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क्या है रूस में पुतिन की भारी जीत का अर्थ

१८ मार्च २०२४

पिछले लगभग दो दशकों से रूस के राजनीतिक आसमान पर काबिज व्लादिमीर पुतिन अपना पांचवां राष्ट्रपति चुनाव अब तक के रिकॉर्ड मतों से जीतने की ओर बढ़ चुके हैं.

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रूस में चुनाव
रूस में चुनाव के अनुमान पूरी तरह पुतिन के पक्ष मेंतस्वीर: Maxim Shemetov/REUTERS

रूसी जासूसी एजेंसी केजीबी में एक सामान्य जासूस रहे व्लादिमीर पुतिन 1999 में नव वर्ष की पूर्व संध्या में पहली बार देश के राष्ट्रपति बने थे. तब से उन्होंने सत्ता पर लगातार अपना कब्जा बनाया हुआ है. और 2024 में वह अब तक की सबसे बड़ी जीत के साथ वैश्विक व्यवस्था बदलने के अपने इरादे को और मजबूती के साथ लेकर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं.

पुतिन के दौर में रूस बहुत तेजी से बदला है. देश के सबसे ताकतवर ओलिगार्क तबके को उन्होंने पूरी तरह काबू कर लिया है. देश में विपक्ष लगभग खत्म हो चुका है और रूस एक तानाशाही शासन जैसे माहौल की ओर बढ़ रहा है.

ऐसे माहौल में पुतिन की जीत में किसी तरह की गुंजाइश तो पहले से ही नहीं थी लेकिन हजारों विरोधियों के ‘नून प्रोटेस्ट‘ के बीच एग्जिट पोल में पुतिन को 87 फीसदी मतों से जीतता हुआ दिखाया गया है. 

मजबूत हुई पकड़

पिछले महीने ही एक जेल में पुतिन के सबसे बड़े राजनीतिक विरोधी और आलोचक ऐलेक्सी नावाल्नी की मौत हो गई थी. उनके कई अन्य विरोधी जेलों में बंद हैं या विदेशों में निर्वासन में हैं. 71 साल के पुतिन ने किसी तरह के विपक्ष को उभरने का मौका ही नहीं दिया है.

2022 की फरवरी में यूक्रेन पर हमले के बाद पुतिन की सत्ता पर पकड़ और मजबूत हुई है. देश में इस युद्ध का जो भी विरोध था उसे लगभग खामोश कर दिया गया. रूस के हमले के बाद देश में बड़े पैमाने पर युद्ध विरोधी प्रदर्शन हुए थे लेकिन बहुत जल्द ही वे गायब हो गए. पश्चिम के तगड़े विरोध और भारी आर्थिक व वित्तीय प्रतिबंधों के बावजूद यूक्रेन युद्ध ने पुतिन की सत्ता पर पकड़ को और ज्यादा मजबूत किया.

इस चुनाव में जीत के साथ पुतिन ने छह साल और राष्ट्रपति पद पर बने रहना सुनिश्चित कर लिया है और इस तरह वह 200 साल में रूस पर सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले शासक बनने जा रहे हैं. इस कार्यकाल के साथ ही वह जोसेफ स्टालिन का सबसे लंबे राज का रिकॉर्ड भी तोड़ देंगे.

पब्लिक ओपिनियन फाउंडेशन नामक सर्वेक्षण संस्था के एग्जिट पोल के मुताबिक पुतिन को लगभग 88 फीसदी मत मिलेंगे. शुरुआती नतीजों ने इन अनुमानों को सही साबित किया है. दूसरे नंबर पर वामपंथी उम्मीदवार निकोलाई खारितोनोव हैं जिन्हें चार फीसदी मत मिलने का अनुमान है.

भारी समर्थन

अमेरिका ने इन चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है. व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ने कहा, "जिस तरह पुतिन ने अपने राजनीतिक विरोधियों को जेलों में डाला है और चुनाव लड़ने से रोका है, उससे जाहिर है कि ये चुनाव निष्पक्ष नहीं हैं.”

पुतिन की जीत पर संदेह तो कम ही था लेकिन तीन दिन तक चले चुनाव में उन्होंने यह साबित करने की कोशिश की कि देश का मतदाता उनका समर्थक है. राष्ट्रीय चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इस बार देश में रिकॉर्ड 74.22 फीसदी मतदान हुआ है. इसने 2018 के 67.5 फीसदी के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया है.

रॉयटर्स समाचार एजेंसी के संवाददाता ने कहा कि दोपहर के बाद मतदान केंद्रों पर भारी भीड़ देखी गई. इनमें बड़ी संख्या में युवा मतदाता शामिल थे और मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग व येकातेरिनबर्ग में मतदान केंद्रों पर कई जगह सैकड़ों-हजारों लोगों की लाइनें लगी थीं.

पश्चिम के लिए सबक

नावाल्नी के समर्थकों ने पुतिन के विरोध में ‘नून अगेंस्ट पुतिन' नाम से अभियान चलाकर विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया था लेकिन मतदान केंद्रों के बाहर नाममात्र के प्रदर्शनकारी नजर आए.

रूस के बाहर एशिया और यूरोप में रह रहे मतदाताओं के लिए दूतावासों में मतदान केंद्र बनाए गए थे और वहां बड़े पैमाने पर विरोधी प्रदर्शनकारी जमा हुए. बर्लिन में जब नावाल्नी की विधवा रूसी दूतावास के बाहर पहुंचीं तो लोगों ने ‘यूलिया, यूलिया' के नारे लगाए.

लातविया में रूसी हमले का डर

नावाल्नी की बनाई संस्था एंटी-करप्शन फाउंडेशन के रुसलान शावेदीनोव ने इन प्रदर्शनों को अपनी जीत बताया. उन्होंने कहा, "हमने खुद को, पूरे रूस को और बाकी दुनिया को दिखाया कि पुतिन रूस नहीं है और पुतिन ने रूस में सत्ता पर कब्जा किया है. हमारी जीत इस बात में है कि हम रूसियों ने डर को हराया है. लोगों ने देखा कि वे अकेले नहीं हैं.”

अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित फॉरेन पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट के नेशनल सिक्यॉरिटी प्रोग्राम के निदेशक निकोलास ग्वोसदेव कहते हैं कि पुतिन का लक्ष्य अब अपनी सोच को रूस की राजनीति पर थोपना है ताकि वह सुनिश्चित कर सकें कि उनका उत्तराधिकारी भी उन जैसा ही हो.

ग्वोसदेव ने कहा, "जो पश्चिम ये उम्मीद कर रहा था कि यूक्रेन में पुतिन का अभियान जल्दी खत्म हो जाएगा, उन्हें यह चुनाव याद दिलाता है कि भू-राजनीतिक बॉक्सिंग रिंग में पुतिन कई और दौर की तैयारी में हैं.”

वीके/एए (रॉयटर्स, एएफपी)

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