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तस्वीर: Jean-François Frey//L'ALSACE/PHOTOPQR/MAXPPP7/picture alliance

पेगासस के निशाने पर आईं महिलाएं ज्यादा खतरे में

१२ अगस्त २०२१

भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में पेगासस के जरिए जिन महिलाओं के फोन कथित तौर पर हैक किए गए, उनके ऊपर अब ब्लैकमेल का खतरा मंडरा रहा है.

https://www.dw.com/hi/pegasus-program-puts-women-at-greater-risk-in-global-south/a-58835969

इस्राएल की कंपनी द्वारा बनाया गया सॉफ्टवेयर पेगासस, कथित तौर पर, हजारों लोगों के फोन हैक करने के लिए इस्तेमाल किया गया था. अब तकनीकी विशेषज्ञों और पीड़ितों का कहना है कि जिन महिलाओं को निशाना बनाया गया, उन्हें ब्लैकमेल और परेशान किए जाने का खतरा बहुत ज्यादा है.

पेगासस एक सॉफ्टवेयर है जो इस्राएल की कंपनी एनएसओ ने बनाया है. हाल ही में दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों ने एक शोध के बाद खबर दी थी कि दर्जनों देशों में हजारों फोन हैक किए गए और लोगों की जासूसी की गई. पेगासस के जरिए मोबाइल फोन को जासूसी उपकरण की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. उस फोन में मौजूद तस्वीरें, संदेश और ईमेल आदि हैक करने वाले की पहुंच में होते हैं. फोन का कैमरा भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन देशों में निजता के अधिकार की सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त नहीं हैं, अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियां हैं और सामाजिक दृष्टिकोण रूढ़िवादी है, वहां महिलाओं के लिए इस तरह की जासूसी के खतरे पुरुषों से ज्यादा हैं.

भारत सरकार ने कब-कब कहा, आंकड़े नहीं

दिल्ली स्थित इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन की अनुष्का जैन कहती हैं, "एक महिला को जासूसी के लिए निशाना बनाया जाना, पुरुषों को निशाना बनाए जाने से अलग है क्योंकि सूचनाएं उस महिला को ब्लैकमेल करने या उसकी छवि खराब करने के लिए प्रयोग की जा सकती हैं.”

भारत में 60 महिलाएं हुईं शिकार

अनुष्का जैन की संस्था पेगासस का शिकार हुए दो कार्यकर्ताओं की कानूनी मदद कर रही है. इनमें से एक महिला है. वह बताती हैं, "महिलाओं को पहले ही ऑनलाइन उत्पीड़न सहना पड़ता है. अगर उन्हें लगता हौ कि उनकी जासूसी हो सकती हो, तो वे खुद पर ही पहले से ज्यादा पाबंदियां लगा लेंगी या बोलने से डरेंगी.”

कथित तौर पर पेगासस के जरिए निशाना बनाए गए जिन नंबरों की सूची भारत में जारी हुई थी, उनमें से 60 महिलाएं हैं. भारतीय समाचार पोर्टल द वायर के मुताबिक इन महिलाओं में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा कुछ गृहणियां भी शामिल हैं.

जिन महिलाओं के फोन निशाने पर थे उनमें सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी भी है. इस कर्मचारी ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे. हालांकि बाद में जजों की एक समिति ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था. उस महिला और उसके रिश्तेदारों के फोन भी पेगासस सूची में शामिल थे. जैन कहती हैं, "वह कोई सार्वजनिक जीवन जीने वाली व्यक्ति नहीं है. तो उसका फोन सिर्फ उस शिकायत के कारण ही निशाने पर था. यह निजता का घोर हनन है.”

पेगासस जासूसी कांड पर सिद्धार्थ वरदराजन से बातचीत

पेगासस मामले में भारत सरकार ने किसी तरह की पुष्टि नहीं की है. ना ही यह कहा गया है कि पेगासस खरीदा गया या नहीं. सरकार ने बस इतना कहा है कि अनाधिकृत जासूसी नहीं की जाती. पेगासस बनाने वाली इस्राएली कंपनी एनएसओ ने भी इतना ही कहा है कि जो ग्राहक नियमों का उल्लंघन करते पाए गए, उन्हें हटा दिया गया है. लेकिन हटाए गए मामलों में क्या महिलाओं को ब्लैकमेल करने या धमकाने जैसी वजह शामिल थीं, इस पर एनएसओ ने कोई टिप्पणी नहीं की है.

उल्लंघन सिर्फ निजता का नहीं

मुंबई में रहने वालीं वकील आभा सिंह कहती हैं कि वह जानकर हैरान रह गईं कि वह भी संभावित शिकारों में शामिल हैं. द वायर के मुताबिक उनका भाई भी सूची में शामिल है, जो एक बड़ा सरकारी अधिकारी है. आभा सिंह कहती हैं, "महिलाएं तो हिसाब चुकाने का अधिकार बन गई हैं. उन्हें बस इसलिए निशाना बनाया जा रहा है कि वे किसी से संबंधित हैं.”

अभिव्यक्ति की आजादी जैसे मुद्दों पर काम करने वाली आभा सिंह कहती हैं कि वह डरने वाली नहीं हैं. वह कहती हैं, "मैं चुप होने वाली नहीं. मैं अपना काम जारी रखूंगी.”

हालांकि अपनी रिसर्च में शोधकर्ता यह पुष्टि नहीं कर सके कि जिन लोगों के नंबर पेगासस प्रोजेक्ट में सामने आए, उनके फोन हैक हुए ही थे. कुछ मामलों में साबित हुआ कि फोन हैक किए गए थे. लेकिन हैक किए गए फोन में से क्या चुराया गया, किस तरह की तस्वीरें या अन्य सामग्री चुराई गई, यह पता नहीं चल सकता.

देखिए, ये हैं सबसे सुरक्षित देश

डिजिटल अधिकारों के लिए काम करने वालीं वकील वृंदा भंडारी कहती हैं कि मोबाइल फोन में "बेहद निजी सामग्री होती है,” इसलिए महिलाओं पर इस तरह के हैक का प्रभाव ज्यादा हो सकता है. वह कहती हैं, "जब महिलाओं के फोन हैक किए जाते हैं तो सिर्फ उनकी निजता का उल्लंघन नहीं होता, बल्कि यह उनकी शारीरिक निष्ठा का भी उल्लंघन है, जो शारीरिक हिंसा जैसा ही है.”

वीके/एए (रॉयटर्स)

 

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