कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने की भारतीय पत्रकार की रिहाई की मांग | भारत | DW | 10.01.2022

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भारत

कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने की भारतीय पत्रकार की रिहाई की मांग

पत्रकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि कश्मीरी पत्रकारों को जेल से रिहा किया जाए.

न्यूयॉर्क स्थित कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने भारत सरकार से मांग की है कि पत्रकार सज्जाद गुल को फौरन रिहा किया जाए. गुल को पिछले दिनों तब गिरफ्तार कर लिया गया था जब उन्होंने सरकार विरोधी एक प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया था.

मीडिया की निगहबानी करने वाली संस्था सीपीजे ने शनिवार को कहा कि एक छात्र और स्वतंत्र पत्रकार सज्जाद गुल की गिरफ्तारी बहुत परेशान करने वाली खबर है और अधिकारियों को उनकी पत्रकारिता के खिलाफ चल रही जांच फौरन रोकनी चाहिए.

देशद्रोह का केस

भारतीय सुरक्षाबलो ने गुल को बुधवार रात उत्तर पूर्वी कश्मीर में शाहगंद स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था. उनके परिवार के मुताबिक उन्हें सेना के जवानों ने गिरफ्तार किया और फिर पुलिस को सौंप दिया. उससे दो दिन पहले सोमवार को गुल ने एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें मुठभेड़ में मारे गए एक उग्रवादी के परिजनों को विरोध प्रदर्शन करते देखा जा सकता था.

पहले पुलिस ने कहा था कि गुल को रिहा कर दिया जाएगा लेकिन शुक्रवार को उनके परिजनों को बताया गया कि उन पर राष्ट्रीय एकता के खिलाफ काम करने के मामले में देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो गया है. इस मामले में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद से लेकर मौत तक की सजा का प्रावधान है.

पत्रकारों पर पाबंदियां बढ़ीं

भारत में हाल के सालों में पत्रकारों के खिलाफ हिंसा और अधिकारियों द्वारा सख्ती के कई मामले में सामने आ चुके हैं. 2019 में भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किए जाने के बाद कश्मीरी पत्रकारों पर यातनाओं और प्रताड़ना के मामले भी बढ़े हैं. काफी पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया और उन आतंकवादी धाराओं में मामले दर्ज हुए.

चुने हुए पत्रकारों की संस्था कश्मीर प्रेस क्लब ने बार-बार भारत सरकार से आग्रह किया है कि उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए. उनका कहना है कि भारतीय सुरक्षाबलों द्वारा शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना प्रेस की आजादी पर हमला है.

वीके/एए (एपी, रॉयटर्स)