लॉकडाउन की मार से बचने के लिए ढाका छोड़ रहे प्रवासी मजदूर | दुनिया | DW | 28.06.2021

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दुनिया

लॉकडाउन की मार से बचने के लिए ढाका छोड़ रहे प्रवासी मजदूर

कोरोना वायरस का घातक वेरिएंट डेल्टा के फैलने के बाद बांग्लादेश में संपूर्ण लॉकडाउन लगने वाला है. ऐसे में राजधानी ढाका से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर गांव लौट रहे हैं.

बांग्लादेश की राजधानी ढाका से रविवार को प्रवासी मजदूरों की लौटने की नई तस्वीरें सामने आईं. देश अब एक कड़े लॉकडाउन की ओर बढ़ रहा है. कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण लॉकडाउन अधिकांश आर्थिक गतिविधियों पर अंकुश लगाएगा और लोगों को उनके घरों तक सीमित कर देगा.

कोरोना पॉजिटिव और मौतों की बढ़ती रिपोर्टों के बाद से ही अप्रैल के मध्य से गतिविधियों और आवाजाही पर प्रतिबंध लगा हुआ है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक मई में संक्रमणों की संख्या में गिरावट आई, लेकिन इस महीने फिर से बढ़ना शुरू हो गया. रविवार को देश में 5,000 से अधिक नए मामले सामने आए और 119 लोगों की मौत हुई.

नए मामले के सामने के बाद देश में चरणबद्ध तरीके से सोमवार से नई पाबंदियों के साथ आर्थिक गतिविधियों, दुकानों, बाजारों, परिवहन और कार्यालयों पर चरणों में प्रतिबंधों को सख्त करने के लिए सरकार को मजबूर किया है.

लॉकडाउन के तहत जनता को घरों में रहने का आदेश दिया जाएगा, जबकि केवल आपातकालीन सेवाओं और निर्यात वाले कारखानों का संचालन जारी रहेगा.

भाग रहे प्रवासी मजदूर

एक जुलाई से लगने वाला लॉकडाउन प्रवासी मजदूरों के लिए नई मुसीबत बन गया है. प्रवासी मजदूर जल्द से जल्द ढाका छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. रविवार को ही लाखों प्रवासियों के बीच ढाका छोड़ने की हड़बड़ी दिखी. 22 जून से ही विभिन्न शहरों के बीच सार्वजनिक परिवहन ठप्प है.

रविवार को गांव लौटने के लिए प्रवासी मजदूर ऑटोरिक्शा, मोटरसाइकिल और यहां तक की एंबुलेंस का सहारा लेते दिखे. नौका सेवाएं भी 24 घंटे काम कर रही हैं. नावों पर क्षमता से अधिक लोग सवार हो रहे हैं, कुछ-कुछ नावों पर हजार से अधिक लोग सवार हुए.

सब इंस्पेक्टर मोहम्मद रेजा कहते हैं, "हम नहीं चाहते कि लोग नावों में क्षमता से अधिक सवार हों लेकिन वे हमारी बात नहीं सुनते."

सरकार द्वारा संचालित बांग्लादेश अंतर्देशीय जल परिवहन निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एएफपी को बताया कि सिर्फ रविवार को कम से कम 50,000 लोगों ने नावों की मदद से यात्रा की.

शहर में रहकर क्या करेंगे?

ढाका से लगभग 70 किलोमीटर दक्षिण में ग्रामीण शहर श्रीनगर के नदी स्टेशन पर रविवार सुबह हजारों पद्मा नदी पार करने के लिए कतार में लगे. 60 साल की फातिमा बेगम ने कहा, "सिवाय शहर छोड़ने के हमारे पास कोई विकल्प नहीं है. लॉकडाउन के दौरान हमारे पास काम नहीं होता है. हम काम नहीं करेंगे तो किराया कैसे चुकाएंगे? इसलिए हमने सबकुछ बांध लिया है और गांव लौट रहे हैं."

ढाका में रेहड़ी लगाने वाले 30 साल के मोहम्मद मासूम कहते हैं कि ढाका में कैद रहने से अच्छा है कि गांव में अपने परिवार के पास रहें. बांग्लादेश में कुल संक्रमितों की संख्या आठ लाख 80 हजार के पार पहुंच गई है और 14,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि संभावित कम रिपोर्टिंग के कारण वास्तविक संख्या बहुत अधिक हो सकती है.

एए/वीके (एएफपी)

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