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राजनीतिसंयुक्त राज्य अमेरिका

वेनेजुएला: अमेरिका ने जब्त किया रूसी झंडे वाला तेल टैंकर

आदर्श शर्मा एएनआई, रॉयटर्स | आयुष यादव एपी, एएफपी
प्रकाशित ७ जनवरी २०२६आखिरी अपडेट ७ जनवरी २०२६

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सिंगापुर में मौजूद बेला-1 जहाज
इस टैंकर को पहले 'बेला-1' के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर 'मारिनेरा' कर दिया गया है. यह वर्तमान में रूसी झंडे के साथ पंजीकृत है.तस्वीर: Hakon Rimmereid/REUTERS
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वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकर को जब्त करने की कोशिश कर रहा अमेरिका को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकर को जब्त करने की कोशिश कर रहा अमेरिका

सिंगापुर स्ट्रेट में जहाज का टैंकर बेला 1
अमेरिका नौसेना ने अटलांटिक में वेनेज़ुएला से जुड़े एक बैन किए गए तेल टैंकर पर कब्जा कर लिया हैतस्वीर: Hakon Rimmereid/REUTERS

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अटलांटिक महासागर में दो हफ्ते से अधिक समय तक चली लुका-छिपी के बाद अमेरिकी सेना और कोस्ट गार्ड अब वेनेजुएला से जुड़े एक तेल टैंकर को जब्त करने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह ऑपरेशन राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर लगाए गए समुद्री 'ब्लॉकेड' को सख्ती से लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

इस टैंकर को पहले 'बेला-1' के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसका नाम बदलकर 'मारिनेरा' कर दिया गया है. यह वर्तमान में रूसी झंडे के साथ पंजीकृत है. टैंकर ने अमेरिका की समुद्री नाकेबंदी को चकमा देकर निकलने की कोशिश की थी और अमेरिकी कोस्ट गार्ड द्वारा जहाज पर चढ़ने के प्रयासों को भी विफल कर दिया था. इसके बाद अटलांटिक में दो हफ्ते तक इसका पीछा किया गया.

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जिस समय अमेरिकी सेना इस ऑपरेशन को अंजाम दे रही थी, उस समय एक रूसी सैन्य जहाज और एक रूसी पनडुब्बी भी उसी क्षेत्र में मौजूद थी, जिससे टकराव का खतरा पैदा हो गया. यह जब्ती राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के उस आदेश का हिस्सा है, जिसके तहत उन्होंने वेनेजुएला के सभी स्वीकृत तेल टैंकरों की पूर्ण नाकेबंदी करने का निर्देश दिया था.

मारिनेरा के अलावा, अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने लैटिन अमेरिकी जलक्षेत्र में वेनेजुएला से जुड़े एक और टैंकर को इंटरसेप्ट किया है. इन कार्रवाइयों का उद्देश्य वेनेजुएला सरकार की आय के मुख्य स्रोत (तेल निर्यात) को पूरी तरह से बंद करना और उन पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है.

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रूस ने पहले ही वेनेजुएला के प्रति अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को दोहराया है. रूसी ध्वज वाले जहाज को जब्त करने की अमेरिकी कोशिश कूटनीतिक संबंधों को और खराब कर सकती है, खासकर तब जब रूसी युद्धपोत पास में ही मौजूद हों.

वेनेजुएला के बाद अब किसका नंबर

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ईरान में 2,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

ईरान में 2,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारी गिरफ्तार

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई एक मीटिंग के दौरान बोलते हुए
प्रदर्शन की मुख्य वजह विदेशी मुद्राओं के मुकाबले ईरानी मुद्रा में आई भारी गिरावट और आर्थिक तंगी हैतस्वीर: Iranian Supreme Leader'S Office/ZUMA/IMAGO

ईरान की न्यायपालिका ने देश भर में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के जवाब में 'फास्ट-ट्रैक' सुनवाई शुरू करने का फैसला किया है. ईरानी न्यायपालिका के प्रमुख, मुख्य न्यायाधीश गुलामहुसैन मोहसेनी एजेई ने सरकारी मीडिया को बताया कि दंगाइयों के मामलों से त्वरित और व्यापक रूप से निपटने के लिए अनुभवी न्यायाधीशों के साथ विशेष न्यायिक कक्ष बनाए जाएंगे. एजेई ने इस्राएल और अमेरिका पर इन प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस्लामी गणराज्य के खिलाफ दुश्मन की मदद करने वालों के प्रति अब कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.

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दिसंबर के अंत में तेहरान से शुरू हुए इन प्रदर्शनों के पहले 10 दिनों के भीतर ही 2,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. अशांति का मुख्य कारण विदेशी मुद्राओं के मुकाबले ईरानी मुद्रा में आई भारी गिरावट और आर्थिक तंगी है. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के नेटवर्क 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी' के अनुसार, अब तक कम से कम 36 लोगों की मौत हो चुकी है. यह विरोध प्रदर्शन अब ईरान के 31 में से 27 प्रांतों तक फैल चुका है.

ईरानी अधिकारियों ने अभी तक प्रदर्शनकारियों की मौत का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है. हालांकि, सरकार ने सुरक्षा बलों के कम से कम दो सदस्यों की मौत और एक दर्जन से अधिक के घायल होने की पुष्टि की है. 

विश्व युद्ध के बाद चौथे दशक की कहानी

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बर्लिन में चार दिन बाद लौटी बिजली, दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे लंबा 'ब्लैकआउट' को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

बर्लिन में चार दिन बाद लौटी बिजली, दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे लंबा 'ब्लैकआउट'

एक बड़े से कमरे में मौजूद लोग
बर्लिन में चार दिन बाद बहाल हुई बिजली आपूर्तितस्वीर: Omer Messinger/AFP/Getty Images

जर्मनी की राजधानी बर्लिन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में बुधवार, 7 जनवरी को बिजली पूरी तरह से बहाल कर दी गई. शनिवार, 3 जनवरी को एक पावर स्टेशन पर संदिग्ध वामपंथी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई आगजनी के चलते करीब 45,000 घरों और 2,000 से ज्यादा व्यवसायों की बिजली कट गई थी. यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मन राजधानी में बिजली गुल होने की सबसे लंबी अवधि थी.

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बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने बिजली बहाल होने पर राहत व्यक्त की. उन्होंने कहा कि 3 जनवरी से बिजली और हीटिंग के बिना रह रहे लोगों के लिए आज एक अच्छा दिन है. बिजली बहाल करने की प्रक्रिया बुधवार, 7 जनवरी को सुबह 11 बजे से चरणबद्ध तरीके से शुरू की गई.

इस घटना के पीछे वामपंथी ग्रुप 'वोल्केनो' समूह का हाथ था, जिसने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पिछले शनिवार को की गई इस आगजनी में एक नहर के ऊपर बने केबल डक्ट पूरी तरह नष्ट हो गए थे. भीषण ठंड के बीच मोबाइल फोन कनेक्टिविटी, हीटिंग और ट्रेन सेवाएं ठप होने के कारण स्थिति काफी गंभीर हो गई थी, जिसके बाद स्थानीय निवासियों की मदद के लिए जर्मन सेना को तैनात करना पड़ा.

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इस लंबे ब्लैकआउट ने बर्लिन के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. कई राजनेताओं ने अब राजधानी के महत्वपूर्ण केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने और निवेश करने की मांग की है. घरेलू खुफिया एजेंसी ने भी पहले ही वामपंथी उग्रवादियों से बढ़ते खतरों की चेतावनी दी थी.

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जिंदल स्टील खरीद सकती है जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप का स्टील व्यवसाय को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

जिंदल स्टील खरीद सकती है जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप का स्टील व्यवसाय

थिसेनक्रुप की स्टील फैक्ट्री के अंदर की तस्वीर
एक समय में जर्मनी के निर्माण उद्योग की पहचान रही थिसेनक्रुप हाल के सालों में संकट में चली गई है. इसे अपने पारंपरिक स्टील व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ हैतस्वीर: Roland Weihrauch/dpa/picture alliance

जर्मनी की दिग्गज कंपनी थिसेनक्रुप अपना स्टील व्यवसाय, भारतीय कंपनी जिंदल स्टील इंटरनेशनल को बेच सकती है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने इस मामले की जानकारी रखने वाले चार लोगों से बातचीत के आधार पर बताया कि यह सौदा कुछ चरणों में पूरा हो सकता है. जिंदल स्टील इंटरनेशनल ने पिछले साल अक्टूबर में थिसेनक्रुप के स्टील व्यवसाय (टीकेएसई) को खरीदने का प्रस्ताव रखा था.

फिलहाल, दोनों कंपनियां इस जटिल व्यवसाय की बिक्री को लेकर बातचीत जारी रखे हुए हैं. जिन विकल्पों पर चर्चा हो रही है, उनमें से एक यह है कि जिंदल स्टील पहले टीकेएसई में बहुमत हिस्सेदारी खरीदेगी, जो करीब 60 फीसदी होगी. बाकी 40 फीसदी हिस्सेदारी, अगले एक या दो चरणों में खरीदी जाएगा, जो कंपनी के पुनर्गठन में हुई प्रगति पर निर्भर करेगा.

एक समय में जर्मनी के निर्माण उद्योग की पहचान रही थिसेनक्रुप हाल के सालों में संकट में चली गई है. इसे अपने पारंपरिक स्टील व्यवसाय में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. कंपनी निर्माण की बढ़ती कीमतों और एशियाई कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है. ऑटो पार्ट्स से लेकर पनडुब्बियां तक बनाने वाली यह कंपनी इसलिए अब अपना स्टील व्यवसाय बेचना चाहती है. 

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अमेरिकी टैरिफों के बावजूद मजबूती से बढ़ती दिख रही भारत की जीडीपी को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

अमेरिकी टैरिफों के बावजूद मजबूती से बढ़ती दिख रही भारत की जीडीपी

भारतीय मुद्रा के 500 रुपये के नोटों की तस्वीर
बीते साल के आखिर में भारत सरकार ने कहा था कि जापान को पीछे छोड़कर भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया हैतस्वीर: Soumyabrata Roy/NurPhoto/IMAGO

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी के 7.4 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है. राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने बुधवार, 7 जनवरी को यह अनुमान जाहिर किया है. यह विकास दर सरकार के उस शुरुआती अनुमान से ज्यादा है, जिसमें जीडीपी के 6.3 से 6.8 फीसदी की दर से बढ़ने की बात कही गई थी. इससे पहले, वित्त वर्ष 2024-25 में भारतीय जीडीपी 6.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ी थी. 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, मजबूत घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने अमेरिकी टैरिफों के असर से निपटने में भारतीय अर्थव्यवस्था की मदद की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी, जिसमें जीएसटी की संरचना में व्यापक बदलाव, आयकर छूट और श्रम कानूनों को लागू करना शामिल है. 

बीते साल के आखिर में भारत सरकार ने अपनी वार्षिक आर्थिक समीक्षा में कहा था कि जापान को पीछे छोड़कर भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और उम्मीद जताई थी कि देश की अर्थव्यवस्था तीन साल के भीतर जर्मनी से भी आगे निकल जाएगी. इसमें 2030 तक भारत की जीडीपी 7.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान लगाया गया था.

अमेरिका-चीन-जापान-भारत क्यों डूबे हैं कर्ज में?

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पाकिस्तान में पिछले साल 5,000 से ज्यादा "आतंकी हमले" हुए को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

पाकिस्तान में पिछले साल 5,000 से ज्यादा "आतंकी हमले" हुए

आत्मघाती बम धमाके वाली जगह के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों की तस्वीर
पाकिस्तानी सेना ने बताया कि पिछले साल पाकिस्तान में 27 आत्मघाती बम धमाके हुएतस्वीर: Farooq Naeem/AFP/Getty Images

पाकिस्तान के लिए साल 2025, पिछले एक दशक के सबसे घातक सालों में से एक साबित हुआ. पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, पिछले साल पाकिस्तान में करीब 5,400 "आतंकी हमले" दर्ज किए गए. इनमें से करीब 3,800 हमले अकेले खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में दर्ज हुए. पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिम में बसा यह प्रांत अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है. 

पाकिस्तानी सेना की मीडिया विंग ने बताया कि इन हमलों में 27 आत्मघाती बम धमाके भी शामिल हैं और ऐसे दो मामलों में हमलावर महिलाएं थीं. पाकिस्तान ने यह भी कहा कि लगभग सभी बड़े हमलों में अफगान नागरिक शामिल थे. सेना के प्रवक्ता ने कहा कि तालिबान के हाथ में अफगानिस्तान की सत्ता आने के बाद से आतंकी हमलों में बढ़ोतरी हुई है. 

सेना ने यह भी बताया कि आतंकी हमलों में 1,200 से ज्यादा आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई. इसके अलावा, सुरक्षा एजेंसियों ने खुफिया जानकारियों के आधार पर 75 हजार से ज्यादा अभियान चलाए जिनमें करीब 2,600 चरमपंथी मारे गए. सेना के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी सेना सभी जगहों पर चरमपंथियों को घेर रही है. 

तालिबान राज में औरतों को किससे है आस

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बीजेपी ने किया कांग्रेस के साथ गठबंधन, सीएम फणनवीस हुए नाराज को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

बीजेपी ने किया कांग्रेस के साथ गठबंधन, सीएम फणनवीस हुए नाराज

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस की तस्वीर
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने अपनी स्थानीय ईकाइयों से इन गठबंधनों को तोड़ने के लिए कहा हैतस्वीर: Indranil Mukherjee/AFP/Getty Images

महाराष्ट्र में निकाय चुनावों के बाद एक चौंकाने वाली खबर आई कि अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी और कांग्रेस ने आपस में हाथ मिला लिया है. यहां की 60 सीटों में से सबसे ज्यादा 27 सीटें शिंदे गुट की शिवसेना ने जीती थीं. वहीं, बीजेपी ने 14, कांग्रेस ने 12 और अजित पवार की एनसीपी ने चार सीटें जीतीं. ऐसे में शिवसेना को अध्यक्ष पद से दूर रखने के लिए बीजेपी, कांग्रेस और एनसीपी के पार्षदों ने गठबंधन कर लिया. 

इसके अलावा, अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में बीजेपी के असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआइएमआइएम के साथ गठबंधन करने की बात सामने आई. आमतौर पर एक-दूसरे के विरोध में रहने वाली इन पार्टियों के आपस में गठबंधन करने पर लोगों को अचरज हुआ और अन्य पार्टियों ने सवाल भी उठाए. शिवसेना यूबीटी के सांसद संजय राउत ने इसे बीजेपी का दोहरा रवैया बताया. 

इसके बाद बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने इन गठबंधनों को लेकर नाराजगी जताई और अपनी स्थानीय ईकाइयों ने इन गठबंधनों को तोड़ने के लिए कहा. वहीं, महाराष्ट्र कांग्रेस ने भी कहा कि यह गठबंधन उन्हें जानकारी दिए बिना किया गया. हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक, कांग्रेस ने इस फैसले के लिए कई स्थानीय नेताओं को निलंबित भी कर दिया है.

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सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी 'धुरंधर', किसे पीछे छोड़ा को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बनी 'धुरंधर', किसे पीछे छोड़ा

धुरंधर फिल्म का एक दृश्य जिसमें रणवीर सिंह बंदूक लेकर घूमते हुए दिख रहे हैं
रणवीर सिंह स्टारर धुरंधर अब तक 830 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी हैतस्वीर: B62 Studios - Benetone Films - J/picture alliance

आदित्य धर द्वारा निर्देशित 'धुरंधर' सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्म बन गई है. ट्रेड एक्सपर्ट तरण आदर्श ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी है. उन्होंने लिखा कि रणवीर सिंह की धुरंधर ने अल्लू अर्जुन की फिल्म पुष्पा-2 के हिंदी वर्जन को कुल कमाई के मामले में पीछे छोड़ दिया है. 

तरण आदर्श ने लिखा कि धुरंधर ने रिलीज होने के 33वें दिन इस खिताब को हासिल किया. उनके मुताबिक, फिल्म अब तक 830 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर चुकी है. यशराज फिल्म्स ने इस उपलब्धि के लिए आदित्य धर और जियो स्टूडियोज को बधाई देते हुए कहा कि यह भारतीय सिनेमा के लिए एक मील का पत्थर है. 

यह फिल्म पाकिस्तान के कराची शहर के ल्यारी इलाके की कहानी कहती है, जहां के एक बड़े गैंग में भारतीय जासूस बने रणवीर सिंह घुसपैठ कर देते हैं. इस फिल्म में रणवीर सिंह के अलावा, अक्षय खन्ना, सारा अर्जुन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर माधवन ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं. इस फिल्म का दूसरा पार्ट इस साल ईद पर रिलीज होगा. 

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ट्रंप बोले, पीएम मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध लेकिन वे मुझसे खुश नहीं को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

ट्रंप बोले, पीएम मोदी के साथ बहुत अच्छे संबंध लेकिन वे मुझसे खुश नहीं

वॉशिंगटन में आपस में बात करते ट्रंप और मोदी
ट्रंप ने कहा कि भारत पर लगे ज्यादा टैरिफ की वजह से पीएम मोदी उनसे खुश नहीं हैंतस्वीर: Jim Watson/AFP

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को दावा किया कि भारत ने अब रूसी तेल खरीदना काफी कम कर दिया है. उन्होंने कहा, "पीएम मोदी के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंध हैं लेकिन वे मुझसे खुश नहीं है क्योंकि भारत ज्यादा टैरिफ चुका रहा है. लेकिन अब उन्होंने रूस से तेल खरीदना काफी कमकर दिया है." ट्रंप ने भारत के रूसी तेल खरीदने की वजह से पिछले साल भारतीय सामानों पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था. 

इसके अलावा, ट्रंप ने भारत को सैन्य साजो-सामान की डिलिवरी में होने वाली देरी के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिका से 68 अपाचे हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए ऑर्डर दिया था लेकिन उसमें पांच साल की देरी हुई. ट्रंप ने कहा, "भारत ने मुझसे कहा कि वे पांच साल से इंतजार कर रहे हैं…पीएम मोदी मेरे पास आए और कहा, 'सर, क्या मैं आपसे मिल सकता हूं' और मैंने हां कह दी."

भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने ट्रंप के इस बयान को शेयर करते हुए लिखा कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद, मोदी बिन बुलाए ही अमेरिका गए थे. शिवसेना यूबीटी की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री के लिए ट्रंप का यह लहजा अपमानजनक है. उन्होंने आगे लिखा, "ट्रंप के सभी अपमानजनक बयानों पर भारत सरकार की चुप्पी विचित्र है, क्योंकि यह हमारे देश की छवि को धूमिल करती है."

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वेनेजुएला से पांच करोड़ बैरल "प्रतिबंधित तेल" लेगा अमेरिका को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

वेनेजुएला से पांच करोड़ बैरल "प्रतिबंधित तेल" लेगा अमेरिका

फ्लोरिडा में एक बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप
तेल बेचकर मिलने वाली धनराशि पर ट्रंप का नियंत्रण होगातस्वीर: Joe Raedle/AFP/Getty Images

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला की अंतरिम सरकार, तीन से पांच करोड़ बैरल "प्रतिबंधित तेल" अमेरिका को सौंपने जा रही है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर जानकारी दी कि इस तेल को बाजार की कीमतों पर बेचा जाएगा. इस बिक्री से मिलने वाली पूरी धनराशि पर राष्ट्रपति के रूप में उनका खुद का नियंत्रण होगा, ताकि वे यह सुनिश्चित कर सकें कि इसका इस्तेमाल दोनों देशों की जनता के हित में हो.

इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए डॉनल्ड ट्रंप ने ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. उन्होंने बताया कि तेल को बड़े जहाजों के जरिए सीधे अमेरिकी बंदरगाहों पर लाया जाएगा. यह कदम पिछले शनिवार, 3 जनवरी को वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाए जाने के बाद उठाया गया है. ट्रंप पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वेनेजुएला का शासन फिलहाल अस्थायी रूप से अमेरिका के हाथ में रहेगा.

ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करना है, जिसमें अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति से अमेरिका में ईंधन की कीमतें कम हो सकती हैं, लेकिन फंड पर सीधे ट्रंप के नियंत्रण की बात ने कई कूटनीतिक सवाल भी खड़े कर दिए हैं.

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ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं ट्रंप को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सेना का इस्तेमाल कर सकते हैं ट्रंप

एक प्रेस वार्ता के दौरान बात करते अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप
वेनेजुएला के बाद अब ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर हैतस्वीर: Jonathan Ernst/REUTERS

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार, 6 जनवरी को एक बयान में पुष्टि की है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने के लिए सैन्य कार्रवाई सहित कई विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि रूस और चीन जैसे प्रतिद्वंदियों को रोकने के लिए ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा तंत्र में शामिल करना राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता है. रिपोर्टों के अनुसार, वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने खनिज संसाधनों से भरपूर इस आर्कटिक क्षेत्र पर अपना ध्यान और ज्यादा केंद्रित कर दिया है.

डेनमार्क ने इस संभावित सैन्य खतरे पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ताकत के बल पर ग्रीनलैंड को लेने की कोशिश करता है, तो यह नाटो सैन्य गठबंधन का अंत होगा. नाटो के 'अनुच्छेद 5' के तहत सभी सदस्य देश एक-दूसरे की रक्षा करने के लिए बाध्य हैं, ऐसे में एक सदस्य (अमेरिका) द्वारा दूसरे सदस्य (डेनमार्क) पर हमला करना गठबंधन को पूरी तरह नष्ट कर देगा. डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने इसे एक गंभीर गलतफहमी बताया है और शांतिपूर्ण बातचीत की उम्मीद जताई है.

दूसरी ओर, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है. उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला केवल वहां रहने वाले 57,000 लोग ही कर सकते हैं. हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि डॉनल्ड ट्रंप की पहली प्राथमिकता इसे डेनमार्क से खरीदना ही है.

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सऊदी अरब ने यूएई समर्थित इलाकों में किए हवाई हमले को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

सऊदी अरब ने यूएई समर्थित इलाकों में किए हवाई हमले

एक गाड़ी के पीछे बंदूक लेकर खड़ा पुलिस कर्मी
हूथियों ने 2014 में यमन की सरकार को सत्ता से हटा दिया थातस्वीर: Fawaz Salman/REUTERS

यमन में हूथी विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाले गुटों के बीच आपसी संघर्ष अब और हिंसक हो गया है. बुधवार, 7 जनवरी को सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने दक्षिणी यमन के धाल प्रांत में हवाई हमले किए. ये हमले सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के नेता ऐदरस अल-जुबैदी के प्रभाव वाले क्षेत्रों को निशाना बनाकर किए गए. अल-जुबैदी को हाल ही में यमन की राष्ट्रपति परिषद से हटा दिया गया था, जिसके बाद उन पर विद्रोह भड़काने और संवैधानिक सत्ता पर हमला करने के आरोप लगे हैं.

यह तनाव दिसंबर में तब शुरू हुआ जब यूएई समर्थित एसटीसी गुट ने उन इलाकों पर कब्जा करना शुरू कर दिया जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच के मतभेदों को भी दुनिया के सामने ला दिया है. जहां एक तरफ डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में स्थिरता की बात कर रहा है, वहीं यमन में सऊदी और यूएई के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने शांति की कोशिशों को मुश्किल बना दिया है.

यमन के युद्ध में शामिल प्रमुख पक्ष इस प्रकार हैं:

  • हूथी: इन्होंने 2014 में यमन की सरकार को सत्ता से हटा दिया था. ये राजधानी सना और उत्तरी इलाकों पर नियंत्रण रखते हैं और इन्हें ईरान का समर्थन हासिल है.
  • राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (पीएलसी): यह यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का नेतृत्व करती है, जिसे सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है.
  • सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी): यह दक्षिण यमन के अधिकांश हिस्सों को नियंत्रित करता है. इसे संयुक्त अरब अमीरात का समर्थन हासिल है.
  • इस्लाह पार्टी: यह मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ा एक सुन्नी गुट है, जिसका मारिब शहर में मजबूत प्रभाव है.
  • नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज: तारिक सालेह के नेतृत्व वाली यह सेना हूथियों से लड़ती है और दक्षिण यमन के अलग होने का विरोध करती है.
  • हद्रमी एलीट फोर्सेज: यह गुट सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल से जुड़ा हुआ है.

इस वक्त क्यों हुई पाकिस्तान और सऊदी अरब की डिफेंस डील

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ईरान की सीधी चेतावनी: "दुश्मन ने गलती की तो पिछले युद्ध से भी भयानक होगा अंजाम" को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

ईरान की सीधी चेतावनी: "दुश्मन ने गलती की तो पिछले युद्ध से भी भयानक होगा अंजाम"

ईरान का झंडा
ईरान में महंगाई के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैंतस्वीर: Fabian Sommer/dpa/picture alliance

ईरान के सैन्य प्रमुख जनरल अमीर हातामी ने बुधवार, 7 जनवरी को स्पष्ट किया कि ईरान अपनी संप्रभुता के खिलाफ किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को चुपचाप नहीं देखेगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दुश्मन ने कोई गलती की तो ईरान का जवाब पिछले साल जून में इस्राएल के साथ हुए 12 दिनों के युद्ध से भी कहीं अधिक भीषण होगा. ईरान का यह बयान उन रिपोर्टों के बाद आया है जिनमें अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों का समर्थन करने की बात कही गई थी.

यह विवाद तब गहराया जब राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने रविवार, 4 जनवरी को कहा कि अमेरिका ईरान की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा हुई, तो ईरान को अमेरिका की ओर से करारा जवाब मिलेगा. दूसरी ओर, इस्राएली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने ईरानी जनता के संघर्ष और उनकी आजादी की मांग के प्रति समर्थन जाहिर किया है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन दोनों नेताओं पर देश की एकता को तोड़ने और हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

ईरान में ये विरोध प्रदर्शन दिसंबर के अंत में महंगाई और राष्ट्रीय मुद्रा रियाल की गिरती  कीमत के खिलाफ शुरू हुए थे, जो अब कई शहरों में फैल चुके हैं. हालांकि, ये प्रदर्शन अभी 2009 या 2022 के आंदोलनों जितने बड़े नहीं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन्हें काफी तवज्जो मिल रही है. पिछले जून में इस्राएल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे, जिसे देखते हुए इस बार जनरल हातामी की चेतावनी को काफी गंभीर माना जा रहा है.

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उत्तर कोरिया से तनाव कम करने के लिए दक्षिण कोरिया ने मांगी चीन की मदद को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

उत्तर कोरिया से तनाव कम करने के लिए दक्षिण कोरिया ने मांगी चीन की मदद

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जेइ म्यूंग हाथ मिलाते हुए
दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर चिंता जाहिर कर चुका हैतस्वीर: Kim Do-hun/AP Photo/picture alliance

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जेइ म्यूंग ने उत्तर कोरिया के साथ जारी परमाणु विवाद सुलझाने के लिए चीन से मध्यस्थता की अपील की है. शंघाई में पत्रकारों से बात करते हुए ली ने बताया कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अनुरोध किया है कि वे दोनों देशों के बीच कड़वाहट कम करने के लिए बीच बचाव करें. ली के अनुसार, उत्तर कोरिया के साथ बातचीत के सभी रास्ते फिलहाल पूरी तरह बंद हैं, इसलिए शांति बहाल करने के लिए चीन की भूमिका अब महत्वपूर्ण हो गई है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दक्षिण कोरिया के शांति प्रयासों की तारीफ तो की, लेकिन साथ ही यह सलाह भी दी कि इस जटिल मुद्दे पर "धैर्य" रखने की जरूरत है. चीन, उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा व्यापारिक और कूटनीतिक सहयोगी है, इसलिए दक्षिण कोरिया और अमेरिका को उम्मीद है कि वह प्योंगयांग पर अपना प्रभाव इस्तेमाल करेगा. हालांकि, साल 2019 में डॉनल्ड ट्रंप के साथ हुई शिखर वार्ता के विफल होने के बाद से उत्तर कोरिया के तेवर काफी सख्त हैं और वह अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने के मूड में नहीं दिख रहा है.

दक्षिण कोरियाई सरकार का प्रस्ताव है कि उत्तर कोरिया को अपने मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने के बदले चरणबद्ध तरीके से आर्थिक लाभ दिए जाएं. राष्ट्रपति ली का मानना है कि उत्तर कोरिया का लगातार परमाणु हथियार बनाना पूरी दुनिया के लिए नुकसानदेह है. चीन ने भी इस चिंता पर सहमति जताई है, लेकिन उत्तर कोरिया के बातचीत की मेज पर फिर से लौटने को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है.

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एप्पल को पीछे छोड़ दुनिया की नंबर-1 कंपनी बनी एनवीडिया को स्किप करें
७ जनवरी २०२६

एप्पल को पीछे छोड़ दुनिया की नंबर-1 कंपनी बनी एनवीडिया

एनवीडिया की बिल्डिंग के बाहर लगा कंपनी का लोगो
एनवीडिया की मार्केट वैल्यू 4.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई हैतस्वीर: Justin Sullivan/Getty Images/AFP

कंसल्टिंग फर्म ईवाई की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, एनवीडिया की मार्केट वैल्यू 4.5 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई है, जबकि एप्पल लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर है. एनवीडिया के चिप सिस्टम आज के दौर में एआई सॉफ्टवेयर के लिए सबसे महत्वपूर्ण तकनीक बन चुके हैं, जिसकी वजह से इसके शेयरों में जबरदस्त उछाल आया है. 

कंपनी की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी अकेले की वैल्यू जर्मनी के मुख्य स्टॉक इंडेक्स डीएएक्स की सभी 40 कंपनियों की कुल वैल्यू (2.5 ट्रिलियन डॉलर) से लगभग दोगुनी है.

बाजार रैंकिंग में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा पूरी तरह कायम है. शीर्ष 10 में से 8 कंपनियां अमेरिका की हैं, जिनमें गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट तीसरे स्थान पर है, जिसके बाद माइक्रोसॉफ्ट और एमेजॉन का नंबर आता है. अमेरिका के बाहर केवल दो कंपनियां टॉप-10 में जगह बना पाई हैं- सऊदी अरामको (आठवें स्थान पर) और ताइवान की चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी (10वें स्थान पर).

ईवाई के चेयरमैन हेनरिक अहलर्स के अनुसार, साल 2025 पूरी तरह से एआई के नाम रहा है. नई एआई तकनीकों और बिजनेस मॉडलों को लेकर दुनिया भर में जो उत्साह देखा गया, उसका सबसे ज्यादा फायदा अमेरिकी और एशियाई कंपनियों को मिला है. दुनिया की 100 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 60 अकेले अमेरिका की हैं.

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आदर्श शर्मा
आदर्श शर्मा डीडब्ल्यू हिन्दी के साथ जुड़े आदर्श शर्मा भारतीय राजनीति, समाज और युवाओं के मुद्दों पर लिखते हैं.
आयुष यादव
आयुष यादव एडिटर, डीडब्ल्यू हिन्दीhttps://x.com/aayush9906?s=21