मायावती पर लैंगिकवादी टिप्पणी रणदीप हुड्डा को पड़ी भारी | भारत | DW | 28.05.2021
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भारत

मायावती पर लैंगिकवादी टिप्पणी रणदीप हुड्डा को पड़ी भारी

अभिनेता रणदीप हुड्डा का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुआ. इस वीडियो में हुड्डा मायावती पर लैंगिकवादी टिप्पणी कर रहे हैं. वीडियो के सामने आने के बाद उन्हें ब्रांड एंबेसडर के पद से हटा दिया गया है.

अभिनेता रणदीप हुड्डा को बहुजन समाजवादी पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती पर की गई लैंगिकवादी और जातिवादी टिप्पणी भारी पड़ने लगी है. उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मेरठ में लिखित शिकायत दी गई है. हुड्डा का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग न केवल मायावती की पार्टी के कार्यकर्ताओं ने की बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लोगों ने भी की. उनके इस आपत्तिजनक टिप्पणी पर विशेष तौर पर महिलाओं ने प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें "मानसिक रूप से बीमार" बताया. मंगलवार को एक ट्विटर यूजर ने 43 सेकंड का यह वीडियो साझा किया और लिखा, ''क्या इससे यह पता नहीं चलता है कि यह समाज कितना जातिवादी और लैंगिकवादी है खासकर एक दलित महिला के खिलाफ.''

हुड्डा ने यह टिप्पणी एक चैट शो के दौरान की थी. ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वीमेंस एसोसिएशन की सचिव कविता कृष्णन ने ट्वीट कर कहा, ''यह मजाक नहीं है. आपने गौर किया है कोई पुरुष नेता की बदसूरती को लेकर मजाक नहीं उड़ाता. आप वही कर रहे हैं जो जातिवादी, स्त्री विरोधी, असुरक्षित लोग करते हैं, जब वे उन महिलाओं की शक्ति का सामना करने से डरते हैं.'' 

ब्रांड एंबेसडर से छुट्टी

हुड्डा के वीडियो वायरल होने के बाद जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण (सीएमएस) ने एक बयान जारी कर कहा, "सीएमएस सचिवालय वीडियो में की गई टिप्पणियों को आपत्तिजनक मानता है और वह सीएमएस सचिवालय या संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों को नहीं दर्शाता है." बयान में कहा गया है कि हुड्डा को वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उनके समर्थन के कारण फरवरी 2020 में प्रवासी प्रजातियों के लिए सीएमएस राजदूत के रूप में नियुक्त किया गया था. सीएमएस सचिवालय उस समय 2012 के इस वीडियो से अनजान था.

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मायावती पर टिप्पणी के बाद कई लोगों ने हुड्डा की गिरफ्तारी की मांग की

सीएमएस के बयान के मुताबिक, "सीएमएस संयुक्त राष्ट्र की एक संधि है, यह संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम दोनों से अलग है, एकमात्र इकाई जिसके लिए हुड्डा ने एक ब्रांड एंबेसडर के रूप में काम किया, वह सीएमएस था." सीएमएस ने उन्हें ब्रांड एंबेसडर से हटा दिया है. हुड्डा ने इस विवाद पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है. 

हुड्डा का बयान वायरल होने के बाद लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. दलित और अधिकार कार्यकर्ता हुड्डा के बयान की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि पढ़ा लिखा वर्ग भी ऐसा बोल सकता है इसमें कोई हैरानी नहीं है. प्रोफेसर रतनलाल कहते हैं, ''आम तौर पर 'सेलिब्रिटीज' सभ्य दुनिया में रहने के लिए अभ्यस्त नहीं होते... एससी, एसटी और ओबीसी के खिलाफ गाली-गलौज और मजाक उनके बीच आम बात है, जो उनकी जातिवादी और पितृसत्तात्मक मानसिकता को दर्शाता है.'' 

दलितों पर भद्दी टिप्पणियां कब रुकेंगी 

कुछ दिनों पहले एक कॉमेडियन अबीश मैथ्यू को अपने 2012 के मायावती पर ट्वीट पर माफी मांगनी पड़ी थी. उनका नौ साल पुराना ट्वीट जिसमें, उन्होंने मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, सोशल मीडिया पर वह अचानक से वायरल हो गया, जिसके बाद मैथ्यू को माफी मांगनी पड़ी. ट्विटर पर लोगों ने अबीश की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हैशटैग भी चलाए थे. ट्विटर की नीतियों के उल्लंघन के बाद मैथ्यू का वह ट्वीट हटा दिया गया था. मैथ्यू ने माफी मांगते हुए जो बयान जारी किया था उसमें उन्होंने लिखा कि वह इसमें "लैंगिकवाद" देख सकते हैं.

मैथ्यू ने अपने बयान में लिखा कि वह उन लोगों के आभारी हैं जो आपत्तिजनक पोस्ट को सामने लेकर आए और उन्हें माफी मांगने का मौका दिया. वे आगे लिखते हैं, "मैं आगे से सभी मंचों का इस्तेमाल महिला अध‍िकारों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए करूंगा."

हाल ही में टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा की अभिनेत्री मुनमुन दत्ता भी अपनी एक क्लिप वायरल होने के बाद लोगों के निशाने पर आ गईं थी. सोशल मीडिया का एक वर्ग उस शब्द के इस्तेमाल से आहत हो गया था जो एक जाति विशेष के खिलाफ था. मुनमुन के खिलाफ मध्य प्रदेश के इंदौर और हरियाणा के हांसी में शिकायत दर्ज की गई थी. मुनमुन ने माफी मांगते हुए अपने बचाव में कहा था "भाषा संबंधी अड़चन" के कारण उन्होंने गलत शब्द का इस्तेमाल किया और उन्हें शब्द का असल मतलब नहीं पता था.

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