अमेरिका का चीन पर श्रीलंका में अराजकता फैलाने का आरोप | दुनिया | DW | 28.10.2020
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दुनिया

अमेरिका का चीन पर श्रीलंका में अराजकता फैलाने का आरोप

चीन के खिलाफ ट्रंप प्रशासन का रवैया और सख्त हो गया है. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि चीन ने श्रीलंका में अराजकताई फैलाई है. श्रीलंका दौरे से पहले पोम्पेओ भारत में थे और उन्होंने अहम समझौते किए थे.

भारत के बाद बुधवार को श्रीलंका दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी श्रीलंका में "शिकारी" के रूप में कार्य कर रही है. उन्होंने चीन की कड़ी आलोचना करने का कोई मौका नहीं छोड़ा. 27 अक्टूबर को भारत-अमेरिका के बीच टू प्लस टू वार्ता का आयोजन किया गया था और जिसमें विदेश मंत्री माइक पोम्पेओ और रक्षा मंत्री मार्क एस्पर अपने भारतीय समकक्ष के साथ शामिल हुए. क्षेत्र में चीन के प्रभुत्व को देखते हुए पोम्पेओ का दौरा अहम माना जा रहा है. श्रीलंका के बाद उनकी अगली यात्रा मालदीव और इंडोनेशिया होगी. हाल के सालों में क्षेत्र में चीन के बढ़ते राजनीतिक और सैन्य अतिक्रमण को चुनौती देने के लिए सहयोगी देशों को मजबूत सहारा देने के इरादे यह यात्रा अहम मानी जा रही है.

वह भी ऐसे वक्त में जब अमेरिका में तीन नवंबर को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होने जा रहे हैं. ट्रंप अपने प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन पर चीन के प्रति झुकाव रखने का आरोप लगाते आए हैं और विदेश नीति में कमजोर बताते हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पोम्पेओ ने कहा, "हमें खराब सौदे नजर आते हैं, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी एक शिकारी की तरह भूमि और समंदर पर संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है. अमेरिका यहां एक दोस्त और साझेदार की तरह आता है."

भारत और चीन के बीच मई महीने से सीमा विवाद चल रहा है और पोम्पेओ ने एशिया में अपनी यात्रा भारत से ही शुरू की और श्रीलंका बीजिंग का बेहद करीबी माना जाता है. बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट्स के तहत चीन ने अरबों डॉलर बंदरगाहों और हाईवे के निर्माण के लिए निवेश किए हैं. अमेरिका का मानना है कि यह ऐसी परियोजना है जिससे छोटे देशों को कर्ज में फंसाया जा सके. 

श्रीलंका के विदेश मंत्री दिनेश गुणवर्द्धन ने कहा कि उनका देश सभी के साथ शांति और अच्छे रिश्ते चाहता है. उन्होंने कहा, "श्रीलंका एक तटस्थ, गुट-निरपेक्ष देश है, जो शांति के लिए प्रतिबद्ध है. हमें उम्मीद है कि हम अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ रिश्ते बनाए रखेंगे."

बौखलाया हुआ चीन

अमेरिका को आरोप है कि चीन छोटे से देश श्रीलंका का शोषण कर रहा है और वह जोखिम में है. पोम्पेओ की कोशिश अपने दौरे के जरिए श्रीलंका को कर्ज के जरिए चीन द्वारा "फंसाने" की कोशिश पर चौकन्ना कर पाने की है. पोम्पेओ के श्रीलंका के आने से पहले ही चीन आग बबूला हो गया और उसने आरोप लगाया कि अमेरिका छोटे देशों पर दबाव बना रहा है. मालदीव और इंडोनेशिया दौरे पर भी पोम्पेओ का जोर हिंद-प्रशांत में बढ़ती चीनी गतिविधियों को पीछे धकलने पर रहेगा.

अक्टूबर के शुरूआत में बीजिंग ने श्रीलंका के ग्रामीण इलाकों में विकास के लिए 9 करोड़ डॉलर का अनुदान दिया था. यह अनुदान तब मिला था जब श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने चीनी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान मदद मांगी थी. चीन बेल्ट एंड रोड परियोजना के लिए श्रीलंका को एक महत्वपूर्ण कड़ी मानता है और इसी लिए उसने अरबों डॉलर का कर्ज श्रीलंका को दिया हुआ है. परियोजनाओं के तहत एक बंदरगाह, हवाई अड्डा, बंदरगाह-शहर, राजमार्ग और पावर स्टेशन बनाए जाएंगे.

अमेरिका जैसे आलोचक कहते हैं कि चीनी वित्त पोषित परियोजनाएं आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है और श्रीलंका को कर्ज चुकाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा.

एए/सीके (एएफपी, रॉयटर्स)

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