मस्जिद के सामने भीड़ के बीच महंत ने मुस्लिम महिलाओं को दी रेप की धमकी, एफआईआर दर्ज | भारत | DW | 08.04.2022

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भारत

मस्जिद के सामने भीड़ के बीच महंत ने मुस्लिम महिलाओं को दी रेप की धमकी, एफआईआर दर्ज

भारत में एक महंत का वीडियो वायरल हुआ है जिसमें वो एक मस्जिद के सामने खड़ी भीड़ के बीच मुस्लिम समुदाय के लोगों को धमकी दे रहे हैं कि यदि वे नहीं सुधरे तो उनकी महिलाओं के साथ बलात्कार किया जाएगा.

यह वीडियो सीतापुर जिले के खैराबाद स्थित एक मठ के महंत बजरंग मुनि का बताया जा रहा है. महंत एक गाड़ी के अंदर बैठे हैं, बाहर कुछ युवाओं की भीड़ है जो भगवा झंडे लिए हुए महंत की एक-एक बात पर जोश के साथ नारेबाजी कर रहे हैं. गाड़ी के अंदर से ही महंत कहते हैं, "अगर कोई एक हिंदू लड़की छेड़ी तो मैं खुलेआम तुम्हारे घर से बहू बेटियों को उठाकर बलात्कार करूंगा.”

महंत इस तरह का भाषण काफी देर तक देते हैं और सामने की भीड़ "जयश्रीराम” के नारे लगाती है. आस-पास पुलिस वाले भी दिख रहे हैं लेकिन वो सिर्फ मूकदर्शक बने हुए हैं. सोशल मीडिया पर इस वीडियो और उसकी भाषा को लेकर जमकर हंगामा मचा हुआ है. राजनीतिक दलों से लेकर महिला आयोग तक ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए महंत बजरंग मुनि की गिरफ्तारी की मांग की है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में यूपी के डीजीपी मुकुल गोयल को नोटिस जारी करते हुए सात दिनों में जवाब तलब किया है.

इस बीच, सीतापुर पुलिस ने बताया है कि महंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और अपर पुलिस अधीक्षक द्वारा इसकी जांच की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आए तथ्यों और सबूतों के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

वायरल वीडियो दो अप्रैल का बताया जा रहा है जिसे शुक्रवार को एक ट्विटर यूजर मोहम्मद जुबैर ने ट्वीट किया तो लोगों को इसके बारे में जानकारी हुई. यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इसकी जानकारी आखिर पुलिस-प्रशासन को कैसे नहीं हुई और तब कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई. महंत ने यह बयान खैराबाद स्थित शीशे वाली मस्जिद के सामने दिया था.

खैराबाद कस्बे के महर्षि श्री लक्ष्मण दास उदासीन आश्रम के महंत बजरंग मुनि दास के तौर पर वीडियो में पहचाने गए व्यक्ति ने नवरात्रि मौके पर एक जुलूस निकाला था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब जुलूस एक मस्जिद के पास पहुंचा तो महंत ने लाउडस्पीकर पर कथित नफरती भाषण देना शुरू कर दिया. करीब दो मिनट लंबे वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, "मैं आपको पूरे प्यार से यह कह रहा हूं कि अगर खैराबाद में एक भी हिंदू लड़की को आपके द्वारा छेड़ा गया, तो मैं आपकी बेटी और बहू को आपके घर से बाहर लाऊंगा और उसके साथ बलात्कार करूंगा.”

वीडियो में महंत अपनी हत्या की साजिश का भी आरोप लगा रहे हैं और कह रहे हैं कि इसके लिए 28 लाख रुपये की राशि एकत्र की गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, वीडियो वायरल होने से पहले भी बजरंग मुनि दास संगत की जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर भी काफी चर्चा में रहे थे और उनके यहां स्थानीय नेताओं का काफी जमावड़ा लगा रहता है.

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शुक्रवार को सोशल मीडिया में चर्चा होने और हंगामा मचने के बाद महंत का एक और वीडियो सामने आया जिसमें वो कह रहे हैं कि ‘मेरा वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाला हिंदू विरोधी है.' इस वीडियो में महंत अपने ऊपर पहले किए गए हमलों के बारे में भी बता रहे हैं. महंत बजरंग मुनि मूल रूप से प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं और लगातार विवादों में रहते हैं. विवादों में रहने के बावजूद उनकी और उनके आश्रम की सुरक्षा के लिए सरकार की ओर से करीब आधा दर्जन गनर पीएसी तैनात की गई है.

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इससे पहले गाजियाबाद के डासना के एक महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती भी लगातार आपत्तिजनक बयानों और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती भाषणों को लेकर चर्चा में रहे हैं. हरिद्वार में पिछले साल धर्म संसद में उनके ऐसे नफरती बयानों के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और काफी दबाव पड़ने पर गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में जमानत पर छूट गए. जमानत पर छूटने के बाद अभी कुछ दिन पहले दिल्ली के बुराड़ी में उन्होंने फिर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नफरती भाषण दिया था जिसकी वजह से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. एफआईआर पर तो कोई कार्रवाई नहीं हुई, यति नरसिंहानंद ने वैसा ही बयान गुरुवार को वृंदावन में भी दिया.

ऐसे में सवाल उठता है कि एक समुदाय के खिलाफ ऐसे बयानों के बावजूद इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? यति नरसिंहानंद सरस्वती को भी हरिद्वार की धर्म संसद के बाद तब गिरफ्तार किया गया जब कोर्ट ने दखल दिया. वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान कहते हैं कि बिना सत्ता के संरक्षण के ऐसे लोग बार-बार इस तरह के बयान दे ही नहीं सकते.

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वो कहते हैं, "इन लोगों को तो लगता है कि अब आगे बढ़ने का या प्रचारित होना का यही जरिया बन गया है. यति नरसिंहानंद गिरफ्तार हुए, जमानत हुई और फिर दिल्ली पहुंच गए वही भाषण देने. आखिर क्या दिल्ली पुलिस को नहीं पता था कि वो क्या बोलेंगे. लेकिन दिल्ली पुलिस को उन्हें रोकने के निर्देश नहीं थे, इसलिए वह उन्हें नहीं रोक पाई. सीतापुर में यह जो महंत है, इसने जो कुछ भी बोला क्या पुलिस को नहीं पता चला. सीधी सी बात है कि यदि सरकार का संरक्षण न हो और पुलिस चाह ले तो ये लोग ऐसी नफरती भाषा का इस्तेमाल कर ही नहीं सकते थे. अभी किसी दूसरे धर्म के किसी व्यक्ति ने ऐसा कुछ कहा होता तो सीधे बुलडोजर पहुंच जाता. तो यह सब सत्ता के संरक्षण में ही हो रहा है और हम लोग बहुत ही गलत दिशा में जा रहे हैं.”

गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पवन कुमार को पिछले दिनों कानून व्यवस्था न संभाल पाने के आरोप में सरकार ने निलंबित कर दिया था लेकिन उनके निलंबन के पीछे एक वजह यह भी बताई जा रही थी कि वो यति नरसिंहानंद के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे थे और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमों की पुराने फाइलें जांच रहे थे. हालांकि इस बात की पुष्टि किसी आधिकारिक सूत्र तो नहीं हो सकती लेकिन नाम न छापने की शर्त पर पुलिस के कई उच्चाधिकारी भी इस बात को स्वीकार करते हैं.