ऑक्टोपस ने खोले गहरी नींद के राज | विज्ञान | DW | 29.03.2021
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विज्ञान

ऑक्टोपस ने खोले गहरी नींद के राज

आठ पैरों, तीन दिल और नीले खून वाले जीव ऑक्टोपस के बारे में वैसे तो बहुत सारी बातें अजीबोगरीब लग सकती हैं. अब रिसर्चरों को पता चला है कि ऑक्टोपस भी इंसानों की तरह सोता और सपने देखता है.

ब्राजील के रिसर्चरों ने पाया है कि बेहद बुद्धिमान अकशेरुकी प्राणी ऑक्टोपस भी दो तरह की नींद में सोता है. उसकी दो तरह की नींद को रिसर्चर इंसानों की हल्की और गहरी नींद से बहुत मिलता जुलता बता रहे हैं. स्टडी में उन्हें पता चला कि ऑक्टोपस इंसान की तरह सपने भी देखता है.

ऑक्टोपस की न्यूरोबायोलॉजी को पहले से ही बहुत जटिल और विकसित माना जाता है. इस रिसर्च से पता चला कि उस जटिल न्यूरोलॉजी का असर सीधे सीधे उसके बर्ताव पर भी देखा जा सकता है. नींद पर ऐसे ही एक असर का शोधकर्ताओं ने विस्तार से अध्ययन किया.

इस स्टडी में ऑक्टोपस इन्सुलेरिस नामकी किस्म पर लैब में अध्ययन किया गया. यह तो पहले से ही जाना जाता है कि जब ये जीव सोते हैं तो उनके शरीर का रंग बदल जाता है. इस स्टडी में रिसर्चरों ने देखा कि नींद के चरणों की तरह उसके रंगों का बदलना भी दो तरह का होता है.

Octopus vulgaris Tarnung Camouflage

ऑक्टोपस वल्कीगारिस के आंखों की पुतली.

"शांत नींद" के दौरान ऑक्टोपस बिलकुल हिलता डुलता नहीं, उसकी त्वचा पीली सी पड़ जाती है और आंखों की पुतली सिकुड़ कर एक पतली दरार जैसी नजर आती है. वहीं "सक्रिय नींद" की अवस्था में वह लगातार अपनी त्वचा का रंग और उसके उभार बदलता रहता है. इस चरण में शरीर की मांसपेशियां सिकोड़ने के साथ साथ वह अपनी दोनों आंखें भी हिलाता है. इस तरह का चक्र नींद में कई बार दोहराया जाता है. "शांत नींद" जहां आमतौर पर सात मिनट लंबी होती है, तो वहीं "सक्रिय नींद" आमतौर पर एक मिनट से छोटी ही होती है.

कैसी नींद में आते हैं सपने

इंसानों और कुछ अन्य स्तनधारियों समेत पक्षियों और सरीसृपों की नींद भी दो प्रकार की होती है. इन दो प्रकारों को रैपिड आई मूवमेंट (आरईएम) और नॉन रैपिड आई मूवमेंट (नॉन-आरईएम) कहा जाता है. इस स्टडी के रिसर्चरों का मानना है कि ऑक्टोपस में भी बिल्कुल ऐसे ही दो प्रकार देखे गए.

सपने देखते समय इंसान 'आरईएम स्लीप' यानि रैपिड आई मूवमेंट वाली नींद में होता है. इस समय आंखें खूब इधर उधर हिलती हैं, सांसें बराबर नहीं चलतीं, दिल की धड़कन बढ़ जाती है और मांसपेशियों को जैसे लकवा-सा मार जाता है, ताकि शरीर सपने के हिसाब से हरकतें ना करने लगे. वहीं दूसरी ओर, नॉन-आरईएम नींद के दौरान नींद गहरी होती है और सपने कम ही आते हैं.

ब्राजील की इस स्टडी की मुख्य लेखिका सिल्विया मिदाइरोस ने बताया कि ऑक्टोपस भी या तो सपने देखते हैं या तो उन्हें उससे काफी मिलता जुलता कोई अनुभव होता है. उन्होंने कहा, "अगर वाकई ऑक्टोपस सपने देखते हैं, तो भी वे इतनी जटिल सांकेतिक कहानियों वाले नहीं होते." ब्रेन इंस्टीट्यूट ऑफ रियो ग्रांदे दो नॉर्ते से जुड़ी न्यूरोसाइंस की रिसर्चर कहती हैं कि अगर अधिकतम एक मिनट की 'आरईएम स्लीप' के दौरान ऑक्टोपस सपने देखते हैं तो वे "किसी छोटी वीडियो क्लिप या जिफ जैसे होते होंगे."

दुनिया भर में लगातार नींद को बेहतर तरीके से समझने पर रिसर्च चल रही है. वैज्ञानिक यह भी जानना चाहते हैं कि नींद की शुरुआत और विकास कैसे हुआ होगा. ब्रेन इंस्टीट्यूट के संस्थापक और इस स्टडी के सह लेखक सिदार्टा रिबाइरो बताते हैं कि पूरे अकशेरुकी प्राणी जगत में ऑक्टोपसों का नर्वस सिस्टम सबसे सेंट्रलाइज्ड होता है, जिसके कारण उसमें अपने आसपास की जगह और समाज के बारे में सीखने और समस्या को सुलझाने की जबर्दस्त क्षमता होती है.

आरपी/आईबी (रॉयटर्स)