मैनचेस्टर में कार और चाकू हमले में दो की मौत, तीन घायल
प्रकाशित २ अक्टूबर २०२५आखिरी अपडेट २ अक्टूबर २०२५
देश की आजादी के लिए आरएसएस के एक भी सदस्य ने जान नहीं गंवाई: ओवैसी
एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे का खंडन किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया है. ओवैसी ने कहा, “यह मालूम हुआ कि आरएसएस का एक भी आदमी, मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान नहीं गंवाया.” उन्होंने कहा कि अगर कोई नाम है, तो हमें बता दो.
उन्होंने कहा कि 1942 में हुए भारत छोड़ो आंदोलन में भी आरएसएस ने हिस्सा नहीं लिया था. उन्होंने कहा, “ब्रिटिश आर्काइव और रिकॉर्ड में अंग्रेजो ने लिखा कि आरएसएस के कार्यकर्ता कभी (आजादी की लड़ाई) में हिस्सा नहीं लिए और उनसे हमें कोई खतरा नहीं है.” ओवैसी ने दावा किया कि 14 अगस्त, 1947 को आरएसएस की पत्रिका ऑर्गेनाइजर में तिरंगे के तीन रंगों को अशुभ बताया गया था.
मध्य प्रदेश में 'ओबीसी आरक्षण' बढ़ाने पर सरकार ने क्या कहा
मध्य प्रदेश सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए आरक्षण में बढ़ोतरी करने के फैसले का सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया है. सरकार ने ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया था. कानूनी मामलों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 51 फीसदी से ज्यादा है.
2022 की ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में भी इसकी पुष्टि की गई थी. इन आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि ओबीसी आरक्षण को पहले 14 प्रतिशत पर सीमित रखा गया था, जो आबादी में उनकी हिस्सेदारी के साथ-साथ उनके सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के लिहाज से भी पूरी तरह अनुपातहीन था. सरकार ने ओबीसी आरक्षण में बढ़ोतरी को “संवैधानिक रूप से अनिवार्य सुधारात्मक कदम” बताया.
यह हलफनामा उन याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया था, जिनमें राज्य की सभी सरकारी नौकरियों में ओबीसी आरक्षण को बढ़ाने के फैसले को चुनौती दी गई थी. 2022 में एमपी हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर राज्य को 14 फीसदी से अधिक ओबीसी आरक्षण देने से रोक दिया था. साल 2024 में याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट को ट्रांसफर कर दी गईं, जहां इस महीने उन पर अंतिम सुनवाई होगी.
भारत में लोकतंत्र पर हो रहा हमला सबसे बड़ी चुनौती: राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार, 2 अक्टूबर को नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोकतंत्र पर हो रहा हमला है. उन्होंने कोलंबिया की ईआईए यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए बीजेपी सरकार की नीतियों समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “भारत के पास इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में मजबूत क्षमताएं हैं, इसलिए मैं देश को लेकर बहुत आशावादी हूं. लेकिन साथ ही, भारत के ढांचे में कुछ खामियां भी हैं, जिन्हें सुधारना होगा. सबसे बड़ी चुनौती भारत में लोकतंत्र पर हो रहा हमला है.”
उन्होंने आगे कहा, “भारत में अनेक धर्म, परंपराएं और भाषाएं हैं. वास्तव में यह देश इन सभी लोगों और संस्कृतियों के बीच एक संवाद है. विभिन्न परंपराओं, धर्मों और विचारों को जगह की जरूरत होती है और उस जगह को बनाने का सबसे अच्छा तरीका लोकतांत्रिक व्यवस्था है.” उन्होंने कहा कि इन विविध परंपराओं को पनपने देना और उन्हें जरूरी जगह देना जरूरी है.
मैनचेस्टर में यहूदी पूजा घर के बाहर हुए हमले में दो लोगों की मौत
ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस ने बताया कि एक यहूदी पूजा घर के बाहर हुई घटना में दो लोगों की मौत हो गई है और तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हैं. पुलिस के अनुसार, संदिग्ध हमलावर भी मारा गया है. यह घटना यहूदियों के सबसे पवित्र दिन माने जाने वाले यौम किपुर के मौके पर हुई है.
घटना इंग्लैंड के मैनचेस्टर शहर में एक यहूदी पूजा घर के बाहर हुई. प्रत्यक्षदर्शी ने पुलिस को बताया कि उसने एक कार को नागरिकों की ओर तेजी से आते और एक व्यक्ति को चाकू मारते हुए देखा. घटनास्थल पर पहुंची पुलिस टीम ने बताया, "एक व्यक्ति को गोली लगी है, जिसके हमलावर होने का संदेह है." पुलिस ने बताया कि घायल हुए चार लोगों का इलाज किया जा रहा था, जिनमें से दो की बाद में मौत हो गई.
प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने घटना पर दुख जताया है और डेनमार्क में यूरोपीय नेताओं के सम्मेलन को बीच में छोड़कर देश वापस आने का फैसला किया है. 2017 में मैनेचस्टर में एक संगीत समारोह में हुए आत्मघाती बम हमले में 22 लोगों की मौत हुई थी.
यूरोपीय राजनीतिक नेताओं की डेनमार्क में बैठक
यूरोपियन पॉलिटिकल कम्यूनिटी (ईपीसी) के नेता सुरक्षा और आर्थिक खतरों के साथ-साथ प्रवासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गुरुवार को डेनमार्क के कोपेनहेगन में इकट्ठा हुए हैं. 47 नेताओं के इस सम्मेलन में यूक्रेन के लिए यूरोपीय समर्थन का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा, जहां डेनमार्क के राष्ट्रपति मेटे फ्रेडरिकसेन ने चेतावनी दी कि यूक्रेन की सीमाओं से परे एक हाइब्रिड युद्ध पहले ही शुरू हो चुका है.
इस बैठक में यूक्रेन को समर्थन देने के मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए. हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान ने एक बार फिर कीव के लिए यूरोपीय समर्थन की आलोचना की. उन्होंने इसे "पूरी तरह से युद्ध-समर्थक प्रस्ताव" करार दिया. इस बीच, बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने यूरोपीय नेताओं से यह गारंटी देने का आह्वान किया कि यदि रूसी संपत्तियों का उपयोग कीव को समर्थन देने के लिए किया जाता है, तो जोखिम साझा किया जाए.
इस महत्त्वपूर्ण बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की, फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल माक्रों और जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स सहित अन्य नेता भी उपस्थित हैं. सुरक्षा एजेंडे में आर्थिक सुरक्षा और ड्रोन से बढ़ता खतरा भी शामिल है.
पंजाब में बाढ़ और बारिश से धान की फसल को ₹7,500 करोड़ का नुकसान
डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में आई बाढ़ और अत्यधिक बारिश के कारण पंजाब में धान की फसल का 37 प्रतिशत हिस्सा तबाह हो गया है. पंजाब राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष हरचंद सिंह ने बताया कि राज्य को इस आपदा में कुल 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसका एक बड़ा हिस्सा धान की फसल से संबंधित है.
डाउन टू अर्थ के आकलन के अनुसार, अत्यधिक बारिश, बाढ़ और इसके परिणामस्वरूप फैली 'फॉल्स स्मट' नामक फफूंदी रोग के कारण 1,21,405 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खड़ी धान की फसलें प्रभावित हुईं. अकेले धान (परमल और बासमती किस्मों) की फसल में अनुमानित 7,500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. यह नुकसान राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के वार्षिक औसत बजट (लगभग 10,000 करोड़ रुपये) के लगभग बराबर है.
पंजाब में कुल 32 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की बुवाई की गई थी, जिसमें से लगभग 6,81,000 हेक्टेयर में बासमती की खेती हुई थी. किसानों और कृषि विभाग के आकलन के आधार पर, लगभग 5 लाख एकड़ फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गईं, जबकि अन्य क्षेत्रों में भी औसतन 10 प्रतिशत उपज की कमी दर्ज की गई है.
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में विरोध-प्रदर्शन, चार लोगों की हुई मौत
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में बुधवार, 1 अक्टूबर को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध-प्रदर्शन किए. ये लोग खाद्य पदार्थों, बिजली और अन्य सेवाओं पर सब्सिडी की मांग कर रहे थे. बाद में इन प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हिंसक झड़पें हो गईं, जिससे चार लोगों की मौत हो गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए. न्यूज एजेंसी एपी ने पुलिस के हवाले से यह जानकारी दी है.
स्थानीय पुलिस अधिकारी मोहम्मद अफजल ने बताया कि हिंसा तब शुरू हुई जब लाठी और बंदूकों से लैस प्रदर्शनकारियों ने वहां तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया. उन्होंने हिंसा में तीन पुलिसकर्मी और एक आम नागरिक की मौत होने की पुष्टि की है. अफजल ने बताया कि पुलिसकर्मियों के सिर पर लाठी और पत्थरों से हमला किया गया था, जिसके चलते आठ पुलिसकर्मियों की हालत बेहद नाजुक है.
अर्जेंटीना: तीन लड़कियों की हत्या का वीडियो किया गया लाइव स्ट्रीम
अर्जेंटीना में दो 20 वर्षीय युवतियों और एक 15 साल की किशोरी की हत्या का वीडियो लाइव स्ट्रीम किए जाने से पूरे देश में आक्रोश है. पांच दिन पहले लापता हुईं इन तीनों लड़कियों को यातना देने के बाद उनकी हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया था. जांचकर्ताओं ने इस घटना को ड्रग गिरोहों से जोड़ा है, और अधिकारियों ने बताया कि इस हत्या को इंस्टाग्राम पर 45 लोगों ने देखा था.
इस घटना के विरोध में, राजधानी ब्यूनस आयर्स की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी न्याय की मांग के लिए उतर आए. पीड़ितों के परिजनों ने संसद तक मार्च किया और बैनरों पर पीड़ितों के नाम प्रदर्शित किए. नारीवादी समूहों द्वारा आयोजित इस आक्रोश मार्च में प्रदर्शनकारियों के नारों में इस घटना को "नार्को-फेमिनिसाइड" (ड्रग गिरोह से जुड़ी महिला हत्या) बताया गया. अर्जेंटीना सरकार ने मंगलवार को बताया कि इस तिहरे हत्याकांड के पीछे के संदिग्ध मास्टरमाइंड को पेरू में गिरफ्तार कर लिया गया है.
अफगानिस्तान में चालू हुईं मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं
अफगानिस्तान में बुधवार, 1 अक्टूबर की शाम को मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं फिर से चालू हो गईं. दरअसल, वहां 29 सितंबर की रात को मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं अचानक से बंद हो गई थीं. कथित तौर पर तालिबान प्रशासन के आदेश देने की वजह से ऐसा हुआ था. इससे वहां के कई व्यवसाय ठप पड़ गए थे और अफगान नागरिक बाकी दुनिया से कट गए थे.
कनेक्टिविटी बहाल होने के बाद सैकड़ों अफगान नागरिक जश्न मनाने के लिए राजधानी काबुल की सड़कों पर उतर आए. लोगों ने मिठाई और गुब्बारे खरीदकर अपनी खुशी जाहिर की. हालांकि, तालिबान प्रशासन ने इस पूरे घटनाक्रम पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. इससे यह साफ नहीं हो पाया है कि तालिबान ने खुद इंटरनेट सेवाएं बंद करने का आदेश दिया था या तकनीकी कारणों से ऐसा हुआ.
पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी बोले, बीसीसीआई से नहीं मांगी माफी
एशिया कप जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम को ट्रॉफी ना देने से जुड़े विवाद पर एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने अपना रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने भारतीय मीडिया पर झूठ फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, “मैंने कुछ गलत नहीं किया है और मैंने कभी बीसीसीआई से माफी नहीं मांगी है और ना ही मैं कभी ऐसा करूंगा.”
नकवी एशियन क्रिकेट काउंसिल के साथ साथ पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष भी हैं. इसके अलावा, वे पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं. इन्हीं वजहों से भारतीय टीम ने उनके हाथों एशिया कप की ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था. वहीं, किसी और के हाथों भारतीय टीम को ट्रॉफी देने के लिए नकवी तैयार नहीं हुए थे, जिसके बाद टीम ने बिना ट्रॉफी के ही जश्न मनाया था.
नकवी ने एक्स पर लिखा, “एसीसी अध्यक्ष के तौर पर, मैं उसी दिन ट्रॉफी देने के लिए तैयार था और मैं अभी भी तैयार हूं. अगर वे (भारतीय टीम) सच में इसे चाहते हैं, तो उनका स्वागत है कि वे एसीसी ऑफिस आएं और मुझसे इसे ले लें.”
हुरुन रिच लिस्ट 2025: मुकेश अंबानी टॉप पर, शाहरुख खान बने अरबपति
एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, भारत में अरबपतियों (जिनकी संपत्ति एक अरब डॉलर से अधिक है) की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो अब 358 हो गई है. कुल मिलाकर, 1,000 करोड़ या उससे अधिक की संपत्ति वाले 1,687 व्यक्ति इस सूची में शामिल किए गए हैं, जो पिछले साल की तुलना में 148 अधिक है. इस दौरान 1,004 व्यक्तियों की संपत्ति में वृद्धि हुई या वह स्थिर रही, जबकि 643 को नुकसान उठाना पड़ा.
इस वर्ष की सूची में सबसे बड़ा बदलाव शीर्ष क्रम पर देखने को मिला. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार ने 9.55 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है, जबकि गौतम अडानी 8.14 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे स्थान पर रहे.
नए नामों में, बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान 12,490 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ पहली बार अरबपतियों के क्लब में शामिल हुए हैं. वहीं, एआई कंपनी परप्लेक्सिटी के संस्थापक अरविंद श्रीनिवास 21,190 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ इस सूची में सबसे कम उम्र के अरबपति बने हैं.
मशहूर प्राइमेटोलॉजिस्ट जेन गोडॉल का 91 वर्ष की आयु में निधन
विश्व-विख्यात प्राइमेटोलॉजिस्ट डॉ. जेन गोडॉल का 91 वर्ष की आयु में संयुक्त राज्य अमेरिका में निधन हो गया. उनके फेसबुक पेज पर बुधवार, 1 अक्टूबर को जारी एक बयान में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र शांति दूत और जेन गोडॉल इंस्टिट्यूट की संस्थापक डॉ. जेन गोडॉल का निधन स्वाभाविक कारणों से हुआ. निधन के समय वह संयुक्त राज्य अमेरिका के दौरे पर थीं.
गोडॉल की खोजों ने विज्ञान को मौलिक रूप से बदल दिया. वह एक इथोलॉजिस्ट थीं, जिनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह खोज थी कि चिम्पैंजी उपकरणों का उपयोग करते हैं. इस खोज ने मानव जगत के साथ जानवरों के संबंधों के बारे में हमारी समझ को मूलभूत रूप से बदल दिया.
उनके निधन पर संयुक्त राष्ट्र ने गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने हमारे ग्रह और इसके सभी निवासियों के लिए अथक प्रयास किए, जिसने मानवता और प्रकृति के लिए एक असाधारण विरासत छोड़ी है. एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि वह उन कुछ चुनिंदा लोगों में से थीं जिन्होंने ग्रैजुएशन की डिग्री के बिना ही पीएचडी की उपाधि हासिल की.
उनका जन्म 1934 में लंदन में हुआ था और उन्होंने 1960 में तंजानिया में जंगली चिम्पैंजी समुदायों का अध्ययन शुरू किया था. 1977 में, उन्होंने जेन गोडॉल इंस्टीट्यूट की स्थापना की, जो प्रजातियों की रक्षा और पर्यावरण को लाभ पहुंचाने के लिए काम करता है.
इलॉन मस्क ने रचा इतिहास, बने दुनिया के पहले 'हाफ-ट्रिलियनेयर'
अरबपति कारोबारी इलॉन मस्क 500 अरब डॉलर से अधिक की कुल संपत्ति हासिल करने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति बन गए हैं. उनकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला और उनकी अन्य प्रमुख कंपनियों के मूल्यांकन में इस साल आए जबरदस्त उछाल के कारण उन्होंने इतिहास रच दिया है. फोर्ब्स के अरबपतियों के सूचकांक के अनुसार, न्यूयॉर्क समय के अनुसार बुधवार को मस्क की कुल संपत्ति 500.1 अरब डॉलर पर पहुंची थी, हालांकि बाद में दिन में इसमें मामूली गिरावट आई.
मस्क की संपत्ति में यह अभूतपूर्व वृद्धि केवल टेस्ला तक ही सीमित नहीं है. उनकी रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स और हाल ही में शुरू किए गए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्टार्टअप एक्सएआई सहित उनके अन्य उद्यमों के मूल्यांकन में भी हाल के महीनों में वृद्धि हुई है. इन सभी कंपनियों ने मिलकर उन्हें व्यक्तिगत संपत्ति के मामले में एक ऐसे स्तर पर पहुंचा दिया है, जहां आज तक कोई नहीं पहुंचा था.
इस रिकॉर्ड ने मस्क के दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति के दर्जे को और भी मजबूत कर दिया है. फोर्ब्स के अरबपतियों के सूचकांक में वह अब अपने निकटतम प्रतिद्वंदी ओरेकल के संस्थापक लैरी एलिसन से काफी आगे निकल गए हैं, जिनकी संपत्ति लगभग 350.7 अरब डॉलर आंकी गई है.
हिमालय क्षेत्र में विकास की नीति पर मोहन भागवत ने जताई चिंता
भारत में गुरुवार, 2 अक्टूबर को दशहरा और विजयादशमी का पर्व मनाया जा रहा है. इस मौके पर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ आरएसएस के भी 100 साल पूरे हो गए हैं. इस संगठन की स्थापना सन 1925 में दशहरे के दिन ही हुई थी. गुरुवार को आरएसएस ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव का आयोजन किया, जिसमें आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्वंयसेवकों को संबोधित किया. उन्होंने अमेरिकी टैरिफ, अन्य देशों से संबंध और स्वदेशी समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि अभी हाल में अमेरिका ने जो टैरिफ नीति अपनाई, उनके अपने हित के लिए अपनाई होगी लेकिन उसकी मार तो सभी पर पड़ रही है. उन्होंने आगे कहा कि विश्व में राष्ट्रों के बीच सब प्रकार के संबंध होते हैं, कोई राष्ट्र अकेला रहकर जी नहीं सकता लेकिन ये निर्भरता मजबूरी में ना बदल जाए इसलिए हमको आत्मनिर्भर होना पड़ेगा और स्वदेशी का उपयोग करना पड़ेगा.
भागवत ने हिमालय क्षेत्र में बढ़ रही आपदाओं पर भी बात की. उन्होंने कहा, “हिमालय हमारे लिए सुरक्षा की दीवार है और दक्षिण पूर्व एशिया के लिए उसका पूरा जल स्रोत हिमालय से ही आता है. अगर प्रचलित विकास की पद्धति से इन घटनाओं (प्राकृतिक आपदाओं) को और बढ़ावा मिलता हो तो उस नीति पर हमें पुनर्विचार करना होगा क्योंकि हिमालय की आज की अवस्था एक खतरे की घंटी बजा रही है.”
उन्होंने नेपाल और बांग्लादेश में हुए सत्ता-विरोधी आंदालनों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि जब प्रशासन जनता के पास नहीं रहता, संवदेनशील नहीं रहता, जनता को ध्यान में रखकर नीतियां नहीं बनतीं तो असंतोष रहता है. उन्होंने आगे कहा कि लेकिन उस असंतोष के इस प्रकार व्यक्त होने से किसी का फायदा नहीं है.
इस्राएल ने गाजा जा रहे 13 सहायता जहाजों को रोका
इस्राएली सेना द्वारा गाजा जा रहे एक बड़े सहायता बेड़े (फ्लोटिला) को रोके जाने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना बढ़ गई है. इसके विरोध में दुनिया भर के प्रमुख शहरों में रात में प्रदर्शन हुए. बेड़े के आयोजकों ने गुरुवार को बताया कि इस्राएली बलों ने कुल 43 जहाजों में से 13 जहाजों को रोक लिया है, जबकि शेष 30 जहाज युद्धग्रस्त गाजा की ओर अभी भी बढ़ रहे हैं.
रोके गए जहाजों पर मौजूद कार्यकर्ताओं में प्रमुख जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग, नेल्सन मंडेला के पोते मंडला मंडेला, बार्सिलोना की पूर्व मेयर अडा कोलाउ और कई यूरोपीय सांसद शामिल थे. इस्राएली अधिकारियों ने कहा कि इन सभी कार्यकर्ताओं को सुरक्षित हिरासत में ले लिया गया है और उन्हें इस्राएल भेज दिया गया है.
इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने पुष्टि की है कि इन कार्यकर्ताओं को जल्द ही निर्वासित किया जाएगा. इस कार्रवाई पर तुर्की के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसने इसे "आतंकवादी कृत्य" और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया. इस सहायता बेड़े में लगभग 500 कार्यकर्ता शामिल थे, जो गाजा के नागरिकों के लिए मानवीय सहायता पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे.