ऐसा सिरदर्द जो खुदकुशी को सोचने के लिए मजबूर कर दे | विज्ञान | DW | 25.04.2022

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विज्ञान

ऐसा सिरदर्द जो खुदकुशी को सोचने के लिए मजबूर कर दे

सिरदर्द सिर्फ एक ही तरह का नहीं होता बल्कि कई प्रकार का होता है. तेज दर्द भी व्यक्ति को आत्महत्या के बारे में सोचने पर मजबूर कर देता है. इसे 'सुसाइड हेडेक' कहा जाता है. जानइए, डाएन वॉटरलोस की कहानी.

माइग्रेन एक तरह की सिरदर्द की बीमारी है. बेलोर यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के फ्रेडरिक फ्राइटाग के मुताबिक जब माइग्रेन का दर्द होता है तो मस्तिष्क की कोशिकाएं विद्युत तरंगें पैदा करती हैं जो पूरे दिमाग में फैल जाती हैं. इनके कारण प्रोस्टाग्लैंडिंस और सेरोटोनिन स्रावित होते हैं और इससे रक्त नलिकाएं फैल जाती हैं, जो सिर में तेज दर्द का कारण होता है. वहीं कुछ सिरदर्द बेहद खतरनाक होते हैं. 

माइग्रेन ट्रस्ट के मुताबिक एक हजार में से एक व्यक्ति को ऐसा सिरदर्द हो सकता है जो आत्महत्या वाले विचारों को जन्म दे सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक यह एक बुनियादी स्नायविक समस्या हो सकती है और गंभीर दर्द यानी गंभीर सिरदर्द से पीड़ित व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर सकती है.

डायने वॉटरेलोस का जटिल मामला

डाएन वॉटरलोस के सिर में इतना तेज दर्द होता है कि उन्हें लगता है कि उनकी आंखों में किसी ने स्क्रूड्राइवर डाल दिया है और उसे घूमा दिया है. ये कोई सामान्य सिरदर्द नहीं है. ये एक तरह के "क्लस्टर सिरदर्द" होते हैं जो आम तौर पर एक आंख के पीछे इस तरह के अत्यधिक दर्द का कारण बनते हैं. डॉक्टर इस दर्द की तुलना बिना एनेस्थीसिया के अंग के काट दिए जाने से करते हैं.

वीडियो देखें 07:38

तनाव का शरीर पर असर

कुछ को इस तरह का दर्द कभी-कभार ही होता है, लेकिन वॉटरलोस ने लगभग एक दशक तक लगातार ऐसे दर्द सहते हुए अपनी जिंदगी बिताई है. हाल ही में अस्पताल में रहने के दौरान उनके बाल आंशिक रूप से काटने पड़े थे. दर्द को कम करने के लिए 31 साल की उम्र में उनके 12 ऑपरेशन हो चुके थे.

यह सब तब शुरू हुआ जब वह 14 साल की थीं. वह एक "बहुत खुश" रहने वाली किशोरी थीं. वह याद करती हैं कि पहली बार उन्हें गले में बिजली के झटके महसूस हुए. उन्होंने इन संकेतों को नजरअंदाज कर दिया क्योंकि उनका छोटा भाई अन्य किसी बीमारी से ग्रस्त था और वो अपने माता-पिता को परेशान नहीं करना चाहती थीं.

दर्द के साथ जीवन

दर्द के बावजूद वॉटरलोस ने जीवन जारी रखा. वह यात्राएं, पार्टियां और पढ़ाई करती रहीं. आखिरकार उन्हें एक ऐसा व्यक्ति मिला जिसके साथ वह जीवन गुजारना चाहती थीं. 19 साल की उम्र में ही उन्होंने शादी कर ली. फिर 2013 में एक दिन उन्हें इतना भयानक दर्द हुआ कि वह जमीन पर गिर गईं.

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वह बताती हैं, "उस दिन मैंने अपने पति की आंखों में तनाव देखा था. मैं उससे इस बीमारी को छिपाकर नहीं रख सकती थी.” उसके बाद वॉटरलोस का कोई दिन आराम का नहीं गुजरा. कुछ ही हफ्तों में उनका वजन 15 किलो कम हो गया और उन्होंने बाहर जाना बंद कर दिया. फिर एक दिन उनकी टांगें जवाब दे गईं. आखिरकार उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां बताया गया कि उन्हें क्लस्टर हेडेक नामक बीमारी है.

वॉटरलोस कहती हैं, "उस दिन मुझे लगा कि मेरा दर्द में होना नाजायज नहीं था. और यह भी कि आखिरकार मेरा इलाज हो सकेगा.” लेकिन बीस अलग-अलग तरह के इलाज भी उनको राहत नहीं पहुंचा सके. किसी भी तरह दर्द से राहत की कोशिश में उन्होंने सर्जरी का विकल्प चुना. लेकिन 12 अलग-अलग ऑपरेशन होने के बाद भी उन्हें कोई आराम नहीं पहुंचा.

वीडियो देखें 04:00

माइग्रेन जैसे क्रॉनिक सिरदर्द से छुटकारा दिलाने वाली थेरेपी

वॉटरलोस कहती हैं, "उन ऑपरेशनों ने मुझे काट-छांट के अलावा कुछ नहीं दिया.” वॉटलोस को यह डर भी हो गया कि कहीं वह मां बनने की क्षमता ना खो दें. फर्टिलिटी इलाज के जरिए वह मां बनीं. उन्हें एक बेटा हुआ. बाद में उन्हें एक बेटी भी हुई जिसका नाम मिरैकल रखा गया.

इंस्टाग्राम से राहत

वॉटरलोस ने जब अपनी कहानी इंस्टाग्राम पर साझा करनी शुरू की तो उन्हें कुछ राहत मिली. वह बताती हैं, "मैंने जाना कि मैं अपनी बीमारी के बारे में बात करके बहुत से लोगों की मदद कर रही हूं. यह मेरे लिए सबसे अच्छी थेरेपी थी.”

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वॉटरलोस की एक किताब भी प्रकाशित हो चुकी है, जिसका शीर्षक हैः मेस मॉक्स एन कलेरस (रंगों में मेरा दर्द). वह कहती हैं, "मैंने अपने दर्द को अपनी ताकत बना लिया है.”

फिलहाल दर्द के राहत के लिए वह सुमाट्रिपटैन के टीके लेती हैं और दर्द के खिलाफ उनकी जंग जारी है. उनकी इस बीमारी का सही निदान होने में काफी समय लग गया. समस्या ये है कि क्लस्टर सिरदर्द के पीड़ितों के साथ इसी तरह से होता है. वॉटरलोस का कहना है कि कुछ वीकेंड काफी खुशनुमा होते हैं और कुछ में तो वह खड़ी भी नहीं हो पाती हैं लेकिन उनके पति और परिवार वाले उनकी देखभाल करने की पूरी कोशिश करते हैं.

एए/वीके (एएफपी)

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