दिल्ली में फिर खुले स्कूल, मां बाप परेशान | दुनिया | DW | 13.11.2017
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दुनिया

दिल्ली में फिर खुले स्कूल, मां बाप परेशान

बच्चों को परीक्षा के लिए तैयार करें या फिर उनकी सेहत का ध्यान रखें, राजधानी दिल्ली में इन दिनों माता पिता इसी जद्दोजहद से गुजर रहे हैं.

स्मॉग से परेशान दिल्ली की तस्वीरों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी खूब ध्यान खींचा है. डॉक्टरों ने इसे मेडिकल इमरजेंसी बताया, तो राज्य सरकार ने स्कूल बंद करने की घोषणा की. अब एक बार फिर स्कूल तो खुल गये हैं लेकिन हवा के हालात अब भी सुधरे नहीं हैं. ऐसे में माता पिता को बच्चों की सेहत की चिंता सता रही है. अभिभावकों का कहना है कि सरकार बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रही है.

ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, "प्रदूषण के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है. अगर स्थिति वही है, तो कदम भी वही होना चाहिए. तो फिर स्कूलों को अभी खोला क्यों जा रहा है?" दिल्ली सरकार का कहना है कि स्कूलों को बंद रखने से आने वाली परीक्षा पर असर पड़ेगा, इसलिए उन्हें दोबारा खोले जाने के आदेश दिये गये हैं. लेकिन अग्रवाल इससे खासे नाराज नजर आते हैं. वह कहते हैं, "एक तरफ तो सरकार इसे मेडिकल इमरजेंसी कह रही है और दूसरी तरफ वह बच्चों की सेहत के साथ खेल रही है. हमें बहुत तकलीफ होती है जब हम अपने बच्चों को खांसते हुए स्कूल जाते देखते हैं." हालांकि गुरुग्राम में स्कूलों को बंद कया गया है. 

सोमवार को पीएम 2.5 का स्तर 500 पहुंच गया. विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचओ के अनुसार 300 से अधिक का स्तर सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है. हवा में मौजूद ये छोटे छोटे कण सांस के साथ फेंफड़ों में चले जाते हैं और नतीजा दमे और दिल से जुडी बीमारियां के रूप में दिखता है. डॉक्टरों के अनुसार बच्चों को इससे ज्यादा खतरा है. 2015 में हुई एक रिसर्च बताती हैं कि दिल्ली में हर दस में से चार बच्चों के फेफड़े बुरी तरह खराब हैं. दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अजय लेखी बताते हैं, "सच्चाई यही है कि बच्चों को बड़ों की तुलना में प्रदूषण से अधिक खतरा है. वे शरीर के भार के अनुरूप सांस लेने के दौरान ज्यादा हवा अंदर लेते हैं, इसलिए उन पर प्रदूषण का असर भी ज्यादा होता है."

एक अन्य सर्वे के अनुसार दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है. भारत में हालांकि चर्चा केवल दिल्ली पर ही हो रही है लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि देश के और भी कई शहरों के हालात दिल्ली जैसे ही हैं. लखनऊ और कानपुर में भी पीएम 2.5 की मात्रा दिल्ली के स्तर के आसपास ही है. लेकिन वहां स्कूलों को बंद नहीं किया गया है.

आईबी/एके (एएफपी, रॉयटर्स)

 

 

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