क्यों नष्ट कर देते हैं रिटेलर्स अपने सामान | दुनिया | DW | 14.02.2020
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दुनिया

क्यों नष्ट कर देते हैं रिटेलर्स अपने सामान

खुदरा व्यापारी हर साल अरबों यूरो के नए कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों को नष्ट कर रहे हैं. यूरोप के सांसद वस्तुओं को ऐसे नष्ट किए जाने पर जल्द से जल्द कानून लाना चाहते हैं. यह प्रक्रिया पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है.

फ्रांस ने खाद्य पदार्थों की बर्बादी पर रोक लगा दी है. ऐसा करने वाला वो दुनिया का पहला देश बन गया है. फरवरी के पहले हफ्ते में यहां की संसद ने खाद्य पदार्थों के अलावा बाकी चीजों की बर्बादी करने पर भी रोक लगाने फैसला लिया. जर्मनी की पर्यावरण मंत्री स्वेन्या शुल्त्स भी नए सामानों को नष्ट किए जाने के खिलाफ हैं. इसे रोकने के लिए आने वाले दिनों में जर्मनी में भी कानून बनाए जाने की तैयारी की जा रही है. मीडिया में एचएनएम और बरबरी जैसी बड़े फैशन कंपनियों में उपयोग के काबिल सामान को अपने वेयरहाउस में जलाए जाने की रिपोर्ट आने के बाद जर्मनी और फ्रांस के पर्यावरण मंत्रालय ने इन कंपनियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

अमेजन, सालांडो और ऑटो जैसे ऑनलाइन रिटेल प्लेटफॉर्म कई कंपनियों का सामान एक ही जगह बेचते हैं. ऐसी वेबसाइट पर लगाम लगाने के लिए नियम लाना जरूरी है. फैशन की दौड़ में यह आर्थिक मॉडल जरूरत से ज्यादा सामान बना रहा है जो किसी के लिए उपयोगी नहीं है. फ्रांस की अल्मा ड्यूफोर सामान की बर्बादी के खिलाफ अभियान चलाती हैं. वह कहती हैं, "सामान फिर से बेचने के बजाय इसे नष्ट कर दिया जाता है. यह पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है." वहीं कुछ देश हैं जो रिटेल के कचरे से निपटने का लगातार प्रयास कर रहे हैं. पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोगों के सामने चुनौती दूसरी है, बड़ी कंपनियां के लिए ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके तहत वे बताएं कि कितना सामान नष्ट करते हैं. 

नष्ट सामान का डाटापाना मुश्किल

यूरोपीय संघ में शामिल देश हर साल कितना सामान नष्ट करते हैं इसका सही अनुमान किसी भी देश की सरकार के पास नहीं है, लेकिन फ्रांस और जर्मनी की सरकार ने हाल ही में एक अनुमान प्रकाशित किया है. इस अनुमान के मुताबिक 2014 में फ्रांस में कंपनियों ने 63 करोड़ यूरो और 2010 में जर्मनी में कंपनियों ने 700 करोड़ यूरो का सामान नष्ट किया. फ्रांस और यूरोपीय संघ के खुदरा व्यापार पर किए कई अध्ययन अलग अलग प्रकार के सामानों के नष्ट होने के प्रतिशत का सिर्फ अनुमान लगाते हैं लेकिन सार्वजनिक लेखांकन की कमी इनको सत्यापित करना असंभव बना देती है. जिससे भ्रम की स्थिति पैदा होती है.

सामान की बर्बादी पर फ्रांस की सरकार की वेबसाइट जहां 80 करोड़ यूरो का आंकड़ा पेश करती है तो वहीं पर्यावरण मंत्रालय 63 करोड़ यूरो का. लेकिन पर्यावरणविदों के मुताबिक आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है. जर्मनी की लेखिका और जर्मन सोशल एंटरप्राइजेज इनाचुरा की संस्थापक यूलियाना क्रोनन के मुताबिक, "जर्मन सरकार ने 700 करोड़ यूरो के सामान की बर्बादी के जो आंकड़े दिए हैं वह पर्याप्त नहीं हैं लेकिन किसी और के पास कोई दूसरा आंकड़ा भी नहीं है."

पारदर्शिता की कमी

बड़े ऑनलाइन रिटेलर जांच के दायरे में आ गए हैं क्योंकि ग्राहक ऑनलाइन शॉपिंग को तरजीह दे रहे हैं. जो सामान ग्राहकों को नहीं चाहिए वह पैकेज वापस भेज दिया जाता है. इएचआई रिटेल इंस्टीट्यूट ने जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्विट्जरलैंड की कंपनियों का सर्वेक्षण किया. जिसमें पाया गया कि वापस लौटे 70 प्रतिशत सामान को नए सामान के तौर पर बेचा जाता है लेकिन बाकी 30 प्रतिशत सामान का क्या होता है इस बारे में नहीं बताया गया.

ब्रिटेन में दान करने वाली संस्थाओं के सर्वेक्षण में पाया गया कि पैकेज की बर्बादी सिर्फ ग्राहक के पैकेज वापस करने से ही नहीं होती. बीसीजी रिपोर्ट के मुताबिक जर्मनी में आपूर्ति श्रृंखलाओं से बाहर निकलने वाले दो से तीन प्रतिशत उत्पाद मुख्य रूप से दोषपूर्ण पैकेजिंग, मिसलेबलिंग, ज्यादा उत्पादन और पुराने उत्पादों की जगह नए सामान का बाजार में लॉन्च होना है. वहीं 2019 में बामबैर्ग विश्वविद्यालय के अध्ययन में पाया गया कि 3.9 प्रतिशत वापस लौटे पैकेजों को नष्ट किया गया.

कंपनियां कितना सामान बर्बाद करती हैं इसका ब्यौरा भी नहीं देती. सालांडो और ऑटो कंपनियों के मुताबिक वापस आए सामान का केवल एक प्रतिशत हिस्सा नष्ट किया जाता है. वहीं जर्मनी की अमेजन कंपनी की प्रवक्ता ने नष्ट किए सामान का प्रतिशत तो नहीं बताया लेकिन वह कहती हैं, "जब कोई विकल्प नहीं बचता तभी वापस आए सामान को रिसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है या कूड़ेदान में." फ्रांस में भी अमेजन ने 2019 में कहा था कि जो सामान नहीं बिकता उसके छोटे से हिस्से को ही नष्ट किया जाता है.

अच्छे सामान को भी जला देना

ब्रिटिश फैशन कंपनी बरबरी ने 2018 में 3.8 करोड़ यूरो के बैग और परफ्यूम को नष्ट कर दिया था, जिसके बाद उसे  सार्वजनिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. इसके बाद कंपनी ने सामान को नष्ट करना बंद कर दिया. स्वीडन की फैशन कंपनी एचएनएम पर भी 2017 में ऐसा आरोप लगा. जब कंपनी ने शहर के बिजली संयंत्र में कपड़े जला दिए. कंपनी की दलील थी कि यह कपड़े दोबारा इस्तेमाल होने लायक नहीं थे. कंपनी के जर्मनी के प्रवक्ता का कहना है, "हमारे लिए पहनने योग्य और सुरक्षित उत्पादों को नष्ट करना विकल्प नहीं है." कंपनी ने यह नहीं बताया कि अब तक कितना सामान नष्ट किया गया है.

तेजी से ऑनलाइन होते जा रहे फैशन उद्योग को अच्छे खासे सामानों को आग लगाने के लिए आलोचनाओं का सामना करना पड़ता है. पर्यावरण पर काम कर रहे लोगों का कहना है कि हाई एंड लेबल अपने सामान को काला बाजारी से बचाने के लिए नष्ट करते हैं. पर्यावरणविदों का कहना है कि ऐसे कुछ क्षेत्र हैं जिनसे निपटने की जरूरत है. जो उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा खरीदते है और खुदरा विक्रेता जो उपयोग के काम आने वाले सामानों को नष्ट करते हैं. यह दोनों ही पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इनको सुधारा जा सकता है. जर्मनी की सामाजिक संस्था इनाचुरा को अमेजन जैसी कंपनियों से खुदरा उत्पाद मिलता है. यह संस्था इस सामानों को दान में जरूरतमंदों को देती है लेकिन ऐसे दान पर भी सरकार भारी टैक्स लगा रही है. जिसका मतलब है कि कंपनियों के लिए सामान नष्ट करना, दान करने से सस्ता पड़ता है. दान की प्रक्रिया को आसान करने से सामाजिक लाभ होगा लेकिन यह उद्योगों के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में ज्यादा मदद नहीं करेगा. जर्मनी में ग्रीनपीस की कार्यकर्ता वोयला वोल्गमुथ कहती हैं, "आप सामान से छुटकारा पाने के लिए दान का रास्ता अपना सकते हैं लेकिन यह ओवर प्रोडक्शन की समस्या को हल नहीं करेगा."

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