें का खेत उत्तरी बुलावायो से 24 किलोमीटर दूर स्थित है. खेत इतने सुदूर इलाके में स्थित है कि साल, दो साल में शायद ही वहां आने वाले किसी कृषि अधिकारी से उनकी मुलाकात हो पाती है. नगवें जैसे छोटे किसानों की मदद के लिए स्थानीय चैरिटेबल संस्था कृषि अधिकारी को भेजते हैं.

थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन से बातचीत में नगवें बताते हैं, "हमारे लिए विशेषज्ञों की सलाह लेना हमेशा से मुश्किल रहा है. यहां पर सड़कों की सुविधा ना के बराबर है और आपको बाहर जाने के लिए कार के सहारे जोखिम लेकर जाना होता है."

नगवें अपने खेत में मक्का, टमाटर और गोभी की फसल की तैयारी कर रहे हैं. पिछले साल टर्निंग मेटाबेलेलैंड ग्रीन (टीएमजी) के अधिकारी नगवें के खेत तक पहुंचे और उन्हें सैटेलाइट द्वारा इकट्ठा की गई जारी जानकारी के इस्तेमाल के बारे में बताया. अधिकारियों ने सैटेलाइट से इकट्ठा किए गए डाटा को किसान के फोन तक पहुंचाने का तरीका समझाया. जिंबाब्वे कृषि क्षेत्र के लिए सैटेलाइट आधारित तकनीक को अपनाने में सुस्त रहा है, लेकिन कृषि जानकारों का कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल से देश के किसानों को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के अनुकूल बनाने में मदद मिल रही है. कई किसान अब भी मौसम की पारंपरिक भविष्यवाणी प्रणालियों पर भरोसा करते हैं और ग्राउंड एक्सटेंशन अधिकारियों द्वारा कभी-कभार मिलने वाली सलाह पर निर्भर रहते हैं.

Zimbabwe Dürre Trockenheit (picture-alliance/dpa/A. Ufumeli)

जिंबाब्वे में किसान सूखे से परेशान हैं.

टीएमजी के साथ काम करने वाले कृषिविज्ञानी लजाजी म्लिलो कहते हैं कि मौसम विभाग द्वारा दिए सामान्य पूर्वानुमानों के मुकाबले टीएमजी का डाटा ज्यादा अधिक सटीक होता है. साथ ही वह कहते हैं कि मोबाइल फोन तकनीक की मदद से वह कम से कम समय में ऐसे किसानों तक पहुंच सकते हैं जहां खुद पहुंचना मुश्किल है. म्लिलो ने नगवें को बताया कि कैसे अधिकारी उनके 67 एकड़ खेत को गूगल मैप के जरिए देख सकते हैं और साथ ही सैटेलाइट डाटा को जोड़कर मौसम के मिजाज से लेकर फसलों के स्वास्थ्य तक को जान सकते हैं. म्लिलो ने उन्हें समझाते हुए कहा, "मैं अपने दफ्तर से ही आपके खेत पर होने वाली गतिविधि की निगरानी कर सकता हूं. हमें आपकी फसल की प्रगति की जांच के लिए यहां आने की जरूरत नहीं है."

म्लिलो कहते हैं कि कम बारिश वाले क्षेत्र में विशेषज्ञ किसानों को फसल के बारे में सही सलाह दे सकते हैं. उनके मुताबिक, "विशेषज्ञ किसान को बीज लगाने और तकनीक के इस्तेमाल के बारे में सलाह दे सकते हैं." जिंबाब्वे के ग्रामीण इलाकों में बहुत सारे किसानों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है और कई किसानों के पास बिजली कनेक्शन भी नहीं है, ऐसे में टीएमजी उनके साथ एसएमएस के जरिए संवाद करता है."

इसके फायदे ऐसे हैं कि टीएमजी किसानों को उनके इलाकों में होने वाले कीट के हमलों या फिर मौसम के बदलाव को लेकर एसएमएस भी भेज सकता है. म्लिलो कहते हैं, "अगर किसी के पास उपयुक्त जानकारी और आधुनिक ज्ञान है तो खेती करना उतना कठिन नहीं है जितना कि हम सोचते हैं." म्लिलो के मुताबिक पिछले साल प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद से दो हजार के करीब छोटे किसान इस अभियान से जुड़ चुके हैं.

"किसानों को चाहिए बारिश"

विशेषज्ञों का कहना है जिंबाब्वे की 80 फीसदी ग्रामीण आबादी जीविका के लिए बारिश आधारित कृषि पर निर्भर है. कठोर मौसम और जलवायु परिवर्तन उन्हें अत्यधिक असुरक्षित कर रहे हैं. जैसे-जैसे दक्षिण अफ्रीका में सूखा लंबा और कठोर होता जा रहा है, जिंबाब्वे अपने परेशान किसानों की मदद करने के लिए नए-नए तरीकों की तलाश कर रहा है. जिंबाब्वे के संघर्ष करते किसानों के लिए सैटेलाइट डाटा और अन्य आधुनिक तकनीकों से उम्मीद जगी है कि वह खराब फसल के चक्र को तोड़ पाएंगे. नगवें कहते हैं वह किसी भी तकनीक का इस्तेमाल करने को तैयार हैं. वह कहते हैं, "हमें सिर्फ बारिश की जरूरत है लेकिन हम निश्चित रूप से किसी भी चीज की सराहना करेंगे जो हमें राहत देगी."

एए/आरपी (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन) 

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