भारत-पाक गृह मंत्रियों ने ढंग से हाथ तक नहीं मिलाया | दुनिया | DW | 04.08.2016
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दुनिया

भारत-पाक गृह मंत्रियों ने ढंग से हाथ तक नहीं मिलाया

सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक के लिए भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस्लामाबाद में हैं. और वहां पहले ही मौके पर दिख गया कि दोनों देशों के संबंध किस हद पर हैं.

इस्लामाबाद में जब भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह और पाकिस्तानी गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान आमने-सामने आए तो दोनों देशों की रिश्तों में मौजूदा तल्खी साफ दिख पड़ी. दोनों नेताओं ने ढंग से हाथ तक नहीं मिलाया. भारतीय गृह मंत्री जब सार्क देशों के गृह मंत्रियों के सम्मेलन के आयोजन स्थल सेरेना होटल पहुंचे तो खान गेट पर खड़े मेहमानों का स्वागत कर रहे थे. दोनों नेताओं का सामना हुआ लेकिन जिस तरह से दोनों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया, उसमें कोई गर्मजोशी नहीं थी. बस हाथ छू भर दिए. इसे ढंग से औपचारिक हाथ मिलाना तक नहीं कहा जा सकता.

भारतीय पत्रकार इस पल को कैमरे में कैद नहीं कर पाए क्योंकि उन्हें जगह से कुछ दूर रोक लिया गया था. पाकिस्तानी अधिकारी भारतीय मीडिया को दूर ही रोक कर खड़े हो गए. इस बात पर नाराजगी भी जाहिर की गई. एक भारतीय अधिकारी की पाकिस्तानी अधिकारी से बहस तक हो गई. पिछले एक महीने से कश्मीर में जारी हिंसा का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ा है और अधिकारियों ने भी माना कि यह तनाव सार्क सम्मेलन में साफ तौर पर नजर आ रहा है. सम्मेलन शुरू होने से एक दिन पहले ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इस तनाव को और बढ़ा दिया. उन्होंने कश्मीर मुद्दे को उठाया और कहा, "आज कश्मीर आजादी का एक नया आंदोलन देख रहा है." नवाज शरीफ ने अपने कूटनीतिज्ञों से कहा है कि दुनिया भर में यह संदेश पहुंचाएं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला नहीं है. हाल के दिनों में शरीफ ने कई तीखे बयान दिए हैं. वह यहां तक कह चुके हैं कि कश्मीर एक दिन पाकिस्तान बन जाएगा. भारत की ओर से इसका करारा जवाब दिया गया था. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था, "उनका यह सपना तो अनंतकाल तक पूरा नहीं हो सकता."

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गृह मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा पहले से ही तनावग्रस्त रही है. आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के संस्थापक और हिजबुल मुजाहिदीन चीफ हाफिज सईद ने राजनाथ सिंह की यात्रा के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया है. इस वजह से सेरेना होटल को जाने वाली सड़कों पर भारी सुरक्षाबल तैनात हैं. इस भारी तैनाती के बावजूद लगभग 100 लोग होटल के सामने जमा थे और वे भारत विरोधी नारे लगा रहे थे.

नई दिल्ली से इस्लामाबाद के लिए निकलने से पहले सिंह ने कहा, "मैं सार्क मीटिंग में हिस्सा लेने जा रहा हूं. इस मीटिंग में सार्क देशों कि सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा का मौका है." उन्होंने कहा कि संगठित अपराधों और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अर्थपूर्ण सहयोग ही इस बैठक का आधार है. राजनाथ सिंह गृह मंत्री बनने के बाद पहली बार पाकिस्तान की यात्रा पर हैं. उनके साथ गृह और विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी हैं. गृह सचिव राजीव महर्षि तो एक दिन पहले ही इस्लामाबाद पहुंच गए थे. उन्होंने सार्क देशों के गृह सचिवों की बैठक में हिस्सा लिया. सार्क के इस पूरे सम्मेलन में तीन स्तर की बातचीत होती है. पहले संयुक्त सचिव बातचीत करते हैं. उसके बाद गृह सचिव मिलते हैं. और फिर गृह मंत्रियों की बैठक होती है. इस बार जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है उनमें आतंकवाद तो है ही, इसके अलावा वीसा को लेकर आने वाली दिक्कतें, अवैध हथियारों और नशीली दवाओं की तस्करी भी अहम मुद्दे हैं.

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भारत के लिए इस यात्रा का महत्व अलग है. भारत और पाकिस्तान के संबंध तनावग्रस्त हैं. दोनों देशों के बीच अलग-अलग स्तर की बातचीच दो साल से टल रही है. दोनों देशों की ओर से एक-दूसरे पर तीखे जुबानी हमले हो रहे हैं. हालांकि इस बात की संभावना कम ही है कि राजनाथ सिंह और चौधरी निसार अली खान के बीच अलग से कुछ बातचीत हो पाएगी. इसलिए संबंधों में कुछ सुधार की उम्मीद तो पहले से ही मद्धम है, हां दोनों नेताओं की बॉडी लैंग्वेज ने तनाव को बढ़ा जरूर दिया है.

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