नीदरलैंड्स: कोविड लॉकडउन के दौरान हिंसा के बाद तनाव बढ़ा | दुनिया | DW | 27.01.2021
  1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages
विज्ञापन

दुनिया

नीदरलैंड्स: कोविड लॉकडउन के दौरान हिंसा के बाद तनाव बढ़ा

डच पुलिस ने हिंसा को काबू में रखने के लिए देशभर में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है. लगातार तीन रात देश में हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं. प्रदर्शनकारी रात के सख्त कर्फ्यू के खिलाफ विरोध कर रहे हैं.

नीदरलैंड्स में मंगलवार को स्थिति तनावपूर्ण बनी रही. डच सरकार ने कोरोना वायरस के नए संस्करण को रोकने के लिए कड़ी पाबंदियां लगाईं हैं जिसके खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. लगातार तीन रातों से कर्फ्यू के दौरान हिंसा, आगजनी और विरोध प्रदर्शन हुए. सरकार ने कोरोना वायरस महामारी को नियंत्रित करने के लिए रात के कर्फ्यू सहित कई नए प्रतिबंधों की घोषणा की है. पुलिस ने हिंसक दंगों को रोकने के लिए देश भर के कस्बों और शहरों की सड़कों पर मार्च किया, जबकि व्यवसाय जल्दी बंद हो गए और दुकानें भी समय से पहले बंद कर दी गईं.

मंगलवार की रात 9 बजे जब कर्फ्यू लागू हुआ तो हुड़दंग करने वाले कुछ युवा एम्स्टर्डम और हिलवेर्सुम में इकट्ठा हुए लेकिन उन्हें खदेड़ दिया गया. रॉटरडम में पुलिस ने 33 लोगों को सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं करने और तोड़फोड़ के आरोप में हिरासत में लिया. यह सोमवार की रात के बिल्कुल विपरीत था, जब देश भर में पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं थी. 180 लोगों को गाड़ियों में आग लगाने और लूटपाट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद नीदरलैंड में लगाए गए पहले राष्ट्रव्यापी कर्फ्यू के विरोध में राजधानी समेत कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं.

राष्ट्रीय पुलिस प्रमुख विलेम वोल्डर्स ने डच पब्लिक टेलीविजन को बताया, "कल के मुकाबले आज बिल्कुल दूसरी तस्वीर थी. हमें दंगा रोधी पुलिस या अन्य सुरक्षाबलों की जरूरत नहीं पड़ी." लेकिन उन्होंने आगाह किया कि एक रात की शांति का मतलब यह नहीं है कि वे सतर्क रहना छोड़ देंगे. वोल्डर्स ने कहा, "हमें सतर्क रहना होगा."

Niederlande I Proteste gegen Corona-Beschränkungen

उपद्रवियों ने दुकानों में लूटपाट की और गाड़ियों में आग लगाई.

सोशल मीडिया से भड़की हिंसा?

सरकार ने कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के प्रयास में कर्फ्यू और कुछ नए प्रतिबंधों की घोषणा की थी, जिसके बाद देशभर के कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए. सोशल मीडिया पर दुकानों में लूटपाट की तस्वीरें तेजी से वायरल हुई. एक तस्वीर में एक पत्रकार पर पथराव करते हुए देखा जा सकता है. प्रदर्शनकारियों ने पहली रात एक कोरोना परीक्षण केंद्र में भी आग लगा दी थी. हाल के सालों में नीदरलैंड्स में इस तरह की हिंसा नहीं देखी गई है. हिंसा की शुरूआत सख्त लॉकडाउन के खिलाफ हुई, जो कि मध्य दिसंबर के बाद से लागू है लेकिन सोशल मीडिया में घूम रहे संदेशों के कारण भीड़ द्वारा लूटपाट की घटना में यह तब्दील हो गई. सोमवार की रात को उपद्रवियों ने रॉटरडम और डेन बॉश में पुलिस पर पथराव किया, पटाखे छोड़े और दुकानों में लूटपाट की.

प्रधानमंत्री मार्क रुटे ने ट्वीट कर लिखा, "यह आपराधिक हिंसा बंद होनी चाहिए." उन्होंने कहा, "दंगों का आजादी के लिए संघर्ष करने से कोई लेना देना नहीं है. हमें एक साथ वायरस के खिलाफ लड़ाई जीतनी है, क्योंकि यह हमारी आजादी वापस पाने का एकमात्र तरीका है." देश के न्याय मंत्री फेर्ड ग्रेपरहॉस ने मंगलवार को कहा कि दंगा करने वाले जल्द ही कोर्ट में पेश किए जाएंगे और दोषी पाए जाने पर जेल की सजा पाएंगे.

देश में कर्फ्यू का समय रात 9 बजे से लेकर सुबह 4.30 बजे तक है और 10 फरवरी तक जारी रहने की उम्मीद है. कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों पर 8,400 रुपये के करीब का जुर्माना लगाया जा सकता है. नीदरलैंड्स में अब तक कोरोना वायरस के कारण 13,650 लोग मारे जा चुके हैं.

एए/सीके (एपी, रॉयटर्स, डीपीए)

DW.COM

संबंधित सामग्री

विज्ञापन