नासा का सैटेलाइट करेगा पृथ्वी और अंतरिक्ष की सीमा की खोज | दुनिया | DW | 11.10.2019
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दुनिया

नासा का सैटेलाइट करेगा पृथ्वी और अंतरिक्ष की सीमा की खोज

नासा का सैटेलाइट पृथ्वी और अंतरिक्ष की सीमा पर रहस्य में लिपटी चीजों का पता लगाएगा. यह वह जगह है जहां ऊपर और नीचे की ऊर्जा अंतरिक्ष मिशन से लेकर रेडियो और जीपीएस संचार तक सब कुछ प्रभावित करती है.

नासा ने गुरुवार को आयनमंडल के बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए एक सैटेलाइट लॉन्च किया है. यह वह रहस्यमयी जगह है जहां धरती का वातावरण समाप्त होता है और अंतरिक्ष की शुरुआत होती है. अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा के तट पर अटलांटिक महासागर के ऊपर से उड़ान भरते हुए सैटेलाइट को इस कक्षा में प्रवेश कराया गया. सैटेलाइट का नाम आइकॉन (आयनोस्फेरिक कनेक्शन एक्सप्लोरर) है. नासा ने बताया कि यह सैटेलाइट उस जगह का डाटा संग्रह करेगा जहां पृथ्वी का वातावरण अंतरिक्ष (नियर अर्थ स्पेस) से मिलता है. इस डाटा से वैज्ञानिकों को वहां की प्रक्रिया समझने में मदद मिलेगी. नासा के वैज्ञानिकों ने शोध कर इस जगह की पहचान 'नियर स्पेस' के रूप में की है जिसके ऊपर सौर तूफान आते हैं और नीचे में मौसम बदलता रहता है.

नासा के अनुसार आयनमंडल इलेक्ट्रॉनों, आवेशित परमाणुओं और अणुओं की एक उतार-चढ़ाव वाली परत है. यह पृथ्वी की सतह से 48 किलोमीटर (30 मील) और अंतरिक्ष की सीमा से 965 किलोमीटर (600 मील) की दूरी का क्षेत्र है. यह क्षेत्र सूर्य की स्थिति के आधार पर फैलता और सिकुड़ता रहता है. नासा का कहना है कि आइकॉन सैटेलाइट से मिलने वाला डाटा वैज्ञानिकों के रहस्यमयी आयनमंडल के बारे में और ज्यादा समझने में मदद करेगा. नासा के हेलियोफिजिक्स विभाग के निदेशक निकोला फॉक्स कहते हैं, "यह संरक्षित परत हमारे वातावरण का सबसे ऊपरी हिस्सा है. इसके बाद अंतरिक्ष की शुरूआत होती है. सौर तूफान के साथ आयनमंडल पृथ्वी पर होने वाले हरिकेन जैसे तूफानों से निकलने वाली उर्जा से भी प्रभावित होता है."

नासा के अनुसार आयनमंडल में मौजूद इलेक्ट्रॉन के कण रेडियो तरंगों को वापस जमीन की ओर भेजते हैं. इसी वजह से रेडियो के माध्यम से संचार हो पाता है. हालांकि इलेक्ट्रॉन के स्तर में उतार-चढ़ाव रेडियो संचार को ठप्प कर सकता है, जीपीएस सिस्टम की सटीकता को कम कर सकता है, उपग्रहों को नुकसान पहुंचा सकता है और पॉवर ग्रिड को नुकसान पहुंचा सकता है. नासा द्वारा लॉन्च किए गए सैटेलाइट से यह विश्लेषण करना आसान हो जाएगा कि सौर तूफानों का धरती पर क्या प्रभाव पड़ता है. यह अंतरिक्ष यात्रियों, रेडियो संचार और जीपीएस नेविगेशन सिस्टम को कैसे प्रभावित करता है. नासा के प्रशासक जिम ब्रिडेनस्टाइन ने एक ट्वीट कर कहा कि यह मिशन भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों को काफी सहायता प्रदान करेगा.

रिपोर्ट: वेस्ली रान

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