ईरान: महिलाओं को राजनीतिक समानता का ′लंबा और कठिन′ रास्ता तय करना बाकी | दुनिया | DW | 10.06.2021
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दुनिया

ईरान: महिलाओं को राजनीतिक समानता का 'लंबा और कठिन' रास्ता तय करना बाकी

ईरान में अगले सप्ताह राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और वहां एक अति रूढ़िवादी की जीत से महिलाओं का राजनीतिक प्रतिनिधित्व और बदतर हो सकता है.

ईरान के न्यायतंत्र के प्रमुख इब्राहिम रईसी बाकी छह उम्मीदवारों के मुकाबले रूढ़िवादियों में पसंदीदा उम्मीदवार माने जा रहे हैं, जो मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी की जगह ले सकते हैं. आर्थिक और सामाजिक संकट से उपजे असंतोष के बीच ईरान के लोग 18 जून को राष्ट्रपति हसन रूहानी के उत्तराधिकारी का चुनाव करने जा रहे हैं. ईरान में महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने रूहानी की उस वादा खिलाफी की आलोचना की है, जिसमें उन्होंने महिला मंत्रालय बनाने और तीन महिला मंत्रियों को नियुक्त करने का वादा किया था.

इसके बजाय रूहानी ने अपने दो कार्यकालों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व में कमी ही की. रूहानी की निवर्तमान कार्यकारिणी में केवल दो महिलाओं को प्रतिनिधित्व का मौका मिला. महिलाओं और परिवारों की उपाध्यक्ष मासौमेह एबतेकर और कानूनी मामलों की उपाध्यक्ष लया जोनेदी को ही जिम्मेदारी सौंपी गई थी. ईरान में मंत्रिस्तरीय पदों के उलट उपाध्यक्ष के पदों के लिए संसदीय अनुमोदन की जरूरत नहीं होती है. और आलोचकों ने रूहानी पर आरोप लगाया कि वे नरमपंथियों के बहुमत के बावजूद, महिला मंत्रियों के नाम की सिफारिश संसद में पेश करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए. 

महिलाओं की राजनीति में अहमियत बहुत कम

पूर्व सुधारवादी सांसद इलाहेह कौलेई ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "ईरानी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती निर्णय लेने वाली संस्थाओं से उनकी पूरी तरह से गैरमौजूदगी से जुड़ी है."

18 जून को रूहानी की जगह लेने की होड़ में सात उम्मीदवारों में से किसी के लिए भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व प्राथमिकता नहीं है. अति रूढ़िवादी रईसी ने महिलाओं के मुद्दे पर बहुत ही कम ध्यान दिया है. रूहानी के अधूरे वादों की आलोचना तो उन्होंने की है लेकिन अपने इरादों को जाहिर किए बिना. पर्यवेक्षकों को अति-रूढ़िवादी मोहसिन रेजाई के वादों में कुछ खास दिखाई नहीं देता है. जिन्होंने "कम से कम दो महिला मंत्री" बनाने का वादा किया है, और सुधारवादी अब्दोलनासर हेममती ने "कम से कम एक" महिला मंत्री बनाने का वादा किया है. लेकिन संसद की मंजूरी के बगैर इस तरह के वादे के कोई मायने नहीं दिखते हैं. 

सुधारवादी महिला पार्टी की प्रमुख जहरा शोजाई कहती हैं कि ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वर्तमान में 290 में से सिर्फ 17 महिलाएं ही सांसद हैं. 1997 से 2005 तक महिलाओं के मामलों के लिए सुधारवादी अध्यक्ष मोहम्मद खतामी की सलाहकार के रूप में काम करने वाली शोजाई कहती हैं, महिलाओं की मान्यता की दिशा में सफर "लंबा और कठिन है." रईसी को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खमेनेई का करीबी माना जाता है. अनुमान लगाया जा रहा है कि उनके मुकाबले बाकी उम्मीदवार काफी कमजोर हैं.

एए/वीके (एएफपी)

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