कोरोना के डर से रोबोट बन जाएंगे बॉलर: वसीम अकरम | खेल | DW | 10.06.2020
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खेल

कोरोना के डर से रोबोट बन जाएंगे बॉलर: वसीम अकरम

कोरोना संक्रमण के डर से पहले क्रिकेट के मैच बंद हुए. अब जब दोबारा शुरू हो रहे हैं, तो नए नियम आ गए हैं. बॉलर अब बॉल को थूक लगा कर चमका नहीं पाएंगे.

कोरोना वायरस हमारी जिंदगी को बदल रहा है. सिर्फ मास्क और दस्ताने ही नहीं, जीने के तरीकों में और भी बहुत बदलाव आ रहे हैं. अब लोग एक दूसरे से हाथ नहीं मिलाते, गले नहीं मिलते, भीड़ भाड़ वाली जगह पर जाने से पहले दो बार सोचते हैं. खेल की दुनिया पर भी इसका असर हो रहा है. पहले फुटबॉल खिलाड़ियों को फील्ड में थूकने से मना किया गया और अब क्रिकेट पर भी कोरोना का असर होता दिख रहा है.

भविष्य के मैचों में आप बॉलर को बॉल पर थूक लगाते नहीं देख पाएंगे. क्रिकेट में बॉलर अकसर स्विंग कराने के लिए ऐसा करते हैं. बॉल इससे चिकनी हो जाती है और अच्छे से घूमती है. लेकिन कोरोना के डर से खिलाड़ियों को अपनी यह आदत बदलनी पड़ेगी. पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम का कहना है कि ऐसे में खेल में मजा ही नहीं आएगा. उन्होंने कहा, "बॉलर रोबोट बन जाएंगे. आएंगे और बिना स्विंग के बॉल कराएंगे."

Pakistan Cricket Wasim Akram

वसीम अकरम

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड आईसीसी ने कुछ वक्त के लिए यह रोक लगाई है. हालांकि इसे कब हटाया जाएगा इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है. समाचार एजेंसी एएफपी से बात करते हुए अकरम ने कहा, "मेरे लिए यह असमंजस वाली स्थिति है क्योंकि मैं थूक लगा कर ही बॉल को चमकाते और स्विंग करते हुए बड़ा हुआ हूं."

अकरम ने कहा कि खिलाड़ियों को अब खेल के नए तरीके की आदत डालनी होगी और बॉल के साथ धीरज रखना होगा, "इस मुश्किल दौर में मैं सतर्क रहने के पूरे हक में हूं लेकिन अब बॉलरों को बॉल के पुराने होने और खुद ही स्विंग करने लायक बनने का इंतजार करना पड़ेगा." वैसे, आईसीसी ने सिर्फ थूक लगाने पर ही रोक लगाई है, पसीना लगाने पर नहीं. खिलाड़ी आगे भी पसीना लगा कर बॉल को स्विंग करा सकेंगे.

लेकिन अकरम ने कहा कि सिर्फ पसीने से काम नहीं चल पाएगा क्योंकि कुछ देशों में इतनी ठंड होती है कि खेल के दौरान बहुत पसीना भी नहीं आता है. साथ ही पसीने से बॉल में वो बात नहीं आ पाएगी जो थूक से आती है, "पसीना एक तरह का ऐड ऑन है कि कुछ नहीं तो वही इस्तेमाल कर लिया. लेकिन पसीना ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो बॉल गीली हो जाएगी." ऐसे में खिलाडियों को बॉल के पुराने होने का ही इंतजार करना होगा.

बॉलरों की मदद के लिए अकरम ने कृत्रिम पदार्थों के इस्तेमाल की पैरवी भी की. उन्होंने कहा कि क्रिकेट बोर्ड को इस दिशा में सोचने की जरूरत है, "मुझे लगता है कि उन्हें एक उचित समाधान ढूंढना होगा. वैसलीन जैसे पदार्थों का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन सवाल उठता है कि कितना?"

कोरोना महामारी के कारण क्रिकेट के मैच भी बंद थे लेकिन जून के अंत में इंग्लैंड और वेस्ट इंडीज के बीच होने वाली टेस्ट सीरीज के साथ एक बार फिर मैचों की शुरुआत होने जा रही है. अकरम ने कहा, "देखना होगा. इस सीरीज से पता चलेगा कि कैसा रहता है. मैंने ऐसा कुछ पहले कभी अनुभव नहीं किया है."

उन्होंने बॉल के साथ छेड़छाड़ को ले कर नए नियम बनाने के बारे में भी कहा, "आप बॉल को कब टैंपर कर सकते हैं? शुरू में, पहले ओवर से ही या फिर 20-25 ओवर हो जाने के बाद? उन्हें (बोर्ड को) इस बारे में बैठ कर सोचना होगा." सीरीज जैसी भी रहे लेकिन अकरम का मानना है कि बॉलरों के लिए यह कोई अच्छा बदलाव नहीं है. उनके अनुसार, "गेम तो अभी से ही बल्लेबाज के पक्ष में है."

आईबी/सीके (एएफपी)

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