जब कोरोना पीड़ित के शव को श्मशान घाट लेकर पहुंचीं महिला सैनिक | दुनिया | DW | 01.12.2020
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दुनिया

जब कोरोना पीड़ित के शव को श्मशान घाट लेकर पहुंचीं महिला सैनिक

कोरोना काल में लोग अपनों को उनके अंतिम निवास तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं, आखिरी विदाई भी तमाम एहितयात के साथ हो रही हैं.

कोरोना काल में लोग जीते जी दूर हो रहे हैं और जब कोई मर जाता है तो मुट्ठी भर लोग उसे अंतिम विदाई देते हैं. असहाय मौतों पर लोग गमगीन हैं और कई बार तो मृतक को कंधा तक नहीं मिल पा रहा है. लेकिन नेपाल में चार महिला सैनिकों ने टैबू को तोड़ते रूढ़िवादी देश में नई मिसाल कायम की है.

पीपीई किट पहनी चार महिला सैनिकों ने नेपाल में कुछ ऐसा काम किया जो इस हिंदू बहुसंख्यक देश में सोच से भी परे है. इन चार महिला सैनिकों ने कोरोना के कारण मर चुके व्यक्ति के शव को कंधा दिया और उसके बाद उसे श्मशान घाट के कर्मचारियों को सौंप दिया. नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपति श्मशान घाट पर महिला सैनिकों ने उस सदियों पुरानी रीत को तोड़ डाला जिसका जिम्मा सिर्फ पुरुषों पर था. नेपाल जैसे रूढ़िवादी देश में सोच से भी परे है कि कोई महिला शव को हाथ लगाए. नेपाल में शव को महिलाओं द्वारा छूआ जाना अभी एक सांस्कृतिक निषेध है. लेकिन 2006 के बाद से नेपाल में महिलाओं के अधिकार को लेकर काफी सकारात्कमक कदम उठाए गए हैं. 

करीब तीन करोड़ की आबादी वाले देश में पहली बार काठमांडू में महिला सैनिकों को शव को कंधा देने के काम पर लगाया गया है. नेपाल कोरोना वायरस महामारी से जूझ रहा है और हाल यह है कि वहां शव को भी उठाने के लिए इंतजाम पर्याप्त नहीं है, ऐसे में वहां महिला सैनिक अंतिम संस्कार के कार्य के लिए तैनात की गई हैं.

नेपाल में महिला शक्ति को सलाम

महिला सैनिकों में से एक 25 वर्षीय रचना कहती हैं, "ऐसा करने का मौका मिलने पर मैं खुद को सौभाग्यशाली और खुश महसूस कर रही हूं, यह ऐसा काम है जो अब तक केवल पुरुष ही किया करते थे. समाज बदल रहा है.. मैं अपने परिवार के पास नहीं गई हूं जब से मैंने यह नई ड्यूटी शुरू की है, लेकिन मेरे दोस्त खुश हैं. वे मेरा शुक्रिया अदा करते हैं. वे कहते हैं कि तुमने एक कठिन काम को किया है और साथ ही अपने को भी सुरक्षित रखा है. यह सुनकर मैं बहुत खुश हूं."

पिछले महीने महिला सैनिकों ने ड्यूटी के पहले दिन छह शवों को अस्पताल से श्मशान घाट तक पहुंचाया था. नेपाली सेना के प्रवक्ता संतोष बी पौड्याल कहते हैं कि सेना महिलाओं को नई भूमिका में डाल रही है. यह उन्हें सशक्त करने के कार्यक्रम का हिस्सा है. पौड्याल कहते हैं, "इससे पहले तक महिलाओं को युद्ध वाली ड्यूटी में तैनात किया जाता रहा है, अस्पताल में उनसे काम लिया गया है, लेकिन यह पहली बार है कि वे शवों को अंतिम विदाई देने के काम में लगाई गईं हैं. अस्पतालों से शवों को लेना और उन्हें श्मशान घाट तक पहुंचाना. आप कह सकते हैं कि यह एक नई पहल है."

नेपाल में सेना पूरे देश में कोरोना वायरस वाले शवों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है. पशुपति श्मशान घाट में सफेद कफन में 58 वर्षीय व्यक्ति का शव लिपटा हुआ रखा है, रिश्तेदार दूर से ही लोहे की बाड़ की दूसरी तरफ से गेंदे के फूल फेंक रहे हैं और अपने प्रिय को अंतिम विदाई दे रहे हैं. तीन अन्य शव वहां रखे हुए हैं, शवों पर नाम और उम्र वाला टैग लगा है. श्मशान घर में काम करने वाले देर रात तक काम करेंगे.

महिला सैनिकों के समूह की एक और सदस्य कृष्णा कुमारी कहती हैं, "शवों को निकालना मेरा कर्तव्य है और जो मैं कर रही हूं मुझे उसपर गर्व है." 37 वर्षीय सार्जेंट कहती हैं, "यह काम शारीरिक परिश्रम वाला है और हमने साबित कर दिया है कि महिलाएं महामारी के दौरान कठिन कार्य करने में सक्षम हैं."

एए/आईबी (रॉयटर्स)

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