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जापान के रू इशिहारा के नूडल बहुत लोकप्रिय हैं
जापान के रू इशिहारा के नूडल बहुत लोकप्रिय हैंतस्वीर: Kim Kyung-Hoon/Reuters

यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ सकते हैं सोबा नूडल

३ मई २०२२

जापान के लोकप्रिय सोबा नूडल यूक्रेन युद्ध की भेंट चढ़ सकते हैं. यह सस्ता और सेहतमंद खाना अब महंगाई के जाल में फंस चुका है. युद्ध का असर कहां कहां होता है, इसकी सोबा नूडल विशेष मिसाल हैं.

https://www.dw.com/hi/japans-low-cost-soul-food-noodles-may-become-casualty-of-ukraine-war/a-61667080

यह दस साल में पहली बार होगा जबकि टोक्यो के रू इशिहारा को अपने मशहूर लेकिन बेहद सस्ते सोबा नूडल्स के दाम बढ़ाने पड़ेंगे. वजह, रूस और यूक्रेन का युद्ध. यूक्रेन में जारी युद्ध ने जापान के लोकप्रिय सस्ते खाने को संकट में डाल दिया है. कुछ लोगों ने तो यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि यह खास डिश विलुप्त ही हो जाएगी.

जापान में फाफरे या कुट्टू के आटे से बने नूडल बहुत चाव से खाए जाते हैं. नव वर्ष की पूर्व संध्या पर तो यह बेहद महत्वपूर्ण डिश होती है क्योंकि माना जाता है कि इससे सौभाग्य आता है. रूस फाफरे या कुट्टू का सबसे बड़ा उत्पादक है.

हर ओर महंगाई का असर

यूक्रेन युद्ध का असर फाफरे की आपूर्ति पर पड़ा है. हालांकि आयात अब भी संभव है लेकिन आपूर्ति इतनी ज्यादा अस्थिर हो गई है कि इसमें अनिश्चितता लगातार बढ़ रही है. और जाहिर है कि इससे महंगाई भी बढ़ रही है. लिहाजा जापान में फाफरे के आटे से सोबा नूडल बनाने वाले मजबूर हो गए हैं कि या तो दाम बढ़ाएं या डिश को बनाना ही बंद कर दें.

सोबा नूडल बनाने वालों के सामने सिर्फ फाफरे के आटे की समस्या नहीं है. अन्य चीजों के दाम भी बढ़े हैं. सोया सॉस, आटा, सब्जियां आदि सब चीजें महंगी हो चुकी हैं और जापानी येन की कीमत तेजी से कम हुई जिस कारण महंगाई आसमान पर पहुंच गई है. इसलिए इशिहारा जैसे सोबा नूडल बनाने वाले अब पसोपेश में हैं.

कीमत तो बढ़ानी पड़ेगी

अपनी छोटी सी दुकान संभालते इशिहारा कहते हैं, "सप्लायर ने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है. लेकिन इस बार हालात इतने खराब हैं कि दाम बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं है. 10-15 प्रतिशत तक तो दाम बढ़ाने ही पड़ेंगे.”

बिना नुकसान किए केले के छिलके को छीलने वाला रोबोट

सोबा जापान का लोकप्रिय खाना है. यह गर्म भी खाया जा सकता है और ठंडा भी. अक्सर छात्र, मजदूर और अन्य मध्यमवर्गीय लोग इसे चाव से खाते हैं. लेकिन यह उच्च वर्ग के लोगों के बीच भी अपनी जगह बना चुका है क्योंकि इसमें कैलरी कम होती हैं और विटामिन व खनिज अधिक होते हैं जिससे यह सेहतमंद पोषक खाने के रूप में प्रचारित हो रहा है.

चेरी के फूलों से सजा जापान

इशिहारा सोबा नडूल के लिए 290 येन (करीब 170 रुपये) से अन्य चीजों के साथ 550 येन (325 रुपये) तक लेते हैं. वह कहते हैं, "अब युद्ध के चलते फाफरे को आयात करना ही इतना महंगा हो गया है.”

रूस और चीन पर निर्भरता

जापान सोबा एसोसिएशन के मुताबिक 2020 में जापान ने अपनी जरूरत का 42 प्रतिशत फाफरा खुद पैदा किया था. बाकी रूस से आया था जो कृषि मंत्रालय के मुताबिक 2018 से देश का तीसरा सबसे बड़ा  फाफरा निर्यातक था. 2021 में यह चीन को पीछे छोड़ दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बना और इस साल उसने पहला नंबर हासिल कर लिया.

हर साल सिर्फ 320 रुपये बढ़ता है इस जापानी का वेतन

उसके बाद फरवरी में रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया, जिसका असर पूरी दुनिया सहित जापान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा. कोविड से उबर रही जापानी येन की कीमत 20 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी है. उसके ऊपर रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों ने हालात को और जटिल कर दिया क्योंकि जापानी व्यापारियों के लिए सामान खरीदने के लिए भुगतान करना मुश्किल हो गया.

नूडल्स पैक करने वाला रोबोट

हुया यू जैसे जापान की सोबा आयातक और आटा मिल मालिक कहती हैं कि उनकी कंपनी रूस के अलावा चीन आदि से भी फाफरे के बीच आयात करती है. उनका सालाना आयात 800-1000 टन के बीच होता है. वह बताती हैं कि पिछले छह महीने में कीमतें 30 प्रतिशत ततक बढ़ चुकी हैं.

दुनिया के कुल फाफरे का आधा रूस में ही पैदा होता है. इसलिए चीन के फाफरे की मांग बढ़ गई है, जो दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. लेकिन चीन अपने यहां फाफरे का उत्पादन लगातार कम कर रहा है इसलिए कीमतें और बढ़ती जा रही हैं. हुया यू कहती हैं, "तो हो सकता है कि सस्ता सोबा नूडल खाना मुश्किल हो जाए.”

वीके/सीके (रॉयटर्स)

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