अब यूक्रेन के आसपास भी दिखने लगा है रूसी हमले का असर | दुनिया | DW | 26.04.2022

डीडब्ल्यू की नई वेबसाइट पर जाएं

dw.com बीटा पेज पर जाएं. कार्य प्रगति पर है. आपकी राय हमारी मदद कर सकती है.

  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

अब यूक्रेन के आसपास भी दिखने लगा है रूसी हमले का असर

रूस और यूक्रेन के बीच दो महीने से भी ज्यादा वक्त से जारी युद्ध का असर अब यूक्रेन के आसपास के इलाके पर भी दिखने लगा है. उधर अमेरिका के नेतृत्व में जर्मनी में 40 देशों के रक्षामंत्रियों की मुलाकात हुई.

DW Premium Thumbnail | Ortschaft Teterivske

रूस और यूक्रेन के बीच दो महीने से भी ज्यादा वक्त से जारी युद्ध का असर अब यूक्रेन के आसपास के इलाके पर भी दिखने लगा है.

रूसी विदेशमंत्री सर्गेई लावरोव ने रूस दौरे पर पहुंचे संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंटोनियो गुटेरेश से कहा है कि रूस यूक्रेन में आम नागरिकों की समस्या कम करने की दिशा में संयुक्त राष्ट्र के साथ काम करने को तैयार है. गुटेरेश इस संघर्ष में मध्यस्थता करना चाहते हैं, जिसे लेकर यूक्रेन के उप-प्रधानमंत्री ने उनसे अपील भी की थी.

रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू होने के बाद से गुटेरेश का यह पहला रूस दौरा है. रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद वह यूक्रेन की राजधानी कीव में राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात करेंगे. गुटेरेश लगातार दोनों देशों के बीच संघर्ष-विराम की अपील कर रहे हैं. उनका मकसद है कि ऐसे मानवीय गलियारे स्थापित किए जाएं, जो वाकई लोगों के लिए सुरक्षित हों.

मॉस्को में यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब जर्मनी के अमेरिकी एयरबेस में 40 देशों के रक्षा मंत्रियों का एक सम्मेलन आयोजित हुआ है. रक्षामंत्रियों की बैठक का मकसद इस बात पर चर्चा करना है कि यूक्रेन को अधिक से अधिक हथियार कैसे मुहैया कराए जाएं. अमेरिका अपने सहयोगी देशों से यूक्रेन को टैंकों और बख्तरबंद वाहनों जैसे और ज्यादा भारी हथियार भेजने पर जोर दे रहा है, ताकि रूसी सेना को पीछे धकेला जा सके.

Bilderchronik des Krieges in der Ukraine

इस हफ्ते रूसी सेना ने यूक्रेनी रेलवे तंत्र पर हमले तेज कर दिए हैं.

यूक्रेन के विभाजन की थी हालत: रूसी अधिकारी

रूसी रक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पात्रुशेव ने मंगलवार को कहा कि यूक्रेनी सरकार और पश्चिमी देशों की नीतियां यूक्रेन को विभाजन की दिशा में ले जा रही थीं. निकोलाई पात्रुशेव के इस बयान का यह अर्थ निकाला जा रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से यूक्रेन विभाजित भी हो सकता है, जिसका दोष रूस बाद में अपने पश्चिमी विरोधियों पर डालेगा.

पुतिन के करीबी सहयोगियों में शुमार पात्रुशेव ने सरकारी अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा, "अमेरिका कई वर्षों से यूक्रेन में रूस-विरोधी भावनाओं को हवा दे रहा है. हालांकि, इतिहास गवाह है कि राष्ट्रीय एकता के परिप्रेक्ष्य में नफरत कभी भरोसेमंद चीज नहीं हो सकती है. अगर आज यूक्रेन में रह रहे लोगों को कोई चीज एकजुट करती है, तो वह राष्ट्रवादी बटालियनों के अत्याचारों का भय है."

यह भी पढ़ें: जर्मनी के राष्ट्रपति से चिढ़ते क्यों है यूक्रेन के लोग

रूस-यूक्रेन युद्ध तीसरे महीने में पहुंच गया था. ऐसे में पात्रुशोव के इन बयानों को इस इशारे के तौर पर लिया जा रहा है कि रूस भले यूक्रेन पर कब्जा न जमाने की बात कहता रहा हो, लेकिन असल में यूक्रेन को विभाजित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. कीव पर शुरुआती हमला बोलने के बाद पीछे धकेली गई रूसी सेना अब फिर से उस अभियान के लिए इकट्ठा हो रही है, जिसे रूस 'डोनबास को आजाद कराने की मुहिम' बता रहा है. पिछले सप्ताह तो एक रूसी जनरल ने यहां तक कह दिया था कि रूस यूक्रेन के पूरे पूर्वी और दक्षिणी इलाके को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करेगा.

Lemberg | Russischer Raketenangriff auf das ukrainische Bahnnetz

यूक्रेन में ल्वीव के पास रूसी हमले से हुए नुकसान का जायजा लेता एक फायरफाइटर.

मोल्दोवा में भी हलचल

मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांदू ने सोमवार और मंगलवार को मोल्दोवा से अलग होने का एलान करने वाले इलाके ट्रांसनिस्ट्रिया में बम धमाके होने के बाद सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए हैं और लोगों से शांत रहने की अपील है. ट्रांसनिस्ट्रिया रूस के समर्थन वाला इलाका है, जिसकी सीमा यूक्रेन से लगती है. आशंका जताई जा रही है कि रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग का असर इस इलाके पर भी पड़ सकता है.

सांदू ने इन धमाकों की आलोचना की है, जिसमें ट्रांसनिस्ट्रिया का सुरक्षा मंत्रालय, एक रेडियो टावर और सैन्य टुकड़ी निशाना बनी है. इस हमले में मारे गए या घायल लोगों की संख्या के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. सांदू ने कहा है कि ये धमाके इस इलाके को अस्थिर करने की नीयत से किए गए हैं. उन्होंने कहा कि ट्रांसनिस्ट्रिया की नेताओं से उनकी बात नहीं हुई है.

यह भी पढ़ें: यूरोपीय आयोग प्रमुख ने भारत को रूस-चीन मैत्री को लेकर चेताया 

मोल्दोवा भी सोवियत संघ के दौर में इसका हिस्सा रहा है. यूक्रेन ने भी मंगलवार को रूस को इस इलाके में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया है. यूक्रेनी राष्ट्रपति एक सलाहकार के मुताबिक रूस ट्रांसनिस्ट्रिया के इलाके को अस्थिर करना चाहता है और मोल्दोवा को संकेत देना चाहता है कि उसे कुछ 'मेहमानों' का सामना करना पड़ सकता है.

Italien | ukrainesche Flüchtlinge beim Osterfest in Melzo

यूक्रेन में ही एक इलाके से दूसरे में विस्थापित हुए एक बच्चे की ईस्टर के मौके पर खींची गई तस्वीर.

शरणार्थियों का गहराता संकट

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि रूसी आक्रमण से बचने के लिए इस साल 30 लाख और यूक्रेनी देश छोड़ सकते हैं. संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी ने पिछले आंकड़ों का बदलाव करते हुए नए आंकड़े जारी किए हैं. एजेंसी ने कहा है कि इस साल कुल 83 लाख यूक्रेनी अपना देश छोड़कर कहीं और पनाह तलाशेंगे.

संयुक्त राष्ट्र के आकलन के मुताबिक अब तक करीब 53 लाख यूक्रेनी देश छोड़कर पड़ोसी देशों में शरण लिए हुए हैं. वहीं जर्मन सरकार की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक अभी तक 3.80 लाख से ज्यादा यूक्रेनी नागरिक जर्मनी में दाखिल हो चुके हैं. हालांकि, यूक्रेन से कितने जर्मनी आए हैं, इसकी ठीक-ठीक संख्या का पता नहीं चल पाया है, क्योंकि यूरोपीय संघ की आंतरिक सीमाओं पर पासपोर्ट कंट्रोल की व्यवस्था अभी नहीं है.

अमेरिकी नेतृत्व वाली बैठक का हाल

जर्मनी में 40 देशों के रक्षा मंत्रियों की साझा बैठक में यूक्रेन की लंबे समय तक सुरक्षा और संप्रभुता बरकरार रखने का सवाल हावी रहा. जर्मनी के रामश्टाइन स्थित अमेरिकी एयरबेस पर सभी रक्षा मंत्री और तमाम अफसर अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के न्योते पर जुटे थे. हालांकि, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने पहले ही यह साफ कर दिया था कि यह बैठक नाटो के तत्वावधान में आयोजित नहीं की गई है. बैठक में स्वीडन, फिनलैंड, जापान, केन्या, इस्राएल और जॉर्डन जैसे गैर-नाटो सदस्य भी मौजूद थे.

मंगलवार को यह जानकारी भी सामने आई कि जर्मनी यूक्रेन को एंटी-एयरक्राफ्ट टैंक भेज रहा है. यह जर्मनी की पुरानी नीति से उलट लिया गया फैसला है, क्योंकि यूक्रेन को भारी हथियार न देने के लिए जर्मनी की खासी आलोचना हो रही है. इस आयोजन में जर्मनी की रक्षा मंत्री क्रिस्टीने लाम्ब्रेष्ट ने कहा कि वे अमेरिका की मदद से यूक्रेनी सैनिकों को जर्मनी में ट्रेनिंग देने की दिशा में काम कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: दुनिया का रक्षा खर्च पहली बार 20 खरब डॉलर को पार

यूक्रेनी सैनिकों ने जिन इलाकों में रूसी हवाई हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया है, उन इलाकों में कंधे पर रखकर दागी जा सकने वाली स्टिंगर मिसाइलों की मांग बहुत बढ़ गई है. हालांकि, अमेरिका की ओर से की जा रही हथियारों की आपूर्ति कम हुई है और एंटी-एयरक्राफ्ट हथियारों के उत्पादन में भी दिक्कत आ रही है.

Deutschland | Konferenz zum Ukraine-Krieg in Ramstein

अमेरिकी रक्षामंत्री के नेतृत्व में आयोजित हुई 40 देशों की बैठक में कई गैर-नाटो देश भी शामिल थे.

रूस को झटका देने की तैयारी में यूरोपीय संघ

यूरोपीय संघ रूस के खिलाफ संभावित आर्थिक प्रतिबंधों के तौर पर रूस से आयात होने वाले तेल में कटौती करने पर विचार कर रहा है. हालांकि, इस विषय में अभी आधिकारिक तौर पर कोई प्रस्ताव पेश नहीं किया गया है, क्योंकि सरकारें अभी इन प्रतिबंधों के संभावित असर का आकलन कर रही हैं.

रूस रोजाना 47 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है, जिसका करीब आधा यूरोपीय संघ को निर्यात किया जाता है. अगर इसमें कोई कटौती की जाती है, तो इसका रूस पर निश्चित तौर से गहरा आर्थिक असर पड़ सकता है. दो महीने से भी ज्यादा वक्त से पहले जब रूस ने यूक्रेन पर हमला बोला था, तब से अब तक यूरोप रूस से 14 अरब यूरो का तेल खरीद चुका है. ये आंकड़े सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर की ओर से जारी किए गए हैं.

हालांकि, इन प्रतिबंधों का असर यूरोपीय संघ पर भी पड़ेगा, क्योंकि रूस यूरोप का सबसे बड़ा तेल सप्लायर है. 2020 में इस क्षेत्र में तेल के कुल आयात का 26 फीसदी रूस से ही आया था. यूरोप में जर्मनी, पोलैंड और नीदरलैंड्स रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार हैं.

वहीं यूरोपीय संघ के ट्रेड कमिश्नर वाल्दिस डोम्ब्रोव्सकिस ने कहा है कि रूस के खिलाफ कदम उठाने का एक तरीका तो यह हो सकता है कि यूरोपीय संघ रूस से आने वाले तेल पर टैरिफ लगा दे. इससे रूस को तेल की कीमत घटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. हालांकि, इससे यूरोपीय देशों में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जो कि पहले से ही आम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई हैं.

वीएस/एमजे (एपी, एएफपी, रॉयटर्स, डीपीए)