छह साल बाद मलाला पहली बार पाकिस्तान में | दुनिया | DW | 29.03.2018
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दुनिया

छह साल बाद मलाला पहली बार पाकिस्तान में

पाकिस्तान की नोबेल विजेता और लड़कियों की शिक्षा के लिए सक्रिय मलाला यूसुफजई छह साल बाद अपने देश लौटी हैं. वह पंद्रह साल की थीं जब तालिबान चरमपंथियों ने उनके सिर में गोली मारी थी और इलाज के लिए उन्हें देश छोड़ना पड़ा था.

मलाला गुरुवार तड़के पाकिस्तान लौटीं. 2012 में तालिबान के हमले का शिकार बनने के बाद य़ह पहला मौका है जब मलाला पाकिस्तान गई हैं. उन्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वह अपने ब्लॉग में लिखती थीं कि तालिबान के शासन में जिंदगी कैसी है.

अब मलाला ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं. वह अपने माता पिता के साथ पाकिस्तान गई हैं. उम्मीद है कि वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से मिलेंगी, हालांकि अधिकारियों का कहना है कि उनकी ज्यादातर मुलाकातों को गोपनीय ही रखा जाएगा. बताया जा रहा है कि वह पाकिस्तान में चार दिन रहेंगी.

पाकिस्तान में बहुत से लोग मलाला को "पश्चिम का एजेंट" कहकर उनकी आलोचना करते हैं. वहीं मलाला की वतन वापसी से कई लोग खुश हैं. एक सांसद सैयद रजा आबिदी ने ट्विटर पर लिखा, "पाकिस्तान की बहादुर और साहसी बेटी वापस अपने देश में आई है."

मलाला ने 2009 में बीबीसी की उर्दू सर्विस के लिए ब्लॉग लिखना शुरू किया था. उस वक्त उनकी उम्र 11 साल थी. उन्होंने दुनिया को बताया कि उस वक्त पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान के राज में लड़कियों के लिए पढ़ना कितना मुश्किल था. 9 अक्टूबर 2012 को तालिबान के बंदूकधारी मलाला की स्कूल बस में चढ़े. उन्होंने पूछा कि "मलाला कौन है" और फिर उनके सिर में गोली दाग दी.

इसके बाद उन्हें इलाज के लिए ब्रिटेन के बर्मिंघम ले जाया गया. महीनों के इलाज के बाद उन्होंने ब्रिटेन में अपनी स्कूली पढ़ाई को दोबारा शुरू किया. 2014 में वह दुनिया में सबसे कम उम्र में शांति का नोबेल जीतने वाली व्यक्ति बनीं. लड़कियों की शिक्षा के लिए मुहिम चलाने वाली मलाला को भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया.

एके/आईबी (एएफपी, रॉयटर्स)

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