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ईरान से डील का ऐलान आज हो सकता हैः अमेरिका

अशोक कुमार एएफपी और रॉयटर्स के साथ
२४ मई २०२६

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि रविवार को ईरान के साथ डील का ऐलान हो सकता है, जिससे मध्य पूर्व में जारी युद्ध औपचारिक रूप से रुक सकता है. हालांकि ईरान ने अभी ऐसी किसी डील से इनकार किया है.

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नई दिल्ली में मार्को रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने ईरान युद्ध को लेकर कहा कि उससे जुड़े सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैंतस्वीर: Julia Demaree Nikhinson/AFP

अमेरिकी विदेश मंत्री इस समय अपने पहले भारत दौरे पर नई दिल्ली में हैं जहां उन्होंने रविवार को कहा, "मैं समझता हूं कि शायद इस बात की संभावना है कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को अच्छी खबर मिलेगी." रूबियो ने कहा कि इस डील में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की चिंताओं पर ध्यान दिया जाएगा. ईरान ने फरवरी में अपने ऊपर अमेरिकी और इस्राएली हमलों के बाद से इस अहम समुद्री रास्ते को लगभग बंद कर रखा है जहां से दुनिया की जरूरत का कुल 20 फीसदी कच्चा तेल और ईंधन गुजरता है.

रूबियो ने कहा कि इस समझौते से एक प्रक्रिया शुरू होगी, "जो हमें उस स्थिति में ले जाएगी, जहां राष्ट्रपति ले जाना चाहते हैं, यानी ऐसी दुनिया, जिसमें ईरानी परमाणु हथियारों को लेकर किसी तरह का डर या चिंता नहीं होगी."

अमेरिकी विदेश मंत्री के इस बयान से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि एक ऐसे प्रस्ताव पर "मोटा मोटी सहमति" बन गई है जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की बात भी शामिल है. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "एक समझौता काफी हद तक तय हो चुका है, हालांकि अभी इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. यह समझौता अमेरिका, ईरान इस्लामिक गणराज्य और अन्य कई देशों के बीच हो रहा है."

होर्मुज में नाकाबंदी से पूरी दुनिया पर असर

ईरान ने कहा, कोई डील नहीं हुई

दूसरी तरफ ईरान ने कहा है कि वो होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा. ईरानी सरकारी मीडिया ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया है कि डील पर लगभग सहमति बन गई है. उसके मुताबिक यह दावा अधूरा और सच्चाई से मेल नहीं खाता. शनिवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकैई ने प्रस्ताव के मसौदे को "ढांचागत समझौता" करार दिया जिस पर चर्चा के लिए "30 से 60 दिन लगेंगे और उसी के बाद किसी अंतिम समझौते पर पहुंचा जा सकता है."

इस बीच, ऐसी भी खबरें हैं कि इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ईरान के साथ समझौता करने के ट्रंप के कदम से खुश नहीं हैं. इस्राएली मीडिया संस्थान कान ने इस मामले से जुड़े सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि नेतान्याहू ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फैसले को 60 दिन के लिए टालने पर अपनी चिंता जताई है, क्योंकि इस दौरान ईरान पर हमले नहीं किए जा सकेंगे. रिपोर्ट कहती है कि नेतान्याहू ईरान पर हमले फिर से शुरू करने के हक में हैं.

हाल में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, नेतान्याहू "वही करेंगे, मैं उन्हें करने को कहूंगा." ट्रंप ने यह बात ईरान से संभावित डील पर इस्राएली प्रतिक्रिया के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कही.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप
ट्रंप के कुछ पक्के समर्थक भी ईरान से डील के हक में नहीं दिखतेतस्वीर: Alex Brandon/AP Photo/dpa/picture alliance

डील की आलोचना

ईरान से डील ने भले अभी अंतिम रूप ना लिया हो, लेकिन इसकी आलोचना शुरू हो गई है. आम तौर पर ट्रंप की नीतियों का समर्थन करने वाले सीनेटर टेड क्रूज और उनके पहले कार्यकाल में अमेरिकी विदेश मंत्री रहे माइक पोंपेयो इसके आलोचकों में शामिल हैं. ये दोनों ही इस्राएल के मजबूत समर्थक हैं. उनका कहना है कि यह समझौता ईरान को बहुत जल्दी फायदे पहुंचा सकता है जैसे कि वह बिना रुकावट अपना तेल बेच सकेगा.

जब रूबियो से इस तरह की आलोचनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "ईरान को लेकर ट्रंप से ज्यादा सख्त कोई और अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं रहा. उन्होंने ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ा." उन्होंने आगे कहा, "जब ईरान के साथ यह संघर्ष शुरू हुआ था, तब इसके लक्ष्य तय कर दिए गए थे. वे बहुत सरल और स्पष्ट थे, हम उनकी नौसेना को नष्ट करने वाले थे, और वह कर दिया गया"

रुबियो ने कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल दागने की क्षमता को "काफी हद तक कम करना” और देश के रक्षा-औद्योगिक ढांचे को नुकसान पहुंचाना भी था और उनके मुताबिक ये सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं.